Thursday, May 12, 2022

उत्तराखंड सरकार जी ! थोड़ा स्थानीय लोगों की भी सुन लो ।

चारधाम कपाट खुलते ही उत्तराखण्ड मे एक तरफ जहां श्रद्धालुओं का अपार हुजूम उमड पडा है,वहीं दूसरी तरफ उसका नतीजा यह है कि चारों धामों और आसपास के क्षेत्रों में अफरातफरी का माहौल है। और इस सब का खामियाजा उन स्थानीय लोगों को भुगतना पड रहा है जिन्हें अपने किसी भी निजी कार्यवश उत्तराखंड के अंदर किसी एक स्थान से दूसरे स्थान को ट्रैवल करना पड रहा है। आवागमन के लिए वैसे ही सीमित मात्रा मे वाहनों की उपलब्धता थी और इस यात्रा रस ने आग मे घी का काम कर डाला।

उत्तराखंड सरकार जी, राज्य की इकोनॉमी से आगे भी स्थानीय लोगों की कुछ महत्वपूर्ण जरूरतें हैं, कृपया उसका भी ध्यान रखा जाए। ऐसा न हो कि आधी छोड़ पूरी को धावे, आधी मिली न पूरी पावे।




Thursday, March 31, 2022

मिथ्या

सनक किस बात की, 

जुनून किस बात का?

पछतावे की गुंजाइश न हो, 

शुकून किस बात का?







Monday, March 28, 2022

ख़लिश

 दु:ख सदा ही मुखर रहे,

खुशियों के भी राज मे,

फिर सिमट गये ख्वाब सारे,

उम्र की दराज़ मे।


वहम

न हम 'हम' मे रहे

न 'अहम' मे,

जिंदगी कट गई

इसी 'वहम' मे ।

Thursday, November 25, 2021

मेरा देश महान....


जहां, छप्पन इंच के सीने वाला भी

यू-टर्न  ले लेता है,

वहां, 'मार्क माय वर्ड्स' कहने वाला पप्पू, 

भविष्यवेता है।

समय की कसौटी...

 


Friday, November 19, 2021

'डेमोक्रेजी'

 कृषि सुधार 'व्हिस्की के पैग' का

तुम्ही बताओ सुरूर क्या था? 

वो 'साला' कानून अगर,

जितना बताया, 

उतना  ही काला था तो लाना जुरूर क्या था?

सालभर आते-जाते, दिल्ली की सीमाओं पर 

जिन्होंने दुर्गति झेली,

ऐ हुजूर, लगे हाथ यह भी बता देते, 

उनका कुसूर क्या था?

#आज जार्ज बरनार्ड शा फिर सही साबित हुए।



Wednesday, November 17, 2021

गूढ़ सत्य






अपने तमाम एहसास हमने, 

कुछ यूं लफ्जो़ मे पिरोए हैं,

तुम साथ तो चेहरे पे मुस्कुराहट बिखेरी,

और अकेले मे रोए हैं।




Tuesday, November 16, 2021

खोट

रूप कुरूप नजर जो आये,

अयथार्थ दिशा मे दर्पण देखो, 

तृप्ति हेतु करो जो अर्पण,

उस अर्पण का तर्पण देखो।


क्या बदला है गत बर्षों मे,

नजर न आए, कण-कण देखो,

दृष्टि का यह दोष है कह लो,

सृष्टि बदलती क्षण-क्षण देखो।


पतित प्राण असंख्य जगत मे,

जम्हूरियत का वरण देखो,

बडबोली हो रही दुःशीलता,

आचरण का हरण देखो।


मोल इसकदर डोल रहा क्यों,

सनातन अपना प्रण देखो,

तन-मन और कसैला मत कर,

मन-मंदिर का जनगण देखो।


सुख की इच्छा दुःख का कारण,

माया बडी विलक्षण देखो,

शीश झुकाया दर पर किसके,

मन का व्यग्र समर्पण देखो।


उत्तराखंड सरकार जी ! थोड़ा स्थानीय लोगों की भी सुन लो ।

चारधाम कपाट खुलते ही उत्तराखण्ड मे एक तरफ जहां श्रद्धालुओं का अपार हुजूम उमड पडा है,वहीं दूसरी तरफ उस का नतीजा यह है कि चारों धामों और आसपास...