टसन
वो गर्दिशों के साये जो सफर-ए-जिंदगी ने पाये, सिकवा करें भी तो अब बेफिजूल करें काहे, सिर्फ़ इतनी सी अपनी नाकामयाबी थी हाये, जवानी मे ही अपना जनाजा न उठा पाये....
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !