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Showing posts from October, 2011

निर्विग्न !

इसमें कोई दो राय नहीं कि देश में लोगो के बीच अनुशासन की भावना पैदा की जानी चाहिए, और खासकर हम हिन्दुस्तानियों को तो आज इसकी शख्त जरुरत है! मगर हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमने जो आजादी की लम्बी लड़ाई लड़ी उसकी एक मुख्य वजह थी, भेदभाव ! मगर क्या आजादी के बाद हमने इसे मिटाने की ईमानदारी से कोशिश की ? ऐसा नहीं कि आजादी से पहले अंग्रेज यहाँ की सड़कों पर पेशाब न करते हों, मगर जिन सड़कों पर पर वे कुत्तों और हिन्दुस्तानियों को ऐसा करने से वर्जित कर देते थे, वे खुद भी नहीं करते थे! लेकिन आजादी के उपरान्त क्या यह डिस्क्रिमिनेशन हमने ख़त्म किया? नहीं बल्कि चंद रसूकदार और स्वार्थी लोगो ने उसका भरपूर दुरुपयोग ही किया! अब यहाँ देखिये कि इन रसूकदारों को न सिर्फ बचाया जाता है बल्कि कैसे फायदा पहुंचाया जाता है! इसे भेदभाव न कहें तो और क्या है? एक वाकया उदाहरण के तौर पर पेश है; एक साथी की दिल्ली से चेन्नई होते हुए कोयम्बटूर की फ्लाईट थी, कुछ समय से एक नया नियम एयर पोर्टों पर यात्रियों के लिए लागू किया गया है कि फ्लाईट के प्रस्थान के समय से ४५ मिनट पहले यदि कोई यात्री काउंटर पर नहीं पहुंचता है तो काउंटर ...

बस एक टिकाऊपन का ही भय है वरना तो..... !

यह एक आम धारणा रही है कि अपने आस-पास के माहौल और घटित होती घटनाओं से इंसान रूपी प्राणि न सिर्फ सबक लेता है अपितु अपनी जीवनचर्या में यथार्थ के धरातल पर उतारने की कोशिश भी करता है! लेकिन जहां तक मैं समझ पाया हूँ, मुझे नहीं लगता कि हम हिन्दुस्तानियों में ऐसा कोई गुण भी विद्यमान है! पिछले एक दशक से लगातार यह नोट करता आ रहा हूँ कि हर क्षेत्र, खासकर उत्पादों के मामले में हमारा देश निरंतर चीन-आश्रित होता जा रहा है! और हो भी क्यों न जब उसे इतने कम दामों में फिलहाल अपना काम चलता नजर आ रहा हो? अक्सर हमारे सूचना माध्यम इस बात की शिकायत करते आपने सुने होंगे कि चीन हमारी सरहदों का उल्लंघन कर रहा है, जोकि निश्चित तौर पर एक चिंता का विषय है! किन्तु उससे भी गंभीर चिंता का विषय यह है कि जहां एक ओर चीन आज न सिर्फ हमारे देश की सरहदें बल्कि हमारी व्यक्तिगत सरहदों को तोड़ने में सक्षम हो रहा है, वहीं हम जाने-अनजाने अपनी उत्पाद जरूरतों के मामले में निरंतर चीन निर्मित माल पर आश्रित होकर अपनी हदों का उल्लघन करने के दोषी खुद भी है! कल समूचे देश ने पूरे जस्नोजोश में दीपावली का त्यौहार मनाया ! घरों एवं बाजार...

दिग-भ्रमित शुभ-दीपावली !

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२० दिन पूर्व इस माह की ६ तारीख को टीवी पर ख़बरों में सुन रहा था कि रावण मर गया है ! वैसे तो मरते-मरते भी कम्वख्त दिल्ली के रामलीला मैदान में एक ११ साल की बच्ची को भी लील गया था, मगर एक तरफ जहां इस बात का दुःख था कि एक निरपराध मासूम को इस कम्वख्त प्राणि की वजह से अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, वहीं इस बात की संतुष्ठी भी थी कि चलो एक राक्षश का बोझ तो कम हुआ इस धरती पर से ! लेकिन ये क्या, बाद में पता चला कि वह तो महज एक नाटक था रावण के खात्मे का, असली रावण तो अभी भी जीवित है, अपने पूरे राक्षशी दल-बल के साथ ! यह मूर्ख और भोली-भाली प्रजा झूठमूठ में अपने को खुश करने के लिए सदियों से इसी तरह के नाटक रच अपने को मुगालते में रखती चली आ रही है, जबकि रावण महाशय और उनके नाते-रिश्तेदार , चमचे इत्यादि फुल ऐश कर रहे है! अभी कुछ दिनों पहले उसके भाई कुम्भकरण की ससुराल के दूर के रिश्ते का एक भाईबंद लम्बे रक्तपात के बाद लीबिया में एक सीवर लाइन के अन्दर से पकड़ा गया तो नाली के उस कीड़े राक्षश को सीवर पाइप से बाहर खीचने के बाद गुस्से में उसे पकड़ने वालों ने उसका वहीं पर मार-मार कर कचूमर निकाल ...

श्रदा-सुमन !

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हे बापू ! मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि आज अगर तू कहीं आसमान से इस धरा पर नजर रखने में सक्षम होगा, अपने इस देश और अपने इन तथाकथित भक्तों की हरकतों को देखता होगा तो तुझे भी कहीं दिल के किसी कोने में यह बात अवश्य चूभती होगी कि इतने बड़े परिवार का बाप बनकर नालायक और स्वार्थी औलादों द्वारा अपनी दोयम दर्जे की हरकतों से घर-परिवार को छिन्न-भिन्न होते देखना कितना कष्ठ्दायी होता है ! कभी तो तुझे यह सोचकर हंसी भी आती होगी कि तेरे इस वृहत परिवार की ये कुछ कुटिल औलादे किस तरह तेरे से जुडी हर चीज, चाहे वह तेरा नाम हो, तेरी तस्वीर हो, तेरा मार्ग हो अथवा सिद्धांत उनका क्या बखूबी, चातुर्यपूर्ण दुरुपयोग कर रहे हैं ! या यूँ कहू कि इन्होने तेरा अपहरण कर लिया है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ! अब यही देख लीजिये कि तुमसे लगाव की इनकी पराकाष्ठा कहाँ तक पहुँच गई है कि तुम्हारी फोटो भक्ति के लिए घर की आलमारियों, संदूकों, दीवानों एवं तिजोरियों में भी भर-भर कर तुम्हारी फो(नो)टो को संभालने के बाद भी जब इनका पेट नहीं भरता तो बापू को विदेश भ्रमण कराने के बहाने स्वीटजरलैंड और पता नहीं कहाँ-कहाँ ले जाते है ! ख...