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कार्टून कुछ बोलता है - श्रेष्ठ योग !

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छणिकाएँ

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एहसास : 'अच्छे दिन"  अभी दूर की कौड़ी है, इस जोड़े का दुस्साहस देखकर  इतना तो एहसास  मिल ही गया।   रमादान:  इबादत के इस दौर में, मांगता हूँ मैं भी ये दुआ खुदा से कि   ऐ खुदा, कुछ अंधभक्तों को भी अपने, थोड़ी सी अक़्ल देना। क्रेडिट कार्ड:  बनकर आया है जबसे अपनी श्रीमती जी का क्रेडिट कार्ड,  घर ई-कॉमर्स कंपनियों के   दफ़्ती,डिब्बों के ढ़ेर में तब्दील हो गया है।    अच्छे दिनों के इंतज़ार में : जरुरत से ज्यादा 'लीद' निकाली है  जबसे कम्बख्त  मैगी ने,  बुरे दिन लौट आये है स्वास्थ्य विघातक अर्वाचीन  बीवियाँ के।   योग जूनून: कुछ इसतरह फंस गई जिंदगी  अलोम -विलोम के चक्कर में कि अब तो बीवी के हाथों की सुबह की चाय भी नसीब नहीं होती।