Monday, August 19, 2024

प्रश्न -चिन्ह ?

 पता नहीं,कब-कहां गुम हो  गया

 जिंदगी का फ़लसफ़ा,

न तो हम बावफ़ा ही बन पाए 

और ना ही बेवफ़ा।

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चटोरों की....

मैंने ख्वाब देखा था, ख्वाहिश अधूरी रही, चाटने वाले चाट गए, प्लेट साफ पूरी रही।