Friday, March 6, 2026

तब्दीली

तेरी याद आना 

गुज़रे जमाने की बात हो गई,

पानी का गिलास 

सामने टेबिल पर पड़ा देखकर,

अब तो हिचकियों भी नहीं आती।

सफर अभी बाकी है।

अभी नहीं, सफ़र जब खत्म होने की दहलीज पर होगा, 

तभी सोचेंगे ऐ जिंदगी ! कि ज़ख्म कहां-कहां से मिले।


परिभाषा

कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं

कि जो फटते नहीं,

फासले अगर बढ़ने लगें

तो फिर घटते नहीं।

Wednesday, March 4, 2026

हो ली,,,









पर्व रंगों का है वेरंगीन बन,

बैठा हूं बातें करता खुद से,

कभी न जाने क्यों ऐसा लगे,

हाथ धो बैठा हूं सुध-बुध से।

 

मदहोश-बेखबर, था तो नहीं,

दर्द का एहसास है बे-खुद से,

घाव जिस्म पे मेरे आहिस्ता कर,

अनुनय यही है बस, हुद-हुद से।



Friday, February 27, 2026

दरकार नहीं

मैं  अभी सो रहा हूं, मर्जी के हिसाब से, 

मर्जी के हिसाब से मुझे जागना है,

तुम मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी,

भाग लो, जितनी तेजी से तुम्हें भागना है।

Wednesday, February 25, 2026

लुभावना

सफर मे धूप तो बहुत होगी,

सूरज को ढक सको तो चलो, 

एम्बूलैंस लेकर जा रही है रोगी, 

राह उसकी रोक सको तो चलो।

Friday, February 20, 2026

इल्तज़ा

 मोहब्बत मे, आंखों मे भर आए आंसुओं को

गिरने न देना 'परचेत',

क्योंकि प्यार के आंसू ही रूह की खुराक होते हैं।

Wednesday, February 18, 2026

वाजिब सवाल !

सवाल ये नहीं है कि जवानी में हम क्यों जीने मरने की कसमें खाते हैं,

सवाल ये है कि साठ के बाद ही क्यों 'परचेत',दर्द भरे गीत पसंद आते हैं।

Tuesday, February 10, 2026

वाहियात

आज उन्होंने जैसे मुझे, 

पानी पी-पीकर के कोसा,

इंसानियत से 'परचेत', 

अब उठ गया है भरोसा।


Monday, February 9, 2026

दुविधा

इश्क़ कोई पोंछा नहीं है,

सिखा गई आज काम वाली बाई,

किधर जाऊं समझ नहीं आता,

आगे कुआं है और पीछे खाई।


पैगाम

इस जिंदगी का फलसफा बस, इतना सा रहा 'परचेत', 

मुकाम पर हम खुद को लानत-मलामत हजार देते हैं,

संदेश उसतक पहूंचा देना, ऐ तख्त पर लटकाने वालों, 

चलो, कुछ यूं करते हैं अब जिंदगी, तुझको गुज़ार देते हैं।


Sunday, February 8, 2026

हकीकत

बेवफा क्या हुआ,

कतार में खड़े हैं कुशलक्षेम पूछने वाले,

जब बावफ़ा था 'परचेत' 

तो गली का कुत्ता भी  नहीं पूछता था।



Saturday, February 7, 2026

संस्कृत सीखिए

 अपने मुहल्ले में जरा सा सोबर दीखिए

ओर संस्कृत बोलना सीखिए,

खुद ही पूरी संस्कृत मत खाइए,

थोड़ा बीवी को भी सिखाइए।


जब झगड़े का मूड़ हो तो संस्कृत में ही लड़ना,

जमकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ना,

झगड़ा कोई सुन रहा होगा, मन में न खल रहा होगा,

पड़ोसियों को लगे कि घर में हवन-पूजन चल रहा होगा।

Friday, February 6, 2026

ऐ जिंदगी!

अब और कहां तक  होगी इससे भी बदसूरत ज़्यादा,

जिंदगी, तू जिंदा कम नजर आती है, मूरत ज्यादा।



Thursday, February 5, 2026

पश्चाताप

अपने जो भी कहने को थे, सब अजनबी हुए,

और खामोशियां बन गई हमारी जीवन साथी,

क्या नहीं त्यागा था उनके लिए हमने 'परचेत',

हम-सफ़र तो थे किंतु, उनसे हम-नवाई ना थी।



ओ रे पिया, मैं तुम्हारी

अपना तन-मन लुटा के हारी,

ओ रे पिया, मैं तुम्हारी,

आगोश तुम्हारे, मेरा सुलभ लगे मन,

चाहे तन हो कितना ही भारी,

ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।


संबंधों के तौर-तरीके मैं ना जानू,

और बनावटीपन मैं ना मानू,

या फिर कह लो दुनियादारी,

अब रह नहीं सकती मैं कुंवारी,

 ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।


कोमल हूं पर कमजोर नहीं हूं,

सहमी-सहमी भोर नहीं  हूं,

हर पल साथ खड़े हो जब तुम,

कहके दिखाए कोई मुझे अबला नारी,

 ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।




कोप

शरीक हुए थे जो कल के  कवि सम्मेलन में,

वो सब के सब, एक ही थाली के चट्टे-बट्टे थे,

एक से बढ़के एक पैदाइशी चमचे, तलवेचाट,

बस,यही कहूंगा कि सबके सब उल्लू के पठ्ठे थे।🤣


Wednesday, February 4, 2026

तहकिकात अभी जारी रहेगी

 


तहक़ीक़ात अभी जारी है

रिश्तों की खाइयों को पाटिये कि अब और न बढ़ें,

दिलों के सहरा में नजर आ रही दरार बहुत भारी है,

अगम्य राह, सत्य का पथ इतना दुर्गम कैसे हो गया,

बाधित क्यों है आवाजाही, तहक़ीक़ात अभी जारी है।‌


सदचित विभ्रम है और कानून  का कोई खौफ नहीं, 

राष्ट्र भयभीत किया जा रहा, बिखरने की तैयारी है, 

समृद्धि के पथ पर पता नहीं यह कौन सी दुश्वारी है, 

संयम पांवों तले क्यों आया, तहक़ीक़ात अभी जारी है।


Tuesday, February 3, 2026

दिल की बात

हमने भरोसा अभी भी कायम रखा है जीने मे,

मगर, ऐ 'परचेत',यह दर्द असहनीय है सीने में।

बड़े ही बुजदिल निकले ये सब, दिल दुखाने वाले,

हमने तो प्यासे को भी पानी पिलाया था, मदीने में।।


तब्दीली

तेरी याद आना  गुज़रे जमाने की बात हो गई, पानी का गिलास  सामने टेबिल पर पड़ा देखकर, अब तो हिचकियों भी नहीं आती।