Posts

Showing posts from April, 2011

प्रवाहहीन रुग्ण-मानसिकता के शिकार लोग !

Image
बहुत दिनों बाद किसी तरह आज लिखने का मूड बना पाया हूँ, पेश है एक प्रस्तुति ;  आखिरकार प्रिंस विलियम और केट मिड्लटन की शाही शादी का भोज डकारने के बाद दुनियाभर के मीडिया और गतिहीन रुग्ण मानसिकता के शिकार विश्वभर के तमाम लोगो द्वारा पैदा किया गया एक अजीवो-गरीब वातावरण अब जाकर कुछ ठंडा पड़ा है ! किन्तु एक डर अभी भी बना हुआ है कि हो सकता है कि शाही दम्पति सुहागरात मनाने हेतु अपने पुराने औपनिवेश के राजमहलों को ही प्राथमिकता दे, अगर ऐसा हुआ तो इस पश्चिमी विक्षोभ के कारण बने हवा के कम दबाव के अभी और कुछ दिन तक चलने की आशंका है !  इंसानियत के नाते कम ( क्योंकि इंसानियत के नाते तो हम कितनो को ऐसे मौकों पर अपनी शुभकामनाये देते है?) और इनके एक भूतपूर्व गुलाम का खून होने के नाते, मैं भी अपना यह कर्तव्य समझता हूँ कि इस शाही नव-दम्पति को इस सुअवसर पर अपनी शुभकामनाये प्रेषित करू ! साथ ही रगो में छुपे महीन गुलाम-कण कहीं न कहीं, मन के किसी कोने में यह आशंका भी तो पैदा करते रहते है कि मैं कहीं इनके लिए कुछ गलत लिख गया, या मैंने अपने गुलाम-धर्म का पा...

दोगलापन !

Image
मलिंगा, विश्व कप फ़ाइनल मैच से पहले और मैच के बाद; वाह भई, शाहिद अफ्रीदी, तेरा भी ईमान डोल गया, यहाँ आकर झूठ बोला, वहाँ जाके तू सच बोल गया ! देख,कितना गिरा देती है इंसान को, नीयत डोलकर, बीसियों झूठ बोलने पड़ते है, फिर एक झूठ बोलकर ! मुह लगाते न तुम जैसों को, गर हम बड़े दिलवाले होते, न असुर मूंग दलता छाती, न राज करते हम पर खोते ! सरे-राह मगर क्यों तू , अपना सड़ा मुह खोल गया, यहाँ आकर झूठ बोला, वहाँ जाके सच बोल गया ! चित्र  एक  मेल  से  मिला !  

अप्रैल फूल !

गिरह बांधी है मिसरे की, मतले से मक्ते तक दर्द ने, तुम कहो न कहो,खुद बात कह दी चेहरे की जर्द ने। पतझड़ में होता पत्ता-पत्ता, डाली से खफा क्यों है, कोंपल पैदा कर दिए है, दरख्तों पर जमी गर्द ने। बुलंदियां पाने की चाहत में, तहजीब त्याग दी , गिराया कहाँ तक, हसरत-ए-दीदार की नबर्द ने। हासिल न कुछ अब जिस्म पर से पर्दा हटाने से,  णवत्ता तो बता दी है  प्रतिरूप नग्न-ए-अर्द्ध ने। हर दिन तबसे 'फूल' ही नजर आता है 'परचेत', पर्दा, बुर्का पहनना, शुरू कर दिया जबसे मर्द ने।   ..