विडम्बना देखिए
दोनों की ही सरकारी नौकरी थी,
अच्छी तनख्वाह के अलावा,
ऊपरी मे भी खूब लूटा-खसौटा,
सोना-चांदी जो हाथ आया समेटा,
कुछ नहीं तो भागते चोर का लंगोटा।
अपने दोनों ही बच्चों को उन्होंने
अच्छे स्कूलों से तालीम दिलवाई
किसी कोर्स के लिए प्रतिस्पर्धा से
जब वो चयनीत न हो पाए तो
अवैध चंदे की थाली सजवाई।
बच्चे दोनों मूल छोड़कर अपना
अब, विदेश जाकर बस गए हैं,
और मां-बाप सूरत को तरस गये हैं,
लौटकर मिलने आएंगे वो कभी,
पति-पत्नी इसी भ्रम मे है,
बाप पिछले साल गुजर गया,
मां अभी वृद्धाश्रम मे है।