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Showing posts from June, 2015
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एहसास : 'अच्छे दिन" अभी दूर की कौड़ी है, इस जोड़े का दुस्साहस देखकर इतना तो एहसास मिल ही गया। रमादान: इबादत के इस दौर में, मांगता हूँ मैं भी ये दुआ खुदा से कि ऐ खुदा, कुछ अंधभक्तों को भी अपने, थोड़ी सी अक़्ल देना। क्रेडिट कार्ड: बनकर आया है जबसे अपनी श्रीमती जी का क्रेडिट कार्ड, घर ई-कॉमर्स कंपनियों के दफ़्ती,डिब्बों के ढ़ेर में तब्दील हो गया है। अच्छे दिनों के इंतज़ार में : जरुरत से ज्यादा 'लीद' निकाली है जबसे कम्बख्त मैगी ने, बुरे दिन लौट आये है स्वास्थ्य विघातक अर्वाचीन बीवियाँ के। योग जूनून: कुछ इसतरह फंस गई जिंदगी अलोम -विलोम के चक्कर में कि अब तो बीवी के हाथों की सुबह की चाय भी नसीब नहीं होती।