Thursday, March 12, 2026

वज़ह!

गर तुम न खरीददार  होते,

यकीन मानिए, 

टके-दो-टके में भला कौन बिकता?

मुहब्बत बिकाऊ न है और न थी

कभी,

बस, निवेश गलत किया है तुमने,

इसीलिए घर में "धन" नहीं टिकता।



वाजिब बात

रूठ जाते हैं मुझसे मेरे अपने ही और 

मुझको मनाने मे जरा भी रुचि नहीं,

दिलचस्प हों भी अगर मुहब्बत की राहें,

क्या फायदा, जब दिल मे ही शुचि नहीं?

 

Wednesday, March 11, 2026

कश्मकश

सबब खामोशी, तेरा बहाना अच्छा है,

इश्क़ हुआ मगर इजहार न किया,

अंदाज़े मोहब्बत छुपाना अच्छा है,

शकून भले न मिले दिल जलाना अच्छा है।


Monday, March 9, 2026

हकीकत

उजागर न होने दिया हमने 

उजागर न करने के ऐब से,

वाकिफ बहुत खूब थे हम,

तुम्हारे छल और फरेब से।

सलाह

कह रहा हूं मैं तुमसे, 

ऐ बेस्वाद, बेसुरे भड़वे,

जुबां पे थोड़ी मीठास घोल,

मत बोल इतने भी बोल कडुए।


तू शिद्दत रख और  समर्पण कर,

मत पड़ फरेब में जिस्मानी शाम की,

रूहानी एहसास खुदा की इबादत ,

 लिखदे तू जाकर अपने नाम की।


Sunday, March 8, 2026

मन की हकीकत

न हमारा ईमान बचा, न ही पहचान बची,

बतलाएं भी तो बतलाएं, तुम्हें क्या सची,

उम्मीदों और यादों के सहारे, ऐ 'परचेत',

थोड़ी सी ख्वाहिशों की बस, जां बची।


Friday, March 6, 2026

तब्दीली

तेरी याद आना 

गुज़रे जमाने की बात हो गई,

पानी का गिलास 

सामने टेबिल पर पड़ा देखकर,

अब तो हिचकियों भी नहीं आती।

सफर अभी बाकी है।

अभी नहीं, सफ़र जब खत्म होने की दहलीज पर होगा, 

तभी सोचेंगे ऐ जिंदगी ! कि ज़ख्म कहां-कहां से मिले।


परिभाषा

कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं

कि जो फटते नहीं,

फासले अगर बढ़ने लगें

तो फिर घटते नहीं।

Wednesday, March 4, 2026

हो ली,,,









पर्व रंगों का है वेरंगीन बन,

बैठा हूं बातें करता खुद से,

कभी न जाने क्यों ऐसा लगे,

हाथ धो बैठा हूं सुध-बुध से।

 

मदहोश-बेखबर, था तो नहीं,

दर्द का एहसास है बे-खुद से,

घाव जिस्म पे मेरे आहिस्ता कर,

अनुनय यही है बस, हुद-हुद से।



Friday, February 27, 2026

दरकार नहीं

मैं  अभी सो रहा हूं, मर्जी के हिसाब से, 

मर्जी के हिसाब से मुझे जागना है,

तुम मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी,

भाग लो, जितनी तेजी से तुम्हें भागना है।

Wednesday, February 25, 2026

लुभावना

सफर मे धूप तो बहुत होगी,

सूरज को ढक सको तो चलो, 

एम्बूलैंस लेकर जा रही है रोगी, 

राह उसकी रोक सको तो चलो।

Friday, February 20, 2026

इल्तज़ा

 मोहब्बत मे, आंखों मे भर आए आंसुओं को

गिरने न देना 'परचेत',

क्योंकि प्यार के आंसू ही रूह की खुराक होते हैं।

Wednesday, February 18, 2026

वाजिब सवाल !

सवाल ये नहीं है कि जवानी में हम क्यों जीने मरने की कसमें खाते हैं,

सवाल ये है कि साठ के बाद ही क्यों 'परचेत',दर्द भरे गीत पसंद आते हैं।

Tuesday, February 10, 2026

वाहियात

आज उन्होंने जैसे मुझे, 

पानी पी-पीकर के कोसा,

इंसानियत से 'परचेत', 

अब उठ गया है भरोसा।


Monday, February 9, 2026

दुविधा

इश्क़ कोई पोंछा नहीं है,

सिखा गई आज काम वाली बाई,

किधर जाऊं समझ नहीं आता,

आगे कुआं है और पीछे खाई।


पैगाम

इस जिंदगी का फलसफा बस, इतना सा रहा 'परचेत', 

मुकाम पर हम खुद को लानत-मलामत हजार देते हैं,

संदेश उसतक पहूंचा देना, ऐ तख्त पर लटकाने वालों, 

चलो, कुछ यूं करते हैं अब जिंदगी, तुझको गुज़ार देते हैं।


Sunday, February 8, 2026

हकीकत

बेवफा क्या हुआ,

कतार में खड़े हैं कुशलक्षेम पूछने वाले,

जब बावफ़ा था 'परचेत' 

तो गली का कुत्ता भी  नहीं पूछता था।



Saturday, February 7, 2026

संस्कृत सीखिए

 अपने मुहल्ले में जरा सा सोबर दीखिए

ओर संस्कृत बोलना सीखिए,

खुद ही पूरी संस्कृत मत खाइए,

थोड़ा बीवी को भी सिखाइए।


जब झगड़े का मूड़ हो तो संस्कृत में ही लड़ना,

जमकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ना,

झगड़ा कोई सुन रहा होगा, मन में न खल रहा होगा,

पड़ोसियों को लगे कि घर में हवन-पूजन चल रहा होगा।

Friday, February 6, 2026

ऐ जिंदगी!

अब और कहां तक  होगी इससे भी बदसूरत ज़्यादा,

जिंदगी, तू जिंदा कम नजर आती है, मूरत ज्यादा।



वज़ह!

गर तुम न खरीददार  होते, यकीन मानिए,  टके-दो-टके में भला कौन बिकता? मुहब्बत बिकाऊ न है और न थी कभी, बस, निवेश गलत किया है तुमने, इसीलिए घर मे...