Saturday, August 29, 2020

एक लघु मगर जरूरी पोस्ट- अभी सोने का नहीं, लुडक जाओगे।

ज्यादा पुरानी बात नहीं है, आपको याद होगा शेयर बाजार जब इक्तालिस हजारी थे तो 55 हजारी की बात की जा रही थी और कर कौन रहे थे ? बाजारू गिद्ध। फिर क्या हुआ ? 41 हजारी 30 से भी कहीं नीचे आ लुडका। अब भला , दोष कोरोना का ही क्यों न रहा हो।

बस, इस संक्षिप्त पोस्ट के मार्फत आपको यही चेताना है कि वही स्थिति आज  बुलियन मार्केट की है। दलाली गिद्धों ने तात्कालिक फायदे के लिए इसे चढाया हुआ है, बहुत आवश्यकता के अलावा इसमे न उल्झें।

नीचे दो चित्र चस्पा किए हैं उनसे स्थिति को समझने की कोशिश करें।




Thursday, August 27, 2020

यह मोड...







कभी लगा ही नहीं,

फासला-ए-मोहब्बत,

शब्दों की मोहताज रही हो,

प्रेम सदा ही प्रबल रहा, 

बात वो कल की हो, 

या फिर आज रही हो।

तुम्हीं बताओ, बीच हमारे

दूरियों के दरमियाँ,

कुछ गलत एहसास तुमको

होने दिया हो हमने,

बावजूद इसके कि कभी 

तबीयत भी नासाज रही हो।।

Friday, August 21, 2020

ऐ जिंदगी।

ऐ जिंदगी बता,
तूने क्यों ये गजल छेडी,
इन बदरंग सफो़ंं मे,
हम तो जिये ही जा रहे थे तुझको, 
हर पल हसींंन लम्हों मे,
दफाओं की दरकार तो सिर्फ़, 
शिकायतों को हुआ करती है,
हमने तो कभी सोचा ही नहीं, 
नुक्शानों मे जिए कि नफ़ोंं मे।

ऐ जिंदगी, मुझको अब इतना भी मत तराश कि 
बदन की दरारें, नींद मे खलल का सबब बन जांए।







Tuesday, August 18, 2020

बेवफा ख्वाहिशे

 


इतनी संजीदा जे बात तुमने, 
गर यूं मुख़्तसर सी न कही होती,
मिलने को हम तुमसे, 
मुक्तसर से अमृतसर पैदल ही चले आते।

Sunday, August 16, 2020

सरकारों की नासमझी और प्रशासन की अकर्मण्यता का खामियाजा भुगतने को मजबूर पहाड़ी।

 01 अप्रैल 1973 को बंगाल टाइगर्स को बचाने की मुहिम के तहत तत्कालीन इंदिरा सरकार ने टाइगर प्रोजेक्ट शुरू किया था। मकसद यही था कि तेजी से लुप्त होती जा रही बंगाल टाइगर की आबादी को संरक्षित किया जाये, किंतु भ्रष्टाचार से ग्रसित सिस्टम के तहत कोई खास सफलता हासिल न हुई।

परिणाम स्वरूप, २००६ मे, जब श्रीमती सोनिया गांधी की सरकार सत्ता मे थी , टाइगर्स की की गई गिनती मे टाइगर्स की आवादी मात्र १४११ रह गई। 

फिर शुरू हुआ सरकार, नौकरशाहों और तथाकथित पर्यावणविदों द्वारा अपनी अक्षम्यताऔं पर पर्दा डालने का सिलसिला। विभिन्न स्थानों से बाघ, तेंदुए इत्यादि मांसाहारी प्राणी एक वन से दूसरे वनों को स्थानांतरित किये गये और ऐसे ही बहुत से हिंसक प्राणी उत्तराखंड के जंगलों मे छोड दिए गये।

मगर, बुद्धि से पैदल ये ज्ञानी लोग यह भूल गये कि जिन मांसाहारी प्राणियों को वे उत्तराखंड के जंगलों मे छोड रहे हैं,उनके पोषण की इन्होंने क्या व्यवस्था की है। होना ये चाहिए था जिस वक्त एक निश्चित संख्या मे हिंसक जन्तुओं को उत्तराखंड के जंगलों मे छोडा गया था, उसके छह गुना तादाद मे अहिंसक जीवों जैसे पहाड़ी हिरन और अन्य पहाड़ी जीवों को भी इन वनों मे छोडा जाता ताकि ये हिसंक प्राणी अपने उपभोग का म़ांंस इन जीवों से प्राप्त कर सकें मगर बडा सवाल ये कि अपना घर भरने से फुर्सत किस सर

कारी महकमे को थी?

नतीजन, वनों मे जो भी अहिंसक प्राणी सीमित संख्या मे थे, वो सब हिंंसक प्राणियों का निवाला बन चुके और अब सारे हिंसक प्राणी जैसे, बाघ तेन्दुए गांवो की ओर रुख करने को मजबूर हो गये। यही कारण है कि जिस बाघ ने ११ अगस्त को श्रीनगर के समीप मलेथा गांव मे तीन बहनों मे से एक को अपना निवाला बनाया था, वही, सुप्त प्रसाशन का लाभ उठाते हुए.१५ अगस्त को मलेथा गाँव के ही एक स्कूल मे झंडारोहण को भी पहुंच गया और ग्राम प्रधान सहित कई को घायल कर गया।

-पीसी गोदियाल


लगता नहीं है दिल मेरा, इन उजडी हुई दीवारों मे

 














लगता नहीं है दिल मेरा,
इन उजडी हुई दीवारों मेंं,
दम घुटता है कभी-कभी, 
भीत के बंद कीवारों मेंं।

सजर खामोश,पता ना चले,
कब दिन उगे, कब ढले,
कब नमी थी, कब शुष्कता,
समीप से गुजरी बहारों मेंं।

दम घुटता है कभी-कभी, 
भीत के बंद कीवारों मेंं।।

मंजर हसीं हो तो क्या सही,
दफ्ऩ दिल मे ही हैं बाते कई,
मुसाफिर बहुत हैं राह मे मगर,
बंद हैं सभी अपने दयारों मे।

दम घुटता है कभी-कभी, 
भीत के बंद कीवारों मेंं।।

एक ही चमन के सभी अनजाने,
यूंही पल-पल गुजरे, गुजरे जमाने,
जाने, कब, कौन, कहां खप गया,
इस गली उस गली, पास बाजारों में।

दम घुटता है यहां हरदम, 
भीत के बंद कीवारों मेंं।।

Saturday, August 15, 2020

पावन पर्व


आप सभी ब्लौगर मित्रों को स्वतंत्रता दिवस की मंगलमय 

                                शुभकामनाएं।🙏


Wednesday, August 12, 2020

अभी जाना तो नहीं चाहते थे वे इस दौर से, राहत न मिली तो जाना पडा इंदौर से।

भांति-भांंति के हुरी ख्वा़ब, 

मन मे लेकर इंदौर से 

झूमते हुए निकले थे जो कल,

जन्नत फुल होने की वजह से,

सुना है, उन्हें खुदा के  किसी

'राहत' कैंप मे ठहराया गया है,बल ।

Friday, August 7, 2020

दोष

मालूम था हमको,वो बुरी चीज है,

जिसे पीती है दुनियांं बडे नाज से,

मगर, ऐ साकी, बर्बाद हम यूं हुए,

कुछ तेरे पिलाने भर के अन्दाज से।



Wednesday, August 5, 2020

देवनगरी,"अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"














जन्मस्थली मुक्त हो गई, दैत्य कारावास से,
श्रीराम लौटेंगे अवध, आज फिर वनवास से।

दीपों से जगमगा उठे हैं, निर्मल सरयू के तट,
सजने लगे फिर दोबारा,अयोध्या के सूने पट।

गूंज रहा देश कौशल,'श्रीराम' के जयघोष से,
मुक्त होगी शीघ्र दुनिया,व्याधि,संताप दोष से।

हासिल करेंगे रामराज, दुष्टजनों के नाश से,
श्रीराम लौटेंगे अवध, आज फिर वनवास से।
                                          






Tuesday, August 4, 2020

मैं क्या बोलूं ?

धर्म-ईमान,
मालूम है, 
यहां सबकुछ,
टके-सेर बिकता है,
और जो खरीददार,
वो वैंसा है नहीं, 
जैंसा दिखता है।

Sunday, August 2, 2020

गजब।

ऐ खुदा, 
क्या लॉकडाउन की वजह से,
बंद हो गई है तेरी चक्की भी,
सैनेटाइजेशन की हद तो देखो,
दाम अलग किंंतु स्वाद एक जैसा
दे रही, कच्ची और पक्की भी।
अब तो हैरानगी यह देखकर और बढने लगी है कि
सोशल-डिस्टेंसिग बरत रही, मेरे गांव की मक्की भी।।😀






फ़कत़ जिंदा-दिली..

है कहीं अमीरी का गूम़ां तो कहीं गरीबी का तूफ़ां, ये आ़बोहवा, मेरे शहऱ की, कुछ गरम है, कुछ नरम है। कहीं तरुणाई का योवनवदन छलकते जाम, हाथों मे ...