टसन

 वो गर्दिशों के साये जो

सफर-ए-जिंदगी ने पाये,

सिकवा करें भी तो अब

बेफिजूल करें काहे,

सिर्फ़ इतनी सी अपनी 

नाकामयाबी थी हाये, 

जवानी मे ही अपना 

जनाजा न उठा पाये....

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