Thursday, July 23, 2026

विडम्बना देखिए

 दोनों की ही सरकारी नौकरी थी, 

अच्छी तनख्वाह के अलावा,

ऊपरी मे भी खूब लूटा-खसौटा,

सोना-चांदी जो हाथ आया समेटा,

कुछ नहीं तो भागते चोर का लंगोटा।


अपने दोनों ही बच्चों को  उन्होंने 

अच्छे स्कूलों से तालीम दिलवाई

किसी कोर्स के लिए प्रतिस्पर्धा से

जब वो चयनीत न हो पाए तो

अवैध चंदे की थाली सजवाई।


बच्चे दोनों मूल छोड़कर अपना

अब, विदेश जाकर बस गए हैं,

और मां-बाप सूरत को तरस गये हैं,

लौटकर  मिलने आएंगे वो कभी,

पति-पत्नी इसी भ्रम मे है,

बाप पिछले साल गुजर गया,

मां अभी वृद्धाश्रम मे है।

संयोग

 ठुकरा गई थी वो जो हमको 

दौर-ए-जवानी कुछ तन्हाइयां,

उम्र के इस पड़ाव पर फिर से,

बेताब हैं हमें गले लगाने को 'परचेत'। 

विडंबना

 न नींद ही बची, 

न खुद को  मच्छरों से ही बचा पाए,

रात भर खुजलाते-खुजलाते

करते रहे हाये-हाए,

पैर पसारने को हमने

चारपाई और चादर बडी की थी, 

मगर 'परचेत', 

फिर भी खुलकर नही सो पाए।


Wednesday, July 22, 2026

बेवक्त


कुछ बेहुदे सवाल, 

इस वक्त पे ना ही पूछिए 

हमसे जनाब,

अभी-अभी लौट के आए हैं, 

दफ़न करके, 

दिल के अधूरे ख़्वाब।


मेरा नसीब

पूछा भी तो किससे तुमने 

मिरे बारे मे 'परचेत',

वो नकचढ़ा नसीब है,

अक्सर मुझसे ख़फ़ा ही रहता है।


जज्बा

मिरी आदत मे शुमार है 

मेरी साफगोई का असर, 

जो मुंह में आता है वो 

मैं बेधड़क बोल देता हूं,

कोई मेरी ढलती उम्र पर न जाए 

तो बेहतर होगा 'परचेत',

बत्तीसी आधी रह गई फिर भी 

बीयर की बोतल का ढक्कन, 

मैं अभी भी दांतों से खोल देता हूं।


#औरमधुशालाकीशाकीमेरामुहतकतीरहजातीहै 🤣

Monday, July 20, 2026

नहीं समझोगे ,,,

हमारे लिए तो तुम  हमेशा अहम थे 

मगर पाले तुमने ही  कुछ वहम थे, 

तेरे वास्ते मुसीबतों मे भी मुश्किलों को 

जिसने गले लगाया, वो हम थे,                         

लिबास बदलने से बदल नहीं जाता 

फ़क़त कोई किरदार 'परचेत',

तुम जानते हो, तमाशा खडा करने मे 

वरना हम क्या किसी से कम थे?