हे राम ! (देव)
देश के भीतर और बाहर हर क्षेत्र में सिर के ऊपर तक निकल चुके भ्रष्टाचार के दलदल की तरफ समूचे देश का ध्यान आकर्षित करने और निकृष्ट और भ्रष्ट सरकार को इस पर लगाम लगाने हेतु मजबूर करने के लिए एक सार्थक पहल शुरू की गई थी ! मगर , जैसा की इस देश का इतिहास(दुर्भाग्य) रहा है कि राज सत्ता पर काबिज कौरवों ने शकुनी और जयचंदों की मदद से इसे राजनीति और व्यवसाय, जाति और धर्म, हिन्दू और मुस्लिम, आर एस एस और धर्मनिरपेक्ष तथा अन्ना हाजरे और बाबा रामदेव के पांसों के बीच कुशलता से उलझाकर रख दिया है! कुछ दिनों से अधिकाश पब्लिक फोरमों पर लोगो की इस बारे में राय जानने के लिए नजर रखे हुए था, और यह बात थोड़ा अखरी कि वजाए भ्रष्टाचार और कालेधन की विकराल समस्या पर ध्यान केन्द्रित करने के हमारे अल्पसंखयक वर्ग के लोग इसे सिर्फ एक राजनैतिक और धार्मिक मुद्दे के तौर पर ले रहे है! अफ़सोस तब और बढ़ जाता है, जब देखता हूँ कि उच्च शिक्षित कहे जाने वाले हमारे प्रबुद्ध समाज के लोग भी इसे एक राजनैतिक फायदे के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश करने लगते है, और बाबा रामदेव को उनके योग के क्रियाकलापों तक सीमित रहने की ...