Sunday, September 25, 2022

मुझे नही पता..।

इस मानसून की विदाई पर, 

वो जो कुछ मौसमी प्रेम बीज ,

तू मेरे दिल के दरीचे मे बोएगी,

यूं तो खास मालूम नहीं , मगर

यदि वो अंकुरित न हुए तो 

इतना पता है बिजली बुझाकर, 

अ़ंधेरे मे  फूट-फूट के रोएगी।

#बरसातीप्यार  😀😀



Friday, September 23, 2022

विडम्बना...



कुछ प्यार के इजहार मे हैं 

कुछ पाने के इंतजार मे हैं,

फर्क बस इतना है,ऐ दोस्त!

कि तुम इस दयार मे हो, 

और हम उस दयार मे हैं।


मुहब्बत मे डूबे हुए को,

बीमार कहती है ये दुनिया, 

कुछ स्वस्थ होकर जहां से गये, 

कुछ अभी उपचार मैं हैं।


इस जद्दोजहद मे शिरकत

सिर्फ़, तुम्हारी ही नहीं है, 

मंजिल पाने को सिद्दत से,

हम भी कतार मे हैं।


हमें नसीब हुआ ही कब था,

वक्त गैरों से विरक्त होने का?

एहसानों के सारे बोझ,

बस, यूं कहें कि उलार मे हैं।


बेरहमी से ठुकराई गई,जबकि 

सच्ची थी उलफ़त हमारी ,

और नफरतों के सौदागर,

अब उनके दुलार मे हैं।


ऐसे अनगिनत महानुभावों से, 

हम खुद भी रुबरु हुए जिन्होंने,

पहले  सिर्फ़ अपना भला किया,

और अब शामिल परोपकार मे हैं।



Saturday, September 3, 2022

उम्मीद..

'उसूल' तो कुछ थे ही नहीं,

जिनके दूर हो जाने का डर सताता,

सिर्फ़, मेरे ख्वाबों का अनुसरण ही, 

बता सकता है, मुझे रास्ता।

Wednesday, August 31, 2022

टसन

 वो गर्दिशों के साये जो

सफर-ए-जिंदगी ने पाये,

सिकवा करें भी तो अब

बेफिजूल करें काहे,

सिर्फ़ इतनी सी अपनी 

नाकामयाबी थी हाये, 

जवानी मे ही अपना 

जनाजा न उठा पाये....

Thursday, August 25, 2022

टीस....







अक्सर , गम़ सदा ही मुखर रहे, 

खुशियों के राज मे,

फिर सिमट गये ख्वाब सारे,

उम्र की दराज़ मे।

Saturday, August 20, 2022

बादल फटे पहाड पर...

 

पहाड़ों की खुशनुमा, 

घुमावदार सडक किनारे,

ख्वाब,ख्वाहिश व लग्न का 

मसाला मिलाकर,

'तमन्ना' राजमिस्त्री व 'मुस्कान' 

मजदूरों के सहयोग से, 

उसने वो जो घर बनाया था कभी,

सुना है कि आज, उस घर पर इंद्रदेव 

इतने मुग्ध हुए कि उन्होंने 

बादलों से जाकर कहा कि फटो 

और उस मकां को बहाकर

 मेरे पास ले आओ।

Thursday, March 31, 2022

मिथ्या

सनक किस बात की, 

जुनून किस बात का?

पछतावे की गुंजाइश न हो, 

शुकून किस बात का?







Monday, March 28, 2022

वहम

न हम 'हम' मे रहे

न 'अहम' मे,

जिंदगी कट गई

इसी 'वहम' मे ।

Thursday, November 25, 2021

मेरा देश महान....


जहां, छप्पन इंच के सीने वाला भी

यू-टर्न  ले लेता है,

वहां, 'मार्क माय वर्ड्स' कहने वाला पप्पू, 

भविष्यवेता है।

मुझे नही पता..।

इस मानसून की विदाई पर,  वो जो कुछ मौसमी प्रेम बीज , तू मेरे दिल के दरीचे मे बोएगी, यूं तो खास मालूम नहीं , मगर यदि वो अंकुरित न हुए तो  इतना...