Tuesday, April 28, 2026

कुपत

तुम्हें पाने की चाह में मुद्दतों बैठे रहे

हम, तुम्हारे बाप के पास,

घंटों पैर दबाए मगर क्या मजाल कि 

बुड्ढे को हुआ हो जरा भी एहसास।


Saturday, April 25, 2026

Yकीं

 रात गहरी बहुत है मगर, 

यकीं रखो, हम सोएंगे नहीं।

तूम रुलाने की जितनी भी कोशिश कर लो, 

रोएंगे नहीं,

बेदना के पार्क मे सन्नाटे संग 

खामोशी भी बैठी है 'परचेत',

इसलिए किसी के बहकावे में आकर, 

आपा खोएंगे नहीं।


Monday, April 20, 2026

बोल संस्करण !

हमने तो मरने को नहीं कहा था,

अरे वो, हमें पत्थर दिल कहने वालों,

जो पास है तुम्हारे उसी पे जी लेते,

मुफलिसीतंगदिली मे जीने वालों ।


बस, मेरे साथ सिर्फ इक मेरी गिला़ और

तुम्हारे संग तमाम सिकवों का काफ़िला,

मैं अभिभूत और ऐतबार पराजित, 'परचेत',

यकीं रख, लम्बा न चल पायेगा ये सिलसिला।


सिसकियां आई, हिस्कियां आई और पराज भी आए हैं,

देहलीज पे तेरी, युवा आए और उम्रदराज भी आए हैं,

अरे वो, हुस्न की मलिका, नागवार है इतराना तेरा,

उम्र दराजी के तजुर्बे  में हमने  तो उन्हें भी देखा है,  

 कबूतर के चेहरे मे मु़डेरी पर जो बाज आए हैं।


जो आज आनी चाहिए थी, वो तुम्हें आज आती नहीं,

खुद को हुश्न की मलिका बताते हुए लाज आती  नहीं,

हमने तो, तुम्हारे हुस्न की बस खैर मांगी थी, ऐ दोस्त!

जो जवानी में न आ सके, वो उम्र दराज आती नही।


न निशां पड़ते, न ही दाग होते,

तले जिसके अंधेरा न होता, 

ऐ काश! कि हम वो चराग होते,

हम कहते, छुप लो बनकर प्यार

हमारे इस सूने से दिल में,

छुप लेते,अगर जो तुम राग होते।


 

Sunday, April 19, 2026

सवाल

किस राह मे गिर गया, अबे 'परचेत'  साले!

फूल था और राह तूने अपनी कांटों की चुनी!

Tuesday, April 14, 2026

कबाब में हड्डी

अबे, पहले तो ये बता तू है कौन?

 तुम जैसों के मुंह लगना मेरा चस्का नहीं,

मेरी तो बीवी से भी बिगड़ी पड़ी है,

चल हट, मुझे सम्हालना तेरे बस का नहीं।


Monday, April 13, 2026

श्रद्धांजलि!

वो बिन वजह हंसना तेरा, 

वो बिन वजह रोना तेरा,

जिंदगी और कुछ भी नहीं,

तेरी -मेरी कहानी है। 

इक प्यार का नगमा....

#आशाभोंसलेविनम्रशर्द्दाजली!

बंदिशें ।


मायके ठहरने का वक्त बिटिया जानती है, ज्यादा न रुक पाएगी,

हेमंत ऋतु भी आई, कल शिशिर भी वसंत संग चली जाएगी।

Sunday, April 12, 2026

बताएं भी किसे?

 बेरुखी, खामोशी, यादों का बोझ,

फेहरिस्त लम्बी है इस  तन्हाई की,

अब क्या? उम्र कट गई 'परचेत' , 

राह तकते-तकते इक हरजाई की।

Saturday, April 11, 2026

पुरानी यादें।

भले ही वो हैंगओवर मेरे  लिए कुछ ही पल का था,

नशा मेरे प्यार का मगर, तीखा नहीं हल्का था,

क्या बताऊं किस कदर उस नशे मे मैं खो गया,

नशा जो पलभर के वास्ते तेरी आंखों से छलका था।

Friday, April 10, 2026

कुदरत













परिंदों ने घर बसाया, बच्चों संग फुर हुए,

निशानियां बसावट की मैं देख पाया था,

अपने छोटे से आशियां में उनके लिए,

जो मैंने भी इक छोटा सा नीड़ बनाया था।




Thursday, April 9, 2026

बंदिशें अपनी।


रातें अक्सर ही मुझसे सवाल किया करती हैं, 

और एक मैं हूं कि उनका जबाब ही नहीं देता,

कभी नयन थकते थे, अब कदम थकनें लगे हैं,

और कितना चल पाऊंगा, मैं हिसाब ही नहीं देता।


जज़्बात ऐसे लगने लगे हैं  मानो ये जज़्बाती नहीं,

जमाने की हसरतें और आदतें हैं जो जाती नहीं,

अधजगी नीदं मे जुबां लगे है कुछ पढने को आतुर,

और मैं हूं कि उसे पढ़ने को किताब ही नहीं देता।



अनियमित नींदचर्या, स्लीपिंग डिसआर्डर कह लो,

दर्द की कोई सीमा नहीं जितना सह सको, सह लो,

डगमगाते कदम कहते हैं कि बहक जाने दो हमें भी,

मगर 'परचेत' मौका-ए-बहकना ख्वाब ही नहीं देता।













Saturday, April 4, 2026

सलाह

तू खुद ही से इकबार रूबरू तो हो जा,

फिर जो कहना है, उसे आलेख लेना,

अरे वो, कश्ती के मुसाफिर, उतरने से पहले,

एकबार समन्दर तो जाकर देख लेना।

आरज़ू

जो किसी के भी दिल में नहीं बसता हो, उसे तू अपने दिल में ऐसे न  बसाया कर,  इतनी सी आरज़ू है तुझसे मेरी 'परचेत', अपना ग़म लेके इधर-उधर...