अबे, पहले तो ये बता तू है कौन?
तुम जैसों के मुंह लगना मेरा चस्का नहीं,
मेरी तो बीवी से भी बिगड़ी पड़ी है,
चल हट, मुझे सम्हालना तेरे बस का नहीं।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
अबे, पहले तो ये बता तू है कौन?
तुम जैसों के मुंह लगना मेरा चस्का नहीं,
मेरी तो बीवी से भी बिगड़ी पड़ी है,
चल हट, मुझे सम्हालना तेरे बस का नहीं।
वो बिन वजह हंसना तेरा,
वो बिन वजह रोना तेरा,
जिंदगी और कुछ भी नहीं,
तेरी -मेरी कहानी है।
इक प्यार का नगमा....
#आशाभोंसलेविनम्रशर्द्दाजली!
मायके ठहरने का वक्त बिटिया जानती है, ज्यादा न रुक पाएगी,
हेमंत ऋतु भी आई, कल शिशिर भी वसंत संग चली जाएगी।
बेरुखी, खामोशी, यादों का बोझ,
फेहरिस्त लम्बी है इस तन्हाई की,
अब क्या? उम्र कट गई 'परचेत' ,
राह तकते-तकते इक हरजाई की।
भले ही वो हैंगओवर मेरे लिए कुछ ही पल का था,
नशा मेरे प्यार का मगर, तीखा नहीं हल्का था,
क्या बताऊं किस कदर उस नशे मे मैं खो गया,
नशा जो पलभर के वास्ते तेरी आंखों से छलका था।
परिंदों ने घर बसाया, बच्चों संग फुर हुए,
निशानियां बसावट की मैं देख पाया था,
अपने छोटे से आशियां में उनके लिए,
जो मैंने भी इक छोटा सा नीड़ बनाया था।
रातें अक्सर ही मुझसे सवाल किया करती हैं,
और एक मैं हूं कि उनका जबाब ही नहीं देता,
कभी नयन थकते थे, अब कदम थकनें लगे हैं,
और कितना चल पाऊंगा, मैं हिसाब ही नहीं देता।
जज़्बात ऐसे लगने लगे हैं मानो ये जज़्बाती नहीं,
जमाने की हसरतें और आदतें हैं जो जाती नहीं,
अधजगी नीदं मे जुबां लगे है कुछ पढने को आतुर,
और मैं हूं कि उसे पढ़ने को किताब ही नहीं देता।
अनियमित नींदचर्या, स्लीपिंग डिसआर्डर कह लो,
दर्द की कोई सीमा नहीं जितना सह सको, सह लो,
डगमगाते कदम कहते हैं कि बहक जाने दो हमें भी,
मगर 'परचेत' मौका-ए-बहकना ख्वाब ही नहीं देता।
तू खुद ही से इकबार रूबरू तो हो जा,
फिर जो कहना है, उसे आलेख लेना,
अरे वो, कश्ती के मुसाफिर, उतरने से पहले,
एकबार समन्दर तो जाकर देख लेना।
मेरी डांडी-कांठियों का मुलुक ज्यैल्यू,
Go there in the spring.
हैरा बण मा बुरांश का फूल
जब बण मा आग लगाणा होला,
भीटा पाखों थैं फ्योलिं का फूल,
पिन्ग्ला रंग मा रंग्याणा होला ..
लाइयां पैयां ग्वीराल फूलु ना,
The earth will be decorated,
Go there and sing.
रातों के हर पहर-दोपहर,
जब भी मैं करवट बदलूं,
बदली हुई हर करवट पर,
कसम से आहें भरता हूं ,
उम्र पार कर चुका प्रेम की वरना,
कह देता कि मैं तुमपर मरता हूं ,
मत पूछो, ये नशा कौन सा करता हूं,
सच में, मैं तुम्हें बतानें से डरता हूं।
गर तुम न खरीददार होते,
यकीन मानिए,
टके-दो-टके में भला कौन बिकता?
मुहब्बत बिकाऊ न है और न थी
कभी,
बस, निवेश गलत किया है तुमने,
इसीलिए घर में "धन" नहीं टिकता।
रूठ जाते हैं मुझसे मेरे अपने ही और
मुझको मनाने मे जरा भी रुचि नहीं,
दिलचस्प हों भी अगर मुहब्बत की राहें,
क्या फायदा, जब दिल मे ही शुचि नहीं?
सबब खामोशी, तेरा बहाना अच्छा है,
इश्क़ हुआ मगर इजहार न किया,
अंदाज़े मोहब्बत छुपाना अच्छा है,
शकुन बुरा ही सही, दिल जलाना अच्छा है।
कह रहा हूं मैं तुमसे,
ऐ बेस्वाद, बेसुरे भड़वे,
जुबां पे थोड़ी मीठास घोल,
मत बोल इतने भी बोल कडुए।
तू शिद्दत रख और समर्पण कर,
मत पड़ फरेब में जिस्मानी शाम की,
रूहानी एहसास खुदा की इबादत ,
लिखदे तू जाकर अपने नाम की।
न हमारा ईमान बचा, न ही पहचान बची,
बतलाएं भी तो बतलाएं, तुम्हें क्या सची,
उम्मीदों और यादों के सहारे, ऐ 'परचेत',
थोड़ी सी ख्वाहिशों की बस, जां बची।
तेरी याद आना
गुज़रे जमाने की बात हो गई,
पानी का गिलास
सामने टेबिल पर पड़ा देखकर,
अब तो हिचकियों भी नहीं आती।
अभी नहीं, सफ़र जब खत्म होने की दहलीज पर होगा,
तभी सोचेंगे ऐ जिंदगी ! कि ज़ख्म कहां-कहां से मिले।
अबे, पहले तो ये बता तू है कौन? तुम जैसों के मुंह लगना मेरा चस्का नहीं, मेरी तो बीवी से भी बिगड़ी पड़ी है, चल हट, मुझे सम्हालना तेरे बस का न...