भांति-भांंति के हुरी ख्वा़ब,
मन मे लेकर इंदौर से
झूमते हुए निकले थे जो कल,
जन्नत फुल होने की वजह से,
सुना है, उन्हें खुदा के किसी
'राहत' कैंप मे ठहराया गया है,बल ।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
चहुॅं ओर काली स्याह रात, मेघ गर्जना, झमाझम बरसात, जीने को मजबूर हैं इन्सान, पहाड़ों पर पहाड़ सी जिंदगी, फटते बादल, डरावना मंजर, कलयुग का यह ...
श्रद्धांजलि ।
ReplyDeleteविनम्र श्रद्धांजलि।
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