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Showing posts from July, 2012

कार्टून कुछ बोलता है - ग्रिड फेल हो गए !

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पिरोयें कहाँ तक अल्फाजों में !

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किसकदर बेहयाई भरी ऐ खुदा, तुमने इन दगाबाजों में, मेज़ तले ये मसलते हैं हाथ और झाड़-पोंछते दराजों में।    फल-फूलता आ रहा है यह तिजारत, बदस्तूर जमाने से, कहीं पोसते हैं इसे ये संत-समागमों में, कहीं नमाज़ों में।    दौलत-वैभव,ढोंग, धौंसिया,ये प्रयोजन  इनकी तृष्णा का,  इशारों-इशारों में  राग छेड़ते और  बोल ढालते हैं साजों में।   दरियादिली-परोपकार की, माशाल्लाह क्या मिशाल दें,   गोश्त  अलगाते  कबूतरों को और दाना बांटते है बाजों में।   जेहन में सिर्फ  वोट बसा है  और खोट बसा है नीयत में, मुलामियत ओढ़े चहरे पे और कुटिलता काम-काजों में।       तख़्त -ए-रियासत  तजुर्बाकार है शख्सियत के खेल में,   जालिमों की करतूतों को,पिरोंए कहाँ तक अल्फाजों में।  

अनिश्चितता के बादल !

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देश के मौसम विभाग की भविष्यवाणी से ख़ास भिन्न नहीं है मेरे प्रति तुम्हारा प्यार, क्योंकि उम्मीदें और पूर्वानुमान अनिश्चितता के बादलों का हो जाते हैं शिकार। जब जताएं बरसने की उम्मीद , तो पड़ती है सूखे की मार, और जब होती है शुष्क मौसम की भविष्यवाणी , तब कम्वख्त मुसलाधार।

कार्टून कुछ बोलता है - गरिमा का भी घोटाला !

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'ॐ' हिग्ग्स-बोसोन भी कहे - कण-कण में भगवान् !

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मेरे लिए तो ये हिग्ग्स-बोसोन  एक काला अक्षर भैंस बराबर के समान है ! जब जिसका कुछ ख़ास पता ही नहीं तो मेरा उस बारे में कुछ कहने का तुक ही नहीं बनता किन्तु जहां थोड़ी खुशी हुई कि इन ज्ञानियों ने कुछ ढूंढा वहीं मुझे  इस बात का  दुःख  अधिक है कि अरबों-खरबों खर्च करने के बाद यदि हमारे ये वैज्ञानिक अब यह कहें कि कोई शक्ति है जो बिग-बैंग थ्योरी से ज़रा पहले घटित हुई और जो ब्रह्माण्ड को नियंत्रित और संचालित करती है, तो मेरे लिए इससे बड़ी हास्यास्पद बात क्या हो सकती है? पश्चिम और तथाकथित अतिज्ञानी, नास्तिक समाज का दोगलापन भी इसमें साफ़ झलकता है! यह जानने के बाद भी  कि आस्तिकता के पीछे भी ठोस कारण है, और इसे हम बहुत अधिक समय तक झुठला नहीं सकते, उसे स्वीकार करने हेतु इनके द्वारा इतने ताम-झाम करने के बाद ऐसे  निष्कर्ष निकाले जाते है! एक दुःख यह भी है कि हिग्ग्स बोसोन का जिक्र करते हुए ये पीटर हिग्स को तो याद रखते है, मगर हमारे वैज्ञानिक सत्येन्द्र नाथ बोस को भूल जाते है ! जिन निष्कर्षों पर पहुचने का नाटक  ये आज कर रहे है, उन निष्कर्षों को तो हमारे पौराणिक ग...