Tuesday, January 10, 2023

जोशीमठ आपदा

धसगी जोशीमठ, हे खाली करा झठ,

भागा सरपट, हे धसगी जोशीमठ।

नी रै अपणु वू, ज्यूंरा कु ह्वैगि घौर,

नी खोण ज्यू-जान, तै कूड़ा का भौर,

जिंदगी का खातिर, छोडिद्यावा हठ,

भागा सरपट, हे धसगी जोशीमठ।


कश्मकश

खुबसूरत सपने हमने भी सजाए थे, क्योंकि हम भी कभी फितरत वाले थे, पूरे न हुए वो अलग बात है, 'परचेत', मगर ख्वाब तो हमनें भी बहुत पाले थे...