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तुझसे क्या कहू?

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खौफ भी संग अपने 'नाक' जोड़ता है, और  दर्द की भी अपनी इक 'नाक' होती है,  साथ ही  इक 'नाक'  शर्म से भी जुडी  रहती है।  अर्थात, हर किसी की किंचित  'हद' तय है।   मगर  अरे  वो  बेख़ौफ़,बेदर्दी और वेशर्म ! अब  उससे क्या कहें  जिसकी 'नाक' ही नहीं।