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नूतन वर्ष मे....

उठे जो भी कदम, वो दमदार नजर आए, आपका हर फैसला समझदार नजर आए, गुजरी है दुनिया, विगत मे अंधेरी राहों से, नये साल मे हर राह, चमकदार नजर आए। 🍾🌷🥂🌻                    शुभ-प्रभात 🙏 इन्ही आंकाक्षाओं, उम्मीदो और अभिलाषाओं के साथ आपको, आपके सभी पारिवारिक जनों और ईष्ट-मित्रों को मेरी और मेरे परिवार की तरफ से नूतनवर्ष 2023 की मंगल कामनाएं।🙏

लघुकथा- क्षीण संप्रत्यय !

अकेली महिला और उसके साथ उसके दो नाबालिग बेटे, अरुण और वरुण। मेरे मुहल्ले मे मेरे घर से कुछ ही दूरी पर एक तीन मंजिला बडे से मकान के एक छोटे से खण्ड, जिसे आज की किरायाखोरों की तथाकथित सभ्य दुनिया मे "आरके RK" (रूम अटैज्ड किचन) के नाम से जाना जाता है, मे अभी कुछ दिन पहले ही किराए पर रहने आई  थी। कल रविवार था। शाम के पांच बजे के आसपास एक काली चमचमाती हुई एसयूवी, गली के नुक्कड़ पर ठीक उसी घर के नीचे जाकर रुकी थी जहां उसमें से उतरकर एक सलीकेदार वस्त्रधारण किये हुए, एक भद्र अधेड पुरुष उस मकान की मालकिन से अभी हाल मे उस जगह किराए के कमरे पर शिफ्ट हुई उस महिला का पता पूछते हूए उसके उस "आरके" के दरवाजे पर पंहुचा था और उसने दरवाजा खटखटाया था। बारह बर्षीय वरुण ने दरवाजा खोला तो बाहर खडे उस अधेड़ ने उससे पूछा, बेटा मम्मी हैं घर पर ? उस बालक ने सकारात्मकता मे अपनी मुंडी हिलाई और अंदर की तरफ मुडते हुए जबतक वह अपनी मम्मी से कुछ कह पाता, उसकी मां उन अधेड़ की आवाज को पहचान गई थी, अतः वह तुरंत बोली, बेटा डाक्टर साब को अंदर ले आओ।  भद्र अधेड़ के उस 'आरके' के अंदर घुसने के बाद मकानम...

मेरी अभिलाषा दिवाली पर लक्ष्मी जी के समक्ष प्रस्तुत..

  हे माते 🙏, इस दिवाली थोडा सा अपुन को भी "Gift" कर दे, आप तारणहार हो, अपने इस भक्त का 'Stock' भी, थोडा सा "Uplift" कर दे। क्योंकि ये "Beggar" वर्षो से शेयर के "Multibagger" बनने की आश मे, भावनाओं मे बह गया है, तमाम बोझ तले दबकर "Stagger" बनकर रह गया है।

गूढ

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नेपथ्य आपका कुठौर,अलहडपन हमारा ठौर था, आज जो येह जमाना है, कल समय कुछ और था, इतराओ बुलंदियों पे अपनी, मगर ये भी मत भूलो ! अभी वक्त है आपका तो कभी हमारा भी दौर था।

भौंचक!

 कभी सोचा नहीं था ऐसा कि जो, अति सक्रिय थे समाज मे कलतक, जरूरत आने पर, आज छुपे हुए होंगे, कबुतर का चेहरा ओढे घर खलिहानों मे, अहिंसा के दुश्मन, बाज छुपे हुए होंगे।

पता, क्या पता..?

इस मानसून की विदाई पर,  जो कुछ मौसमी प्रेम बीज तू , मेरे दिल के दरीचे मे बोएगी, यूं तो खास मालूम नहीं , मगर यदि वो अंकुरित न हुए तो  इतना पता है कि तू बिजली बुझाकर,  अ़ंधेरे मे  फूट-फूट के रोएगी। #बरसातीप्यार  😀😀

विडम्बना कहूँ ?

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कुछ प्यार के इजहार मे हैं   कुछ पाने के इंतजार मे हैं, फर्क बस इतना है,ऐ दोस्त! कि तुम इस दयार मे हो,  और हम उस दयार मे हैं। मुहब्बत मे डूबे हुए को, बीमार कहती है ये दुनिया,  कुछ स्वस्थ होकर जहां से गये,  कुछ अभी उपचार मैं हैं। इस जद्दोजहद मे शिरकत सिर्फ़, तुम्हारी ही नहीं है,  मंजिल पाने को सिद्दत से, हम भी कतार मे हैं। हमें नसीब हुआ ही कब था, वक्त गैरों से विरक्त होने का? एहसानों के सारे बोझ, बस, यूं कहें कि उलार मे हैं। बेरहमी से ठुकराई गई, जबकि  सच्ची थी  उलफ़त हमारी  , और नफरतों के सौदागर, अब उनके दुलार मे हैं। ऐसे अनगिनत महानुभावों से,  हम खुद भी रुबरु हुए जिन्होंने, पहले  सिर्फ़ अपना भला किया, और अब शामिल परोपकार मे हैं।

उम्मीद..

'उसूल' तो कुछ थे ही नहीं, जिनके दूर हो जाने का डर सताता, सिर्फ़, मेरे ख्वाबों का अनुसरण ही,  बता सकता है, मुझे रास्ता।

टसन

 वो गर्दिशों के साये जो सफर-ए-जिंदगी ने पाये, सिकवा करें भी तो अब बेफिजूल करें काहे, सिर्फ़ इतनी सी अपनी  नाकामयाबी थी हाये,  जवानी मे ही अपना  जनाजा न उठा पाये....

टीस....

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अक्सर  ,  गम़ सदा ही मुखर रहे,   खुशियों के राज मे, फिर सिमट गये ख्वाब सारे, उम्र की दराज़ मे।

बादल फटे पहाड पर...

  पहाड़ों की खुशनुमा,  घुमावदार सडक किनारे, ख्वाब,ख्वाहिश व लग्न का  मसाला मिलाकर, 'तमन्ना' राजमिस्त्री व 'मुस्कान'  मजदूरों के सहयोग से,  उसने वो जो घर बनाया था कभी, सुना है कि आज, उस घर पर इंद्रदेव  इतने मुग्ध हुए कि उन्होंने  बादलों से जाकर कहा कि फटो  और उस मकां को बहाकर  मेरे पास ले आओ।

मिथ्या

सनक किस बात की,  जुनून किस बात का? पछतावे की गुंजाइश न हो,  शुकून किस बात का?

जीवन चरणपादुका

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वहम

न हम 'हम' मे रहे न 'अहम' मे, जिंदगी कट गई इसी 'वहम' मे ।