'परचेत'
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
Saturday, July 4, 2026
Thursday, July 2, 2026
चराग तले...
नाम सूरत और शहर की ऐसी सूरत,
आ जाते हैं, मुंह उठाके ज़रूरत बे-ज़रूरत,
मशहूर हो जाने की ख़्वाहिश है मगर,
चराग ढूंढे है फिर भी 'परचेत', अंधेरे की मूरत।
Wednesday, July 1, 2026
मार
कजरारी जुल्फ़ों और गलमुच्छों का रंग
कब धवल हुआ 'परचेत', कुछ पता ही न चला,
बस, साज़ और सामान जुटाने मे ही मसरूफ़ रह गया,
वक्त कब हाथ से निकल गया, कुछ पता ही न चला।
Tuesday, June 30, 2026
रे मन !
मानसून का जोर,
मूसलाधार बारिश,
आंधी और तूफान बहुत हैं,
पकडी है जो राह तूने
जिस डगर चला रहा है तू
अपनी कश्ती, याद रखना,
उस डगर मे उफ़ान बहुत हैं।
Thursday, June 25, 2026
परामर्श !
हो वर्चस्व की यदि अंंतहीन जंग,
उसे मरते दम तक कभी न हारो,
भद्र-प्रतिद्वंद्वी, बर्ताव हो निश्छल,
हो शत्रु कपटी, उसे होश से मारो।
मरुधर जो उगले, नफरत का लावा,
तीव्र-प्रबल धार जल कोष से मारो।
निष्क्रिय होकर बोले, शटुतित धावा,
लक्ष्यसिद्ध शस्त्र साध, जोश से मारो।।
विघ्न उपजाना ही तरल धर्म है रिपु का,
उसका हल निकाल, उसे ठोस से मारो।
जो फर्क न समझे, मनुष्यत्व का,
ऐसे अक्ल के मारे को 'परचेत', रोष से मारो।।
Tuesday, June 23, 2026
एक पुष्प की अभिलाषा।
मुझे चाहिए इक ऐसा दूल्हा,
घर मे फूक सके जो चूल्हा,
करे जो मन, कभी झूलन को झूला,
दर्द करे ना कोई उसका
पिंडली, एंडी और कूल्हा,
मुझे चाहिए इक ऐसा दूल्हा,
घर मे फूक सके जो चूल्हा।
Saturday, June 20, 2026
कश्मकश
खुबसूरत सपने हमने भी सजाए थे,
क्योंकि हम भी कभी फितरत वाले थे,
पूरे न हुए वो अलग बात है, 'परचेत',
मगर ख्वाब तो हमनें भी बहुत पाले थे।
Wednesday, June 17, 2026
आरज़ू
मंजूर तेरी हर ख्वाहिश, भले ही तू मेरे पास मत रहना,
बस, इतनी सी आरज़ू है , अकेले तू उदास मत रहना।
Friday, June 12, 2026
शुन्य
उसका स्वरूप
हरदम सराहता हूं,
जिस रोशनी को
दिल से चाहता हूं,
आश लगाए रहता हूं
कि रोशनी कभी तो
मेरे घर आएगी,
अतिशय प्रेममय होकर
आलिंगनबद्ध हो जाएगी।
सुबह-सवेरे उठकर
खोल देता हूं घरके
सारे किवाड़, परदे,
उम्मीद का बस, इतना सहारा,
मेहनत कभी तो रंग लाएगी।।
Thursday, June 11, 2026
बदलता मौसम
जज़्बात अब हदों से आगे बढ़ने लगे हैं,
अल्फ़ाज़, खामोशियों से झगड़ने लगे हैं,
हर चीज तय दायरे पार करने लगी है,
अंदाज मे खुमारी 'परचेत',
मदहोशियों के रंग चढ़ने लगे हैं।
Wednesday, June 10, 2026
समाप्त होता अध्याय ....
बिन पिए और बिना कुछ कहे,
आज वो चुपचाप सो गया है,
लगता है जिंदगी का खज़ाना
'परचेत', अब खत्म हो गया है।
Tuesday, June 9, 2026
ख़्याल !
दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न सिकवा आता,
गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता,
सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक तशद्दुद 'परचेत',
तशद्दुद=ज़ुल्म
Saturday, May 30, 2026
Tuesday, May 26, 2026
तो था...
तुझे न पा सकने का मुझे मलाल तो था,
क्यों न पा सका, दिल मे ये सवाल तो था,
न पा सकने की चाहे वजह कोई भी रही हो,
वो पल था,दिन था,महिना था और साल तो था।
एहसास
अब छोड देंगे वो भी पीछा करना,
हमारी परछाइयों का,
उनको भी रास आने लग गया है,
आलम ये तन्हाइयों का।
इक शुष्क दरिया समझते थे हमें
'परचेत', जो समंदर की चाह वाले,
उनको भी अब अंदाजा हो गया हैं,
हमारे दिल की गहराइयों का।
Monday, May 25, 2026
टीस
तूफान, नदियां समंदर पे
तू न इस तरह हमसे सवाल कर,
डूबती हुई कई कश्तियां
हम भी लाए हैं भंवर से निकाल कर।
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छुपा लो जितना छुपाना है खुद को,
परदो के पीछे, फिर नहीं आएंगे हम,
बस, और कुछ दिनों की ही बात है,
किसी दिन लेटे-लेटे तेरी गली से गुजर जाएंगे हम।
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हम गाय,भैंस,घोड़े नहीं थे,
फिर भी बंधे हमेशा तबेले रहे,
तन्हाइयां साथ अपने बहुत थी,
सफर में किन्तु अकेले रहे।
Sunday, May 24, 2026
सवाल
गिले-शिकवे तुम हजार करोगे और
खुदा होने का दावा भी बार-बार करोगे,
'परचेत' पूछता है अरे वो जाहिलों,
खुद के दिल से खुद का कब दीदार करोगे।
Saturday, May 23, 2026
तसल्ली
खुदगर्जी के वास्ते न कभी
किसी को बदनाम किया तूने,
किसी की भी उपलब्धियों को
न कभी अपने नाम किया तूने,
क्योंकि तू इक हद की हद तक
परचेत था 'परचेत',
इसलिए जिंदगीभर,
अपनी शर्तो पर काम किया तूने।
Sunday, May 17, 2026
दस्तूर
जिंदगीभर पकते रहे यह सुनते-सुनते
कि नेगेटिव नहीं हमेशा पौजेटिव सोचो,
काश कि जमाने को अस्पताल का
यह दस्तूर भी पता होता कि
नेगेटिव आए तो सही,
पौजेटिव मतलब जेब पर डाका।
Saturday, May 16, 2026
निश्चय।
जिंदगी मे जो रात आखिरी होगी,
समझ लेना कि वो बात आखिरी होगी,
झख मारते रहे तेरे वास्ते,
जिंदगी भर 'परचेत',
अब ये सावन की बरसात आखिरी होगी।
Friday, May 15, 2026
आरज़ू
जो किसी के भी दिल में नहीं बसता हो,
उसे तू अपने दिल में ऐसे न बसाया कर,
इतनी सी आरज़ू है तुझसे मेरी 'परचेत',
अपना ग़म लेके इधर-उधर मत जाया कर।
Thursday, May 14, 2026
Wednesday, May 13, 2026
क्षणभंगुर
उनको देखकर कुछ न भाया,
सहज थे,असहज से भा गए,
नूर चेहरे का तो तब छलका,
महफ़िल में जब तुम आ गए।
Friday, May 8, 2026
बोझिल मन !
अगाध होते हैं रिश्ते दिलों के,
इक ज़माना था जो हम गाते,
तय पथ था और सफ़र अटल,
उम्मीदों पे कब तक ठहर पाते।
जागी है जब कुछ ऐसी तमन्ना
कि इक नये सांचे में ढल जाते,
नजर आता जो सुकून हमको,
कागज पर लफ्ज़ उतर जाते ।
सफर जारी है धीमे-धीमे मगर,
मुकर्रर वो रास्ते नहीं भाते,
घर की मुंडेरी पे बैठने को 'परचेत',
अब परिंदे भी नहीं आते।।
Wednesday, May 6, 2026
लॉकडाउन को-रोना-२०१९ की घरेलू हिंसा।
गलियां सब वीरां-वीरां सी, उखड़े-उखड़े सभी खूंटे थे,
तमाशबीन बने बैठे दो सितारे, सहमे-सहमे से रूठे थे।
डरी सूरत बता रही थी,बिखरे महीन कांच के टुकडो की,
कुपित सुरीले कंठ से कहीं कुछ, कड़क अल्फाज फूटे थे।
ताफर्श पर बिखरा चौका-बर्तन, आहते पडा चाक-बेलन,
इन्हें देखकर भला कौन कहेगा कि ये बेजुबाँ सब झूठे थे।
पटकी जा रही थी हर चीज,जो पड़ जाए कर-कमल उनके,
वाअल्लाह, बेरुखी-इजहार के उनके, अंदाज ही अनूठे थे।
तनिक शुश्रुषा की कमी 'परचेत', मनुहार मिलाना भूल गए,
फकत इतने भर से ही बदन के सारे, सुनहरे तिलिस्म टूटे थे।
Tuesday, April 28, 2026
कुपत
तुम्हें पाने की चाह में मुद्दतों बैठे रहे
हम, तुम्हारे बाप के पास,
घंटों पैर दबाए मगर क्या मजाल कि
बुड्ढे को हुआ हो जरा भी एहसास।
Saturday, April 25, 2026
Yकीं
रात गहरी बहुत है मगर,
यकीं रखो, हम सोएंगे नहीं।
तूम रुलाने की जितनी भी कोशिश कर लो,
रोएंगे नहीं,
बेदना के पार्क मे सन्नाटे संग
खामोशी भी बैठी है 'परचेत',
इसलिए किसी के बहकावे में आकर,
आपा खोएंगे नहीं।
Monday, April 20, 2026
बोल संस्करण !
हमने तो मरने को नहीं कहा था,
अरे वो, हमें पत्थर दिल कहने वालों,
जो पास है तुम्हारे उसी पे जी लेते,
मुफलिसी, तंगदिली मे जीने वालों ।
बस, मेरे साथ सिर्फ इक मेरी गिला़ और
तुम्हारे संग तमाम सिकवों का काफ़िला,
मैं अभिभूत और ऐतबार पराजित, 'परचेत',
यकीं रख, लम्बा न चल पायेगा ये सिलसिला।
सिसकियां आई, हिस्कियां आई और पराज भी आए हैं,
देहलीज पे तेरी, युवा आए और उम्रदराज भी आए हैं,
अरे वो, हुस्न की मलिका, नागवार है इतराना तेरा,
उम्र दराजी के तजुर्बे में हमने तो उन्हें भी देखा है,
कबूतर के चेहरे मे मु़डेरी पर जो बाज आए हैं।
जो आज आनी चाहिए थी, वो तुम्हें आज आती नहीं,
खुद को हुश्न की मलिका बताते हुए लाज आती नहीं,
हमने तो, तुम्हारे हुस्न की बस खैर मांगी थी, ऐ दोस्त!
जो जवानी में न आ सके, वो उम्र दराज आती नही।
न निशां पड़ते, न ही दाग होते,
तले जिसके अंधेरा न होता,
ऐ काश! कि हम वो चराग होते,
हम कहते, छुप लो बनकर प्यार
हमारे इस सूने से दिल में,
छुप लेते,अगर जो तुम राग होते।
Sunday, April 19, 2026
Tuesday, April 14, 2026
कबाब में हड्डी
अबे, पहले तो ये बता तू है कौन?
तुम जैसों के मुंह लगना मेरा चस्का नहीं,
मेरी तो बीवी से भी बिगड़ी पड़ी है,
चल हट, मुझे सम्हालना तेरे बस का नहीं।
Monday, April 13, 2026
श्रद्धांजलि!
वो बिन वजह हंसना तेरा,
वो बिन वजह रोना तेरा,
जिंदगी और कुछ भी नहीं,
तेरी -मेरी कहानी है।
इक प्यार का नगमा....
#आशाभोंसलेविनम्रशर्द्दाजली!
बंदिशें ।
मायके ठहरने का वक्त बिटिया जानती है, ज्यादा न रुक पाएगी,
हेमंत ऋतु भी आई, कल शिशिर भी वसंत संग चली जाएगी।
Sunday, April 12, 2026
बताएं भी किसे?
बेरुखी, खामोशी, यादों का बोझ,
फेहरिस्त लम्बी है इस तन्हाई की,
अब क्या? उम्र कट गई 'परचेत' ,
राह तकते-तकते इक हरजाई की।
Saturday, April 11, 2026
पुरानी यादें।
भले ही वो हैंगओवर मेरे लिए कुछ ही पल का था,
नशा मेरे प्यार का मगर, तीखा नहीं हल्का था,
क्या बताऊं किस कदर उस नशे मे मैं खो गया,
नशा जो पलभर के वास्ते तेरी आंखों से छलका था।
Friday, April 10, 2026
कुदरत
परिंदों ने घर बसाया, बच्चों संग फुर हुए,
निशानियां बसावट की मैं देख पाया था,
अपने छोटे से आशियां में उनके लिए,
जो मैंने भी इक छोटा सा नीड़ बनाया था।
Thursday, April 9, 2026
बंदिशें अपनी।
रातें अक्सर ही मुझसे सवाल किया करती हैं,
और एक मैं हूं कि उनका जबाब ही नहीं देता,
कभी नयन थकते थे, अब कदम थकनें लगे हैं,
और कितना चल पाऊंगा, मैं हिसाब ही नहीं देता।
जज़्बात ऐसे लगने लगे हैं मानो ये जज़्बाती नहीं,
जमाने की हसरतें और आदतें हैं जो जाती नहीं,
अधजगी नीदं मे जुबां लगे है कुछ पढने को आतुर,
और मैं हूं कि उसे पढ़ने को किताब ही नहीं देता।
अनियमित नींदचर्या, स्लीपिंग डिसआर्डर कह लो,
दर्द की कोई सीमा नहीं जितना सह सको, सह लो,
डगमगाते कदम कहते हैं कि बहक जाने दो हमें भी,
मगर 'परचेत' मौका-ए-बहकना ख्वाब ही नहीं देता।
Saturday, April 4, 2026
सलाह
तू खुद ही से इकबार रूबरू तो हो जा,
फिर जो कहना है, उसे आलेख लेना,
अरे वो, कश्ती के मुसाफिर, उतरने से पहले,
एकबार समन्दर तो जाकर देख लेना।
Saturday, March 21, 2026
अंदाज!
मेरी डांडी-कांठियों का मुलुक ज्यैल्यू,
Go there in the spring.
हैरा बण मा बुरांश का फूल
जब बण मा आग लगाणा होला,
भीटा पाखों थैं फ्योलिं का फूल,
पिन्ग्ला रंग मा रंग्याणा होला ..
लाइयां पैयां ग्वीराल फूलु ना,
The earth will be decorated,
Go there and sing.
Thursday, March 19, 2026
O sitting moon !
Monday, March 16, 2026
पुनर्विवरण !
रातों के हर पहर-दोपहर,
जब भी मैं करवट बदलूं,
बदली हुई हर करवट पर,
कसम से आहें भरता हूं ,
उम्र पार कर चुका प्रेम की वरना,
कह देता कि मैं तुमपर मरता हूं ,
मत पूछो, ये नशा कौन सा करता हूं,
सच में, मैं तुम्हें बतानें से डरता हूं।
Thursday, March 12, 2026
वज़ह!
गर तुम न खरीददार होते,
यकीन मानिए,
टके-दो-टके में भला कौन बिकता?
मुहब्बत बिकाऊ न है और न थी
कभी,
बस, निवेश गलत किया है तुमने,
इसीलिए घर में "धन" नहीं टिकता।
वाजिब बात
रूठ जाते हैं मुझसे मेरे अपने ही और
मुझको मनाने मे जरा भी रुचि नहीं,
दिलचस्प हों भी अगर मुहब्बत की राहें,
क्या फायदा, जब दिल मे ही शुचि नहीं?
Wednesday, March 11, 2026
कश्मकश
सबब खामोशी, तेरा बहाना अच्छा है,
इश्क़ हुआ मगर इजहार न किया,
अंदाज़े मोहब्बत छुपाना अच्छा है,
शकुन बुरा ही सही, दिल जलाना अच्छा है।
Monday, March 9, 2026
सलाह
कह रहा हूं मैं तुमसे,
ऐ बेस्वाद, बेसुरे भड़वे,
जुबां पे थोड़ी मीठास घोल,
मत बोल इतने भी बोल कडुए।
तू शिद्दत रख और समर्पण कर,
मत पड़ फरेब में जिस्मानी शाम की,
रूहानी एहसास खुदा की इबादत ,
लिखदे तू जाकर अपने नाम की।
Sunday, March 8, 2026
मन की हकीकत
न हमारा ईमान बचा, न ही पहचान बची,
बतलाएं भी तो बतलाएं, तुम्हें क्या सची,
उम्मीदों और यादों के सहारे, ऐ 'परचेत',
थोड़ी सी ख्वाहिशों की बस, जां बची।
Friday, March 6, 2026
तब्दीली
तेरी याद आना
गुज़रे जमाने की बात हो गई,
पानी का गिलास
सामने टेबिल पर पड़ा देखकर,
अब तो हिचकियों भी नहीं आती।
सफर अभी बाकी है।
अभी नहीं, सफ़र जब खत्म होने की दहलीज पर होगा,
तभी सोचेंगे ऐ जिंदगी ! कि ज़ख्म कहां-कहां से मिले।
Wednesday, March 4, 2026
हो ली,,,
पर्व रंगों का है वेरंगीन बन,
बैठा हूं बातें करता खुद से,
कभी न जाने क्यों ऐसा लगे,
हाथ धो बैठा हूं सुध-बुध से।
मदहोश-बेखबर, था तो नहीं,
दर्द का एहसास है बे-खुद से,
घाव जिस्म पे मेरे आहिस्ता कर,
अनुनय यही है बस, हुद-हुद से।
Friday, February 27, 2026
दरकार नहीं
मैं अभी सो रहा हूं, मर्जी के हिसाब से,
मर्जी के हिसाब से मुझे जागना है,
तुम मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी,
भाग लो, जितनी तेजी से तुम्हें भागना है।
Wednesday, February 25, 2026
लुभावना
सफर मे धूप तो बहुत होगी,
सूरज को ढक सको तो चलो,
एम्बूलैंस लेकर जा रही है रोगी,
राह उसकी रोक सको तो चलो।
Friday, February 20, 2026
इल्तज़ा
मोहब्बत मे, आंखों मे भर आए आंसुओं को
गिरने न देना 'परचेत',
क्योंकि प्यार के आंसू ही रूह की खुराक होते हैं।
Wednesday, February 18, 2026
वाजिब सवाल !
सवाल ये नहीं है कि जवानी में हम क्यों जीने मरने की कसमें खाते हैं,
सवाल ये है कि साठ के बाद ही क्यों 'परचेत',दर्द भरे गीत पसंद आते हैं।
Tuesday, February 10, 2026
Monday, February 9, 2026
दुविधा
इश्क़ कोई पोंछा नहीं है,
सिखा गई आज काम वाली बाई,
किधर जाऊं समझ नहीं आता,
आगे कुआं है और पीछे खाई।
पैगाम
इस जिंदगी का फलसफा बस, इतना सा रहा 'परचेत',
मुकाम पर हम खुद को लानत-मलामत हजार देते हैं,
संदेश उसतक पहूंचा देना, ऐ तख्त पर लटकाने वालों,
चलो, कुछ यूं करते हैं अब जिंदगी, तुझको गुज़ार देते हैं।
Sunday, February 8, 2026
हकीकत
बेवफा क्या हुआ,
कतार में खड़े हैं कुशलक्षेम पूछने वाले,
जब बावफ़ा था 'परचेत'
तो गली का कुत्ता भी नहीं पूछता था।
Saturday, February 7, 2026
संस्कृत सीखिए
अपने मुहल्ले में जरा सा सोबर दीखिए
ओर संस्कृत बोलना सीखिए,
खुद ही पूरी संस्कृत मत खाइए,
थोड़ा बीवी को भी सिखाइए।
जब झगड़े का मूड़ हो तो संस्कृत में ही लड़ना,
जमकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ना,
झगड़ा कोई सुन रहा होगा, मन में न खल रहा होगा,
पड़ोसियों को लगे कि घर में हवन-पूजन चल रहा होगा।
Friday, February 6, 2026
Thursday, February 5, 2026
पश्चाताप
अपने जो भी कहने को थे, सब अजनबी हुए,
और खामोशियां बन गई हमारी जीवन साथी,
क्या नहीं त्यागा था उनके लिए हमने 'परचेत',
हम-सफ़र तो थे किंतु, उनसे हम-नवाई ना थी।
ओ रे पिया, मैं तुम्हारी
अपना तन-मन लुटा के हारी,
ओ रे पिया, मैं तुम्हारी,
आगोश तुम्हारे, मेरा सुलभ लगे मन,
चाहे तन हो कितना ही भारी,
ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।
संबंधों के तौर-तरीके मैं ना जानू,
और बनावटीपन मैं ना मानू,
या फिर कह लो दुनियादारी,
अब रह नहीं सकती मैं कुंवारी,
ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।
कोमल हूं पर कमजोर नहीं हूं,
सहमी-सहमी भोर नहीं हूं,
हर पल साथ खड़े हो जब तुम,
कहके दिखाए कोई मुझे अबला नारी,
ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।
कोप
शरीक हुए थे जो कल के कवि सम्मेलन में,
वो सब के सब, एक ही थाली के चट्टे-बट्टे थे,
एक से बढ़के एक पैदाइशी चमचे, तलवेचाट,
बस,यही कहूंगा कि सबके सब उल्लू के पठ्ठे थे।🤣
Wednesday, February 4, 2026
तहक़ीक़ात अभी जारी है
रिश्तों की खाइयों को पाटिये कि अब और न बढ़ें,
दिलों के सहरा में नजर आ रही दरार बहुत भारी है,
अगम्य राह, सत्य का पथ इतना दुर्गम कैसे हो गया,
बाधित क्यों है आवाजाही, तहक़ीक़ात अभी जारी है।
सदचित विभ्रम है और कानून का कोई खौफ नहीं,
राष्ट्र भयभीत किया जा रहा, बिखरने की तैयारी है,
समृद्धि के पथ पर पता नहीं यह कौन सी दुश्वारी है,
संयम पांवों तले क्यों आया, तहक़ीक़ात अभी जारी है।
Tuesday, February 3, 2026
दिल की बात
हमने भरोसा अभी भी कायम रखा है जीने मे,
मगर, ऐ 'परचेत',यह दर्द असहनीय है सीने में।
बड़े ही बुजदिल निकले ये सब, दिल दुखाने वाले,
हमने तो प्यासे को भी पानी पिलाया था, मदीने में।।
नादानी
पता नहीं किसको ढूंढते रहे थे हम,
सबसे पूछा, डाकिया,धोबी,खलासी,
सबके सब फ़लसफ़े,इक-इककर खफ़े,
लिए घुमते रहे बनाकर सूरत रुआँसी,
उम्र गुजरी,तबअहसास हुआ 'परचेत',
जिंदगी घर में थी, हमने मौत तलाशी।
इश्क़-ए-सर्दी
मांग रही थी वो आज मुझसे
मेरे प्यार का हलफनामा,
मौर्निग वाक पर जाती है जो
पहनकर, रोज मेरा ही गर्म पजामा।
Monday, February 2, 2026
तमन्ना
तुम्हारे ओठों से चिपककर सांसों के सहारे,
तुमपर ही समर्पित हो जाता,
ऐ काश कि अगर 'परचेत' !
मैं तुम्हारे सान्निध्य की कोई बांसुरी होता।
स्वीकारोक्ति
हिम्मत ही नहीं रही जब,
दिखाने को कुछ नया करके,
फायदा ही क्या है 'परचेत',
तब अफसानें बयां करके।
Sunday, February 1, 2026
Imagination
While landing at our courtyard,
A mysterious bumblebee
is humming,
It looks,
at our door,
a treasure trove of happiness
is coming.
नासमझ
मुहब्बत के खातिर तुम्हारी हर बगावत की,
हमेशा ही अगुवाई करता,
फक़त ख्वाबों में ही मुहब्बत की दुहाई दोगे
तो 'परचेत', अंजाम यही होगा।
Saturday, January 31, 2026
अधूरी हसरत
दिलों की हसरत, मिलन की चाहत, न तो इबादत ही रंग लाई
और न ही दिल की दुआ ,
हो जाता मिलन अचानक हमारा भी किसी मोड़ पर 'परचेत,'
कभी ऐसा इत्तेफाक न हुआ।
Friday, January 30, 2026
दौर-ए-बदलाव
सांझ ढले, मेरे साथ बैठकर
एक पैग व्हिस्की,
कभी वो संग-सग पीती थी,
जब न तो आभासी दुनिया थी,
और ना ही वो इस कदर ,
अलग ही दुनियां में रहकर जीती थी।
अब उसने व्हिस्की पीना छोड़ दिया है,
आजकल दिन-रात सेल-फोन पीती है।।
Thursday, January 29, 2026
हौंसला
हौसलों के दमपर अभी तक,
जी है जिंदगी हमने,
डटकर किया है मुकाबला,
राह की दुश्वारियों का,
हर शै से निकले हैं हम,
उबरकर भी, उभरकर भी,
जरा भी न कभी बेबस हुए,
बोझ ढोते लाचारियों का।
Wednesday, January 28, 2026
सवाल
वो लम्हा तुम जरा बताओ,
जब मैं तुम्हारे संग नहीं था,
कौन सा था वो लम्हा-लम्हा
जिसमें, प्यार का रंग नहीं था?
यकीनन
तुम जानते हो कि मेरे होते,
सलामत है लाज तुम्हारी,
इसीलिए आज तक मैं,
तुम्हारे राज तक नहीं गया ।
मांगने की आदत जिंदगी में
मुझसे कभी पाली न गई,
मोहब्बत में इसीलिए मैं भरोंसे के
अल्फ़ाज़ तक नहीं गया ।
Tuesday, January 27, 2026
Monday, January 26, 2026
फलसफा जिंदगी
वो अब आ नहीं सकता फिर से,
गुज़र गया जो वक्त अपनी राहों से,
किन्तु, मुश्किल तो होगा जिंदगी तेरा
सुगमता से निकलना, मेरी पनाहों से।
घड़ी की तरह खिसकती जा रही हो,
पकड़कर रखूंगा तुझे अपनी बांहों से,
सुगम-दुर्गम, हर दौर जिया है तेरे संग,
मुझे फर्क नहीं पड़ता,साहों-सलाहों से।
Sunday, January 25, 2026
राय
वर्तमान तुम अपना व्यर्थ ही न गंवाना,
उलझकर बातों में किसी भविष्यवेता के,
बहकावे में कभी भी हरगिज़ मत आना,
सड़कछाप, किसी दो कौड़ी के नेता के।
Saturday, January 24, 2026
पल-पल
क्या बताऊं कि ये
चोंतीस साल कैसे बीते,
किस मुश्किल में
हर लम्हा गुजरा जीते-जीते,
याद तो होगा तुम्हें कि मैंने
तुमको भी न्योता दिया था,
जवानी के फोल्डर जब मैंने,
'बीवी' ऐप डाउनलोड किया था!!
Friday, January 23, 2026
सवाल!
हूं मैं तुम्हारा यार ऐसा ,
कविता का सार जैसा,
प्रेम से गर प्यार ना निभे,
फिर प्यार का इजहार कैसा?
Wednesday, January 21, 2026
एहसास !
थप्पड खाकर वो 'डिस' उनकी
यूं, थोड़ी हमने भी चख दी थी,
बस, ग़लती यही रही हमारी कि
दुखती रग पर उंगली रख दी थी।
Tuesday, January 20, 2026
दानदाता च महीपति;
कडकछाप मुद्रीकृत सारे ब्लौगर-सलौगर,
यू-ट्यूब पे कमाई की धौंस वाले यूट्यूबर,
आज सबके सब मैंने पशेमान कर दिए,
दस सेंट एडसेंस से मैंने भी कमाए थे,
सारे के सारे गुगल को ही दान कर दिए।🤣
Saturday, January 17, 2026
बहुरूपिये!
अब कहूं भी कैंसे कि तू हिसाब-ए-मुहब्बत,
किस तरह मुझसे गिन-गिन के लेती थी,
रहती तो हमेशा नज़रों के सामने थी, मगर
जमाने के आगे कुछ कम ही दिखाई देती थी।
दिले नादान
याद तो होगा तुमको
वो दौर-ए-जवानी,
इक दोराहे पर अचानक
हम-तुम मिले थे,
जहां सड़क तो
खाली-खाली थी मगर,
सड़क किनारे कुछ
चाहत के फूल खिले थे।
शनै:-शनै: जब हमने
कदम बढ़ाए उसतरफ,
इधर, इसतरफ
एक वीरान सा सहरा था,
उधर एक अशांत मन
जमीं पे ठहरा था,
अंततः न तो छांव ही मिल पाई,
न पानी ही,
ज़ख्म जो तुमने दिया था,
बहुत गहरा था।
Friday, January 16, 2026
Tuesday, January 13, 2026
छंद
पर्व लोहड़ी का था
और हम आग देखते रहे,
उद्यान राष्ट्रीय था और
हम बाघ देखते रहे।
ताक में बैठे शिकारी
हिरन-बाज देखते रहे,
हुई बात फसल कटाई की,
हम अनाज देखते रहे।
समझ, नासमझ !
मिले न 'फूल' तो हमने
'चतुरों' से दोस्ती कर ली,
मजबूरी का नाम गांधी,
जिंदगी यूं ही बसर कर ली।
Sunday, January 11, 2026
द्वंद्व
उलझकर मेरी बातें कुछ यूं,
तुम्हारी बातों में रह गई,
दिल की जो भी ख्वाहिशें थी,
जज्बातों में बह गई।
जिया उलझाने की तुम्हारी
ये हरकतें बड़ी नासाज़ लगी,
श्रुतिपुट जो सुनना न चाहते थे
वो तुम्हारी नज़रें कह गई।
Saturday, January 10, 2026
असर
शाम-ओ-सहर,
हमारे मिलने पर,
बीवियों की डपट का
जो रंग लग गया,
अब क्या बताऊं,
तुम्हें ऐ दोस्त!
कांच के गिलासों पे भी
जंग लग गया।
Friday, January 9, 2026
खुदानाखास्ता
गैर समझा करते थे जिन्हें हम,
दिल ने उन्हें कुछ इसतरह अपनाया,
दूर भाग खड़ी हुई तन्हाई हमसे,
हम अकेले को जब मिला हमसाया ।
फिर वो हमसाया कुछ यूं हमें भाया,
तमाम जिंदगी की पलट गई काया,
जिन परछाइयों से डरते थे कभी हम,
आखिर,उन्हीं परछाइयों ने हमें अपनाया।
Tuesday, January 6, 2026
मुफ्तखोरी
जब भी, जो भी जुबां पे आता है तुम्हारी, बक देते हो,
मुफ्त में जिसका भी लिखा हुआ मिल जाए पढ़ देते हो,
फुर्सत मिले तुम्हें तो सोचना, एक कमेंट के भूखें को
क्या, सही में कभी आप उसको उसका हक देते हो?
Thursday, January 1, 2026
आगाज़ - 2026 !
वर्ण आखिरी, वैश्य, क्षत्रिय, विप्र सभी,
सनातनी नववर्ष का जश्न मनाया कभी ?
नहीं, स्व-नवबर्ष के प्रति जब व्यवहार ऐसा,
फिर पश्चिमी नवबर्ष पर तकरार कैसा?
समझ पाओ तो समझ लेना क्षुब्ध भावनाएं,
आपको नूतनवर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। 🎂 🙏
Tuesday, December 30, 2025
संकल्प-२०२६
सलीके से न खुशहाली जी पाया, न फटेहाल में,
बबाल-ए-दुनियांदारी फंसी रही,जी के जंजाल में,
बहुत झेला है अब तक, खेल ये लुका-छिपी का,
मस्ती में जीयूंगा तुझे अब ऐ जिंदगी, नए साल में।
Monday, December 29, 2025
Friday, December 26, 2025
सलाह
दीवार सामर्थ्य की और तू फांद मत,
अपनी औकात में रह, हदें लांघ मत,
संवेदनाएं अगर जिंदा रहे तो अच्छा है,
बेरहम बनकर उन्हें खूंटी पे टांग मत।
Wednesday, December 24, 2025
मलाल
साफगोई की भी तहज़ीब होती है,
डूबने वालों की भी यह सदा आई,
आखिरी उम्मीद थी मेरी तुम मगर,
बुलाने पर भी मेरे शहर नहीं आई।
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...










