Tuesday, July 28, 2026

ओझल

 वादों-इरादों की राह बहुत लम्बी थी, मैं ऊब गया,

आसां जो तेरे प्यार की दरिया मिली, मै डूब गया।

यथार्थता


सफर रुका नहीं और 

मिलते गये काफिले हमको,

शिकवे गले मिले और

दिल पे लगा गये गिले हमको, 

इम्तहानों के दौर से, 

हम बेधडक गुज़रे हैं 'परचेत',

हौंसले रक्त से मिले 

और फैसले वक्त से मिले हमको।


Thursday, July 23, 2026

विडम्बना देखिए

 दोनों की ही सरकारी नौकरी थी, 

अच्छी तनख्वाह के अलावा,

ऊपरी मे भी खूब लूटा-खसौटा,

सोना-चांदी जो हाथ आया समेटा,

कुछ नहीं तो भागते चोर का लंगोटा।


अपने दोनों ही बच्चों को  उन्होंने 

अच्छे स्कूलों से तालीम दिलवाई

किसी कोर्स के लिए प्रतिस्पर्धा से

जब वो चयनीत न हो पाए तो

अवैध चंदे की थाली सजवाई।


बच्चे दोनों मूल छोड़कर अपना

अब, विदेश जाकर बस गए हैं,

और मां-बाप सूरत को तरस गये हैं,

लौटकर  मिलने आएंगे वो कभी,

पति-पत्नी इसी भ्रम मे है,

बाप पिछले साल गुजर गया,

मां अभी वृद्धाश्रम मे है।

संयोग

 ठुकरा गई थी वो जो हमको 

दौर-ए-जवानी कुछ तन्हाइयां,

उम्र के इस पड़ाव पर फिर से,

बेताब हैं हमें गले लगाने को 'परचेत'। 

विडंबना

 न नींद ही बची, 

न खुद को  मच्छरों से ही बचा पाए,

रात भर खुजलाते-खुजलाते

करते रहे हाये-हाए,

पैर पसारने को हमने

चारपाई और चादर बडी की थी, 

मगर 'परचेत', 

फिर भी खुलकर नही सो पाए।


Wednesday, July 22, 2026

बेवक्त


कुछ बेहुदे सवाल, 

इस वक्त पे ना ही पूछिए 

हमसे जनाब,

अभी-अभी लौट के आए हैं, 

दफ़न करके, 

दिल के अधूरे ख़्वाब।


मेरा नसीब

पूछा भी तो किससे तुमने 

मिरे बारे मे 'परचेत',

वो नकचढ़ा नसीब है,

अक्सर मुझसे ख़फ़ा ही रहता है।