Tuesday, November 12, 2019

पहेलियां जीवन की।



उत्कर्ष और अप्कर्ष,
कहीं विसाद,कहीं हर्ष,
अस्त होता आफताब,
उदय होता माहताब,
बहुत ही लाजवाब।

कैंसी मौनावलंबी 
ये इंसानी हयात ,
जिस्मानी मुकाम,
उद्गम जिसका आब,
और चरम इसका 
शबाब और शराब।

अंततोगत्वा जिन्दगी
बस, इक अधूरा ख्वाब।
अस्त होता आफताब,
उदय होता माहताब,
बहुत ही लाजवाब।।


Saturday, October 12, 2019

ढकोसले का दोग्लापन।

ये ढकोसला हैः
मगर ये नहीं:
                        इस उपरोक्त चित्र मे 2013 अगस्त मे जब                          आईएनऐक्स विक्रांत को समुद्र मे उतारा                            जा रहा था तो कौंग्रेस के रक्षामन्त्री श्री                                ऐन्टोनी की पत्नी विक्रांत की पूजा करती                            हुई।

गजब का दोग्लापन है, साहेब।

Thursday, October 10, 2019

मेरे देश के छद्म-धर्मनिर्पेक्ष जयचंदों द्वारा उपार्जित धर्म भेद ।

आपको याद होगा, जब करीना कपूर का निकाह शैफ अली खान के साथ हुआ था, तो हमारे देश के जिस मीडिया ने करीना कपूर के नाम के साथ 'खान' जोडने मे सेकिंड नहीं लगाये थे, आज यही महान मीडिया,(' बेशर्म' लिखूंगा तो शायद ये थोड़ा शरमा जांए) :

Tuesday, April 30, 2019

लातों के भूत।

दिनभर लडते रहे,
बेअक्ल, मैं और  मेरी तन्हाई,
बीच बचाव को,
नामुराद अक्ल भी तब आई
जब स़ांंझ ढले,
घरवाली की झाड खाई।

Wednesday, February 20, 2019

आत्ममंथन !

बस, आज 
कुछ नहीं कहने का
क्योंकि आज अवसर है
शूरवीरो की पावन सरजमीं के 
बंदीगृह के बंदियों से, 
कुछ सीख लेने का ।

Tuesday, February 19, 2019

गरीबी और रेखा !

तमाम जिन्दगी की मुश्किलों से तंग आकर,
आत्महत्या का ख्याल 
अपने बोझिल मन मे लिए,
मुम्बई की 'गरीबी' 
'जुहू बीच' के समन्दर पर 
पहुंची ही थी कि वहां उसे
श्रृगांरमय 'रेखा' नजर आ गई,
तज ख्याल, ठान ली जीने की फटेहाल। 
:
:
शायद इसी को "पोजेटिव सोच" कहते हैं??....😊

Sunday, February 17, 2019

बडा सवाल !

कार्य निर्विघ्न अमनसेतु का शुरू हो, इसी इंतजार मे भील हैं,
सिरे सेतु के कहांं से कहांं जोडें, असमंजस मे नल-नील हैं।

तमाम कोशिशें खारे समन्दर मे, मीठे जल की तलाश जैसी,
पथ कंटक भरा, तय होने अभी असंख्य श्रमसाध्य मील हैं।

नि:सन्देह रावण भी आज, लज्जित महसूस कर रहा होगा,
कुंठित कायरपन से अग्रज अपदूतों के, हो रहे जलील हैं।

खुबसूरत जमीं को दरकिनार कर,आरजू है जन्नत पाने की,
हुरों के चक्कर मे किए जा रहे, सभी कारनामेंं अश्लील हैं।

विकट प्रसंग, मनन का यह भी मुंंह बाये खडा है  'परचेत',
कटु,उग्र वृत्ति के आगे क्यों असहाय, शिष्टता और शील हैं।

पहेलियां जीवन की।

उत्कर्ष और अप्कर्ष, कहीं विसाद,कहीं हर्ष, अस्त होता आफताब, उदय होता माहताब, बहुत ही लाजवाब। कैंसी मौनावलंबी  ये इंसानी हयात , ...