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अधूरे ख्वाब

खुशियों तक पहुंचने के दिल मे अरमान बहुत थे, नहीं पहुंच पाया 'परचेत' राह मे  तूफान बहुत थे।

गुस्सा

अपनी हर परेशानी का सबब, मैं तेरे मूंह पे फेंक देता, गर ये कश्ती का मुसाफिर 'परचेत', समंदर देख लेता।

मेरा देश महान!

  कुशल नेतृत्व और दृढ़ संकल्प के लिए  ५६ इंच की छाती ढूंढते हैं, और रोज़मर्रा के संचालन के लिए  अनुसूचित जाति, जनजाति ढूंढते हैं

अधूरा शेर...5

पडोस का माहौल, आबोहवा और रहन-सहन,  बिन बात खिलखिलाना, ठिकाना रास आना, अगर हमसे पूछना ही है 'परचेत, तो यह पूछो  कि किया जाता है कैसे मुस्कुराकर गम छुपाना।

अधूरा शेर....4

यही पूछने को बेताब है 'परचेत' जमाने भर से कि  आखिर दीखता कैंसा होगा पलकों का शामियाना ।

अधूरा शेर...3

सच बोलने का फलसफा कुछ ऐसा मिला 'परचेत', कि किसी ने भी बढ़कर कभी गले नहीं लगाया।

अधूरा शेर...2

सबकी उलझनों को सुलझाने मे ही बसर गई, उलझी अपनी भी थी 'परचेत', मगर गुज़र गई...