Saturday, April 4, 2026

सलाह

तू खुद ही से इकबार रूबरू तो हो जा,

फिर जो कहना है, उसे आलेख लेना,

अरे वो, कश्ती के मुसाफिर, उतरने से पहले,

एकबार समन्दर तो जाकर देख लेना।

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आरज़ू

जो किसी के भी दिल में नहीं बसता हो, उसे तू अपने दिल में ऐसे न  बसाया कर,  इतनी सी आरज़ू है तुझसे मेरी 'परचेत', अपना ग़म लेके इधर-उधर...