यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (16-08-2020) को "सुधर गया परिवेश" (चर्चा अंक-3795) पर भी होगी।
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स्वतन्त्रता दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
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सुंदर प्रस्तुति
ReplyDeleteस्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं
ReplyDeleteहार्दिक शुभकामनाएं।
ReplyDeleteजय हिन्द।