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Showing posts from November, 2012

कार्टून कुछ बोलता है- अहम् बैठक

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कार्टून कुछ बोलता है -उज्जैन का खोता मेला

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नयनों का क्या भरोसा, कब नूर छोड़ देंगे।

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तनिक तुम अगर अपना गुरुर छोड़ देंगे, हम ये गंवारू समझ और शऊर छोड़ देंगे।  न सिर्फ तुम्हारी नापसंद,बल्कि जहां सारा,  इक इशारे पे तुम्हारे, हम हुजूर छोड़ देंगे।  तृष्णा न बची बाकी,क्या सखी,क्या साकी,  संग-कुसंगती का हम, हर सुरूर छोड़ देंगे।  सर पे  रखके  हाथ , न खिलाया करो कसमे,  मद्यपान न सही धुम्रपान जुरूर छोड़ देंगे।  बसाना ही है 'परचेत', तो दिल में बसाओ,  नयनों का क्या भरोसा, कब नूर छोड़ देंगे। छवि गुगुल से साभार  !

गली से इठला के निकलती है,चांदनी भी अब तो

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देखके लट-घटा माथे पे उनके,मनमोर हो गए है,  अफ़साने मुहब्बत के इत्तफ़ाक़, घनघोर हो गए है। कलतक खाली मकां  सा लगता था ये  दिल  मुआ,  हुश्नो-आशिकी के  इसपे , अब कई फ्लोर हो गए है।  गली से  इठला के गुजरती है, चांदनी भी अब तो,  वो क्या कि चंदा के दीवाने, कई चकोर हो गए है।   वो क्या जाने देखने की कला, टकटकी लगाकर,   खुद की  जिन्दगी से दिलजले  जो, बोर  हो गए है।     राह चलते तनिक उनसे, कभी नजर क्या चुराई,   नजरों में ही उनकी 'परचेत',अपुन चोर हो गए है।  

कार्टून कुछ बोलता है- मर्ज की दवा !

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ओ रे कसाब !

गर किया होता तूने  एक ठों काम नायाब, फिर चुकाना क्यों पड़ता  इसतरह तुझे  अपने कर्मों का हिसाब ! ओ रे कसाब  !! नरसंहार का  एक अकेला  तू ही नहीं  गुनहगार , क्योंकि इन बीहडो में   हर रोज होता है, हजारों निर्दोषों का शिकार! अद्भुत और फरेब भरी  यहाँ की रीति से,  कुछ बन्दूक से  तो  कुछ कूट नीति से,  फिर भी कोई माँगता नहीं  उनकी इस  कुटिलता  का हिसाब, मगर तुम  फंस गए जनाब ! ओ रे कसाब  !! तू  छला गया,  इसलिए दुनिया छोड़  चला गया, मगर ये कुटिल, अपनी कुटिलता के   तीर और कमान से,   गुलछर्रे उड़ा रहे यहाँ  आम  खर्च पर  शान से, पहनकर चेहरे पर ,  शराफत का नकाब, मगर तुमने  वो  क्यों नहीं पहना जनाब ?  ओ रे कसाब  !!  

कार्टून कुछ बोलता है- कैपिटल पनिशमेंट और फांसी का अंतर

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नसीहत उल्टी पडी या फिर ...........OMG !!

मैंने आज से  तीन साल पहले उत्तम प्रदेश में खुलेआम  हो रहे एक  अन्याय  पर एक छोटी सी  पोस्ट लिखी थी;  " डूब मरो  बेव्डो कहीं चुल्लू भर दारू मे ! "      और इसके केंद्र बिंदु में  बताया जाता है कि  चड्ढा जी ही थे। और अब उनका यह सारा साम्राज्य  यही छूट गया। उनको श्र्द्धान्जली स्वरुप अपनी उस पोस्ट का लिंक  यहाँ लगा रहा हूँ, पढियेगा जरूर  ;    " डूब मरो  बेव्डो कहीं चुल्लू भर दारू मे ! " इन बेवडो के लिए एक अंगरेजी लेख का लिंक भी दे रहा हूँ ।  एक अच्छा लेख है, अगर मदहोशी  की अवस्था से बाहर निकल आने की फुर्सत मिले तो इसे    भी पढ़ना   ;  

हतभाग्य सुश्री 2जी !

कई सालों के बाद अब 2जी स्पेक्ट्रम की हालिया   दोबारा आयोजित  नीलामी  निम्नलिखित कहानी के अनुरूप है: एक सुंदर लड़की थी  जिसने अपने माता पिता को खो दिया था।  उसके बाद वह अपने एक अभिभावक के साथ रहने लगी थी। जल्दी ही  वह लड़की शादी के योग्य हुई तो उसके भ्रष्ट संरक्षक ने उसके लिए एक उपयुक्त वर ढूढने  के बजाय उसे एक बूढ़े अमीर आदमी के हाथों बेच दिया,यानि कि  पैसे लेकर उसकी शादी उस बूढ़े अमीर के साथ कर दी।  हर किसी ने उसके इस कदम की यह कहते हुए कटु आलोचना की कि उसे उस लड़की के लिए एक उपयुक्त वर की तलाश करनी चाहिए थी क्योंकि वह लड़की ख़ूबसूरत थी, उससे शादी के लिए एक से बढ़कर एक अच्छे मैच, कई सुन्दर युवा स्नातक वर प्रस्ताव लेकर आगे आ रहे थे। वह भ्रष्ट अभिभावक कई वर्षों तक जब यह आलोचना सहन करने में असमर्थ रहा और जब लड़की प्रौढ  हो गई तो उसने लड़की से  उसके वर्तमान बूढ़े पति को तलाक देने को ...

एक ख्याल और सभी ब्लोगर मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये !

सर्वप्रथम  दीपावली की पूर्व संध्या   पर सभी ब्लोगर मित्रों  और पाठक मित्रो को  हार्दिक शुभकामनाये और  आपके समस्त पारिवारिक जनो को भी मंगलमय कामनाएं इस पावन पर्व की  !  आज सुबह  जब   यह समाचार कहीं  पर पढ़ रहा था कि सीएजी  को भी चुनाव आ योग की तर्ज पर तोड़ने की कोशिश हो रही है तो अचानक यह ख्याल मेरे मन में आया कि  क्यों न  इस देश में प्रधानमंत्री के चार पद होने चाहिए ; पीएम-नार्थ , पीएम-साउथ , पीएम ईस्ट एवं पीएम वेस्ट !  क्या पता इनमे से कोई एक सही निकल जाए जो थोड़ा बहुत आत्मसम्मान की परिभाषा समझता हो, देश को अपने  हितों से ऊपर देखता हो !    आपका क्या ख्याल है   मित्रों  इस बारे में?          

धन-ते -रस !

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कहीं सफ़ेद  तो  कहीं काली कमाई की हबस ! धनाड्यों के धन-ते-रस !! सडक,गली-मुहल्लों में  ख़ासा जाम,  जो जहां खडा  घंटों हो न पाया,   वहाँ से टस-से-मस !      धनाड्यों के इस धन-ते-रस !!    देश में कहने को  यूं तो  मंदी है, शहर में तमाम    आ बो-हवा भी गंदी है, चार चाँद लगे मगर   बुलियन बाजार को,  खरीददार मिला जब  ढाई करोड़ के   हीरों के हार को,    मिंयाँ,   बीबी को  कर न पाया बस !   धनाड्यों के इस धन-ते-रस !! छवि गूगल से साभार !

कार्टून कुछ बोलता है- कुंड -मंथन

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शुभ दीपावली !

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मेरे देश के नन्हे-मुन्नों,  नौनिहालों ! वसूलों  जितना भी    त्यौहार मनाने  का खर्च,  अपने बड़े-बुजुर्गों  एवं , मम्मी -पापा को पटाके ! मगर रखना ख्याल    पर्यावरण का भी ,  अतएव  फूकना तुम    सीमित मात्रा में ही  पटाखे !!  दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आप सभी को !

कार्टून कुछ बोलता है- ऑडिटर्स रिपोर्ट

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करवाचौथ पर ....

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करवाचौथ  की शुभकामनाओं संग एक पुराना जोक: पुरानी ऐल्बम देखते हुए बेटा बोला-  मां, इस फोटो में यह तुम्हारे साथ इतना हैंडसम सा आदमी कौन है? मां- अरे बेटा  ये तुम्हारे पापा हैं ! बेटा ( आश्चर्य व्यक्त करते हुए)  - तो माँ अब हम इस मोटू-टकले के साथ क्यों रहते हैं?

एक चुटकी- लोकतंत्र की सैर !

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लोकतंत्र की सैर को,  सांझ ढले चौक पर,  देखने जो मैं गया,  एक ही रंग में रंगे  पेशेवर सारे भिखमंगे नजर आये,  लूटकर तमाम वतन का सरकारी खजाना,  धन्ना-सेठ बनकर  घूमते,  डाकू-चोर, लुच्चे-लफंगे नजर आये ! भ्रष्टाचार के हमाम पर  दौड़ाई जो एक नजर,  ससुराली तो माशाल्लाह,  साले, जीजा सब के सब नंगे नजर आये !!