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Showing posts from August, 2022

टसन

 वो गर्दिशों के साये जो सफर-ए-जिंदगी ने पाये, सिकवा करें भी तो अब बेफिजूल करें काहे, सिर्फ़ इतनी सी अपनी  नाकामयाबी थी हाये,  जवानी मे ही अपना  जनाजा न उठा पाये....

टीस....

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अक्सर  ,  गम़ सदा ही मुखर रहे,   खुशियों के राज मे, फिर सिमट गये ख्वाब सारे, उम्र की दराज़ मे।

बादल फटे पहाड पर...

  पहाड़ों की खुशनुमा,  घुमावदार सडक किनारे, ख्वाब,ख्वाहिश व लग्न का  मसाला मिलाकर, 'तमन्ना' राजमिस्त्री व 'मुस्कान'  मजदूरों के सहयोग से,  उसने वो जो घर बनाया था कभी, सुना है कि आज, उस घर पर इंद्रदेव  इतने मुग्ध हुए कि उन्होंने  बादलों से जाकर कहा कि फटो  और उस मकां को बहाकर  मेरे पास ले आओ।