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Showing posts from November, 2011

यदि होता किन्नर नरेश मैं !

नहीं मालूम कि महाकवि स्वर्गीय द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी जी, जिनकी आगामी १ दिसंबर को पुण्य-तिथि है, ने किन परिस्थितियों के मध्य नजर अपनी बाल-मन को ओत-प्रोत करने वाली यह जानदार कविता लिखी थी; यदि होता किन्नर नरेश, मै शाही वस्त्र पहनकर, हीरे पन्ने मोती माणिक, मणियों से सजधज कर.......! मेरे वन में सिंह घूमते, मोर नाचते आँगन में ............! .............राजमार्ग पर , धीरे-धीरे आती देख सवारी, रुक जाते पथ दर्शन करने, उमड़ती प्रजा सारी,.............!! क्या कल्पना की थी माहेश्वरी जी ने, बस मुह से एक ही शब्द निकलता है .. वाह ! लेकिन मैं ठहरा, खडी-बोली,लठमार भाषा और मोटी-बुद्धि से सोचने वाला इंसान, तो भला इधर-उधर की कैसे सोच पाऊँगा ? वैसे भी जब ठीक सामने सोचने और देखने के लिए इतना कुछ हो तो इधर-उधर जाने का तो प्रश्न ही नहीं उठता ! अभी कुछ दिन पहले जब किन्नरों के देश में कुछ किन्नर लाक्ष्या-गृह की भेंट चढ़ गए थे तो तभी से अनेकों तरह के प्रश्न इस कबाड़ी दिमाग में घूम रहे थे ! क्या आग लगना महज एक संयोग था ? कहीं आग लगने के पीछे कोई खुरापाती शकुनी और दुर्योधनी दिमाग तो नहीं काम क...

कार्टून कुछ बोलता है - दूध का जला...

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जय हिंद - भगत सिंह !

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 कौन कहता है कि हमारे देश में बहादुर नहीं रहे ? 

इन्होने निर्माण का सपना बुना और खूब लगाया चूना !

अभी दो दिन पहले सुबह दफ्तर जाते हुए जाम में डूबी सड़क पर झख मार रहा था कि तभी कुछ दूर तक तेलगाडी को हांकने के बाद देखा कि बड़ी तादात में यूपीए की कामयावियों ( कारगुजारियों कहना ज्यादा उचित होगा ) और श्रीमती सोनिया गांधी और श्री मनमोहन सिंह के मनमोहक चित्रों से सजे ट्रक सड़क की अन्दुरूनी लेन में खड़े थे ! उन पर एक आकर्षक शैली में नारा लिखा था 'भारत निर्माण का सपना बुना, प्रगति हुई कई गुना" ! मैंने एक नजर उधर डाली, मुस्कुराया और चल दिया ! ये बात और थी कि दिल की गहराइयों में कहीं कुछ अस्पष्ट भद्दे से तारीफ़ के शब्द भी अंकुरित हो रहे  थे कि ये भ्रष्ट शायद अपनी प्रगति की बात कर रहे है ! सड़क पर चलते हुए बस यही सोचने लग गया कि नेता और लालफीताशाह आम इंसानों को कितना बेवकूफ समझता है, जो हरवक्त उन्हें भ्रमित करने के हथकंडे खोजता रहता है! साथ ही मैं यह सोचकर खुद की पीट थपथपाने में भी तनिक देरी नहीं करता कि आज के इस युग में जबकि इस भ्रष्ट प्रजाति के प्राणि पर कुछ लिखना दिन-प्रतिदिन इतना कष्ठ्दायक होता जा रहा है, मैं तब भी अपनी स्याह त...

कार्टून कुछ बोलता है- बकरीद मुबारक हो !

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पैसे पेड़ पर नहीं उगते !

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खबर : "पेट्रोल की कीमतों में इजाफे से परेशान आम आदमी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राहत देने की बजाय और अधिक जख्म दे दिया है। फ्रांस में मीडिया से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पेट्रोल की कीमतों में कमी नहीं होगी। हमें समझना होगा कि पैसा पेड़ पर नहीं उगता। हम अपने संसाधनों से परे नहीं जा सकते। हमें कीमतों पर नियंत्रण हटाने की तरफ आगे बढऩा है। मुझे कहते हुए कोई झिझक नहीं है कि इस मामले (कीमतों के संदर्भ में) पर बाजार खुद फैसला करेगा।" प्रतिक्रियास्वरूप मैं बस इतना ही कहूंगा कि यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना वक्तव्य है, इन माननीय का ! काश कि ये अर्थशास्त्री महोदय अपने इस उपदेश का ख़याल उस वक्त भी रखते, जब इनके अधीनस्थों द्वारा चारों दिशाओं में दोनों हाथों से इस देश का खजाना लूटा जा रहा था !  आज तक इन्होने जो झूठे आश्वाशनो से देशवासियों को बरगलाया कि फलां-फलां वक्त के अन्दर महंगाई ख़त्म हो जायेगी, उसका क्या ? खैर, कुछ लोग होते है जो न तो हद-ए-मुश्किल से गुजर पाते है, और न ही कश्ती से उतर...