बेरुखी, खामोशी, यादों का बोझ,
फेहरिस्त लम्बी है इस तन्हाई की,
अब क्या? उम्र कट गई 'परचेत' ,
राह तकते-तकते इक हरजाई की।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
बेरुखी, खामोशी, यादों का बोझ, फेहरिस्त लम्बी है इस तन्हाई की, अब क्या? उम्र कट गई 'परचेत' , राह तकते-तकते इक हरजाई की।
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