बेवक्त
कुछ बेहुदे सवाल,
इस वक्त पे ना ही पूछिए
हमसे जनाब,
अभी-अभी लौट के आए हैं,
दफ़न करके,
दिल के अधूरे ख़्वाब।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
कुछ बेहुदे सवाल,
इस वक्त पे ना ही पूछिए
हमसे जनाब,
अभी-अभी लौट के आए हैं,
दफ़न करके,
दिल के अधूरे ख़्वाब।
पूछा भी तो किससे तुमने
मिरे बारे मे 'परचेत',
वो नकचढ़ा नसीब है,
अक्सर मुझसे ख़फ़ा ही रहता है।
मिरी आदत मे शुमार है
मेरी साफगोई का असर,
जो मुंह में आता है वो
मैं बेधड़क बोल देता हूं,
कोई मेरी ढलती उम्र पर न जाए
तो बेहतर होगा 'परचेत',
बत्तीसी आधी रह गई फिर भी
बीयर की बोतल का ढक्कन,
मैं अभी भी दांतों से खोल देता हूं।
#औरमधुशालाकीशाकीमेरामुहतकतीरहजातीहै 🤣
हमारे लिए तो तुम हमेशा अहम थे
मगर पाले तुमने ही कुछ वहम थे,
तेरे वास्ते मुसीबतों मे भी मुश्किलों को
जिसने गले लगाया, वो हम थे,
लिबास बदलने से बदल नहीं जाता
फ़क़त कोई किरदार 'परचेत',
तुम जानते हो, तमाशा खडा करने मे
वरना हम क्या किसी से कम थे?
अपनी हर परेशानी का सबब, मैं तेरे मूंह पे फेंक देता,
गर ये कश्ती का मुसाफिर 'परचेत', समंदर देख लेता।