Saturday, October 10, 2009

नोबेल वाली रेवड़ियां !

नोबेल शान्ति पुरुष्कार २००९ अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा को देने की घोषणा की खबर जनमानस के लिए यदि आश्चर्यजनक नहीं थी, तो सहज पचने योग्य भी नहीं थी ! एक वक्त था ,जब इस पुरुष्कार की सही मायने में एक अलग प्रतिष्ठा थी ! इंसान जिसे पाने के लिए अपने हुनर को तन-मन से अपने उद्देश्य में झोंक देता था, मगर कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच इसे बामुश्किल ही प्राप्त कर पाता था! हो सकता है कि बराक हुसैन ओबामा आगे चलकर अंतर्राष्ट्रीय शान्ति के एक प्रमुख दूत उभर कर आये, लेकिन यह बात गले नहीं उतरती कि महज अपने ९ महीने के शासन काल में उन्होंने ऐसा क्या कर दिखाया है, जो इस पुरुष्कार की चयन समिति द्बारा उन्हें इस योग्य समझ लिया गया ? अगर अमेरिकी डेमोक्रेतिवे पार्टी उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार नहीं बनाती तो २ साल पहले तक उन्हें जानता कौन था ? सवाल यह नहीं है कि उन्हें यह पुरुष्कार क्यों मिला, सवाल यह है कि क्या इस इतनी बड़ी दुनिया में उनके अलावा एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो अन्तराष्ट्रीय शान्ति का दूत कहलाने के काबिल हो ? अगर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कुछ आक्रामक नीतिया अपने शासन काल में नहीं अपनाई होती तो बराक ओबामा को किस आधार पर ये शान्ति दूत कहते ?

समय के साथ-साथ जिस तरह इस प्रतिष्ठित पुरुष्कार की चयन समिति के लोगो द्वारा संकीर्ण मानसिकता के चलते इसकी अहमियत का ह्रास किया गया है वह निंदनीय है ! जरुरत है आज रेवड़ियों की तरह इसके वितरण पर रोक लगाने की , ताकि यह अपनी साख जन मानस के बीच बचाए रख सके !

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14 Comments:

Blogger संजय भास्‍कर said...

आप बहुत अच्छा लिख रहे हैं
मेरी शुभकामनाएं.

sanjay



बहुत सुन्दर रचना । आभार

ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Saturday, 10 October, 2009  
Blogger राज भाटिय़ा said...

लालू या माया वती मर गये थे, इन्हे दे देते ओर यह बताते कि अपनी गरीबी केसे मिटा कर जनता के खुन पसीने की कमाई को केसे बर्बाद किया जाता है... सभी तरफ़ चोर बेठे है

Saturday, 10 October, 2009  
Blogger Mishra Pankaj said...

गोदियाल साहब सही कहा है आपने किस बात पर ये पुरस्कार दे दिए ? हां एक बात है इन्होने ओसामा के लिए किसी देश पर बम नहीं बरसाया :)

Saturday, 10 October, 2009  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

९ महीने नहीं ........ इस पुरूस्कार का निर्णय उनके राष्ट्रपति बन्ने के २ महीने के अन्दर हो गया था ......... ये एक घिनोना मज़ाक है ...........

Saturday, 10 October, 2009  
Blogger गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

अमेरिका के प्रेजिडेंट बराक ओबामा को शान्ति के लिए नोबल पुरस्कार।
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कमाल है! हर जगह हमारी जैसी ही है सरकार।

Saturday, 10 October, 2009  
Blogger Arvind Mishra said...

आप सही कहते हैं !

Saturday, 10 October, 2009  
Blogger अर्कजेश Arkjesh said...

१००% सहमत
ये तो अपने इधर वालों को भी फ़ेल कर दिये !

Saturday, 10 October, 2009  
Blogger विनोद कुमार पांडेय said...

सोचने वाली बात ही है ऐसा क्या कर दिए ओबामा जी जो उन्हे इतने कम समय में ऐसी बड़ी उपलब्धि मिल गई..

Saturday, 10 October, 2009  
Blogger अविनाश वाचस्पति said...

रेवडि़यां तो होती ही

अंधों के द्वारा बांटे जाने के लिए हैं

उन्‍हें भी नहीं बांटा जाएगा
तो

अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर अपनन को दे

मुहावरा कैसे सार्थक हो पाएगा।

Sunday, 11 October, 2009  
Blogger अजय कुमार said...

puraskar dene wali sanstha bhi upkrit hone ke liye puraskrit karti hai

Sunday, 11 October, 2009  
Blogger निर्मला कपिला said...

बिलकुल सही कहा आपने अँधा बाँटे सीरनी मुड मुड अपनों मे ये पंजाबी कहावत सही बैठती है और भाटिया जी की टिप्पणी भी बिलकुल सही है आभार्

Sunday, 11 October, 2009  
Blogger Unknown said...

इससे तो नोबल पुरस्कार की प्रतिष्ठा भी सन्देह के दायरे में आ गई।

Sunday, 11 October, 2009  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत बधाई हो जी।
ब्लॉगिंग में तो दो ही लोग इसके हकदार है।

Sunday, 11 October, 2009  
Blogger हरकीरत ' हीर' said...

नोबेल शान्ति पुरुष्कार २००९ अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा को .....???

सही कहा आपने ......."समय के साथ-साथ जिस तरह इस प्रतिष्ठित पुरुष्कार की चयन समिति के लोगो द्वारा संकीर्ण मानसिकता के चलते इसकी अहमियत का ह्रास किया गया है वह निंदनीय है ! जरुरत है आज रेवड़ियों की तरह इसके वितरण पर रोक लगाने की , ताकि यह अपनी साख जन मानस के बीच बचाए रख सके ! "

Sunday, 11 October, 2009  

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