Sunday, March 21, 2021

अफसोस.. अचरज

यूं तो जि़ंदंगी ने हमेशा, तनाव ही तनाव दिये,

फिर भी कभी अंग्रेजी वाली टेंशन न बनी,

कुल पैंतीस साल हमने प्राइवेट मे नौकरी की,

बुढापे के वास्ते, फिर भी शाली पेंशन न बनी।

 

#देशकेनेताओंकीजयजोचुनेजानेपरपांंचसालमेपेंशनपालेतेहैं

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर।
    भावों की गहन अभिव्यक्ति।

    ReplyDelete
  2. बिलकुल सही फरमाया
    इस मामले में हम भी
    आपके हैं हमसाया
    सारी ज़िन्दगी की
    नौकरी सरकारी
    अब होती है टेंशन
    क्यों कि नहीं मिलती पेंशन ...

    ReplyDelete

अफसोस.. अचरज

यूं तो जि़ंदंगी ने हमेशा, तनाव ही तनाव दिये, फिर भी कभी अंग्रेजी वाली टेंशन न बनी, कुल पैंतीस साल हमने प्राइवेट मे नौकरी की, बुढापे के वास्त...