निर्विग्न !
इसमें कोई दो राय नहीं कि देश में लोगो के बीच अनुशासन की भावना पैदा की जानी चाहिए, और खासकर हम हिन्दुस्तानियों को तो आज इसकी शख्त जरुरत है! मगर हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमने जो आजादी की लम्बी लड़ाई लड़ी उसकी एक मुख्य वजह थी, भेदभाव ! मगर क्या आजादी के बाद हमने इसे मिटाने की ईमानदारी से कोशिश की ? ऐसा नहीं कि आजादी से पहले अंग्रेज यहाँ की सड़कों पर पेशाब न करते हों, मगर जिन सड़कों पर पर वे कुत्तों और हिन्दुस्तानियों को ऐसा करने से वर्जित कर देते थे, वे खुद भी नहीं करते थे! लेकिन आजादी के उपरान्त क्या यह डिस्क्रिमिनेशन हमने ख़त्म किया? नहीं बल्कि चंद रसूकदार और स्वार्थी लोगो ने उसका भरपूर दुरुपयोग ही किया! अब यहाँ देखिये कि इन रसूकदारों को न सिर्फ बचाया जाता है बल्कि कैसे फायदा पहुंचाया जाता है! इसे भेदभाव न कहें तो और क्या है? एक वाकया उदाहरण के तौर पर पेश है; एक साथी की दिल्ली से चेन्नई होते हुए कोयम्बटूर की फ्लाईट थी, कुछ समय से एक नया नियम एयर पोर्टों पर यात्रियों के लिए लागू किया गया है कि फ्लाईट के प्रस्थान के समय से ४५ मिनट पहले यदि कोई यात्री काउंटर पर नहीं पहुंचता है तो काउंटर ...