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Showing posts from May, 2010

सबके सब बिन पैंदे के लोटे हो गए है !

आज तुम्हारे वतन में, अच्छे लोगो के टोटे हैं, पैंदे सबके सब घिस गये, बिन पैंदे के लोटे हैं,  कोई लल्लू बनके लुडके,कोई चिकना मुलायम, साम्यनिर्धन हिताषियों के तो, कर्म ही खोटे हैं। शोषित की तो यहां पर, 'माया' ही निराली है, धन लोभियों के दिल सफ़ेद, काया काली है, अनाज उगाने वाले, हैं कुपोषण के शिकार, चारा, तोप खाने वाले, गैडे की भांति मोटे हैं। जनप्रतिनिधि,सिपैसलार व्यस्त चीर हरण में, चाटुकार लमलेट हैं, 'पास्तामाता' के चरण में, उल्लू एकदम ही सीधे हुए,तलवे चाट चाटकर, घर व उदर तो इनके बड़े हो गए, दिल छोटे हैं। फतवे बेचते, धर्म की भट्टी पे आग तापने वाले, एक और बाबरी ढूढ़ रहे, रामराग अलापने वाले, बुद्दिजीबी युवा के लिए, जीवन प्रतियोगिता है, हकदार का हक़ मारने को, रिजर्वेशन कोटे है। गांधी तुम्हारे वतन में, अच्छे लोगो के टोटे हैं, पैंदे सबके सब घिस गये, बिन पैंदे के लोटे हैं।

क्या इसे माओवादी और नक्सली कृत्य तक ही समेट लेना उचित होगा ?

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आज तडके हावडा -कुर्ला लोकमान्य तिलक ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस, जोकि महाराष्ट्रा जा रही थी, के १३ डिब्बे आतंकवादियों द्वारा जगराम से १३५ किलोमीटर दूर खेमसोली और सर्दिया रेलवे स्टेशनों के बीच तडके १:३० बजे रेल पटरी पर किये गए ब्लास्ट की वजह से दुर्घटनाग्रस्त हो गए, जिसमे अपुष्ट ख़बरों के मुताविक अब तक ७० से अधिक यात्रियों के मारे जाने और करीब २०० के घायल होने की खबर है! इस घटना का एक दुखद पहलू यह भी रहा कि १३ डिब्बों में से ५ डिब्बे बगल वाली उस पटरी पर गिर गए जिस पर एक मालगाड़ी आ रही थी, और फिर वह भी इन डिब्बो से भिड गई! हालांकि इस दुर्घटना की जिम्मेदारी पीसीपीए नाम के एक मावो समर्थित गुट ने घटनास्थल पर दो बैनर छोड़कर ली है, मगर मैं समझता हूँ कि इस घृणित कार्यवाही को इतने हलके में लेना उचित नही होगा! 'हलके में लेना' शब्द इसलिए इस्तेमाल किया है क्योंकि नक्सली और माओवादी घटनाएं तो हमारे सरकार के लिए हल्की-फुल्की बाते ही बनकर रह गई है ! एक-विभाग किसी दूसरे विभाग के ऊपर दोष मड देगा, प्रधानमंत्री जी और रेलमंत्री जी दुर्घटना पर खेद व्यक्त कर लाख पचास हजार का मुआवजा लोगो का मुह बं...

हकीकत-ए-शहंशाह !

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आज सुबह मेल चेक कर रहा था तो इस मेल पर भी नजर गई ! सोचा, थोडा इसमें तोड़-फोड़कर आपका भी मनोरजन किया जाये ! तो लीजिये, परिवार संग (सिर्फ पति-पत्नी ) मिल-बैठकर एन्जॉय कीजिये ; हो सकता है कि आप दुनिया के राजा हों ! ये भी हो सकता है कि आप दुनिया में सबसे खतरनाक किस्म के प्राणी हों ! या दुनिया वालों के सामने जबरदस्ती शेर बनने की कोशिश करते हों ! होसकता है कि आप आजाद किस्म के मनमौजी हों ! हो सकता है कि आप दूसरों को अपनी मुट्ठी में रख उनपर हुक्म चलाते हो ! हो सकता है कि दूसरे लोग आपको बहुत प्यार करते हों ! ये भी संभव है कि आप सज्जन किस्म के हों ! या फिर एक खतरनाक हत्यारे हो ! लेकिन सच्चाई यही है कि . . . . . . . . . . . . . जब आप अपने घर में होते है तो .... . . . . . .. . . . . . .. . . . . . . . . . . बीबी-बीबी होती है ...Does not matter Who the Hell you are ...

२२ साल पुराना गौमुख यात्रा वृतांत !

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 गौमुख के आगे की तस्वीर ( मैं और विपिन सोनी ) सामने वह बर्फ का ग्लेशियर है  गंगोत्री मंदिर के ठीक आगे सीडियों में बैठे हम लोग रास्ते में सुस्ताते हुए गौमुख के रास्ते में श्रीनिवास , मैं और सोनी मानचित्र पर किल्क कीजिये अभी चंद रोज पहले मैंने एक लेख ज्योतिषी और भविष्य बाणी से सम्बंधित लिखा था! और जिसमे मैंने गलती से यह दावा कर दिया था कि मैं लगभग सभी विषयों पर लिख चुका हूँ ! लेकिन बाद में घुमक्कड़ी के चैम्पियन , मस्तमौला श्री नीरज जाट जी की एक टिपण्णी प्राप्त हुई , जिसमे उन्होंने मेरे दावे को यह कहकर ख़ारिज कर दिया था कि आपने घुमक्कड़ी पर कुछ भी नहीं लिखा! बाद में मैंने भी रिअलाइज किया कि वास्तव में अभी बहुत से ऐसे क्षेत्र है, जिनको हमने छुआ ही नहीं ! नीरज जी से वादे के हिसाब से आज एक पोस्ट घुमक्कड़ी पर लगा रहा हूँ ! चूँकि यह करीब २२ साल पुरानी बात है, और एल्बम को टटोलने पर जो फोटो मेरे हाथ लगे, उन्हें यहाँ लगा रहा हूँ, हालांकि तस्वीरे पुरानी होने की वजह और कैमरे की गुणवत्ता के हिसाब से बहुत साफ़ नहीं है! फिर भी उम्मीद करता हूँ कि आप थो...

"26/11 के अपराधी बनाम मलियाना हाशिमपुरा के दोषी" - क्या यही उच्च सोच है ?

एक तरफ २६/११ का मुंबई हमला, जिसे एक विदेशी मुल्क ने बड़े ही सुनियोजित ढंग से इस देश पर किया था! और एक तरफ मई १९८७ का मेरठ साम्प्रदायिक दंगा, जिसकी शुरुआत कैसे हुई थी, उसका वर्णन उन दंगो के दौरान दी गई रिपोर्टो में दी गई थी, चंद शुरुआती लाइने आप खुद पढ़ लीजिये ; "The Beginning of the Tragedy Large scale rioting began in the early hours of May 19, 1987 and the maximum damage was done just in course of a few hours. On that fateful morning, thousands of people, already incited by inflammatory speeches and slogans broadcast over public address system in mosques, barricaded the national highway, burnt 14 factories, hundreds of shops and houses, vehicles, and petrol pump, and cast scores of people into flames. The sporadic Hindu reaction was revengeful. Meerut continued in flames between May 19 and May 22, with murder, loot, explosions, and wild rumours further fuelling violence. " उपरोक्त चंद लाइनों से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि उस साम्प्रदायिक दंगे की जड़ कहाँ थी? मैं व्यक्तिगत तौर...

कहाँ ले जाना चाहते हो देश को ?

आपको नहीं लगता कि हमारे प्रधानमंत्री के पास अब बोलने के लिए भी कुछ नहीं बचा? जो इंसान खुद दूसरों की कृपा पर निर्भर हो , वह देश को क्या ख़ाक आत्मनिर्भर बनाने के सपने दिखाएगा? वे कहते है कि मैं तो रिटायर नहीं होना चाहता, मगर यदि राहुल जी आना चाहेंगे तो में रिटायर हो जाउंगा ! आत्मसम्मान तो मानो जैसे इन्होने कहीं पोटली में बांधकर किसी गहरे सूखे कुंए में डाल दिया हो! ईमानदारी का चोला ओढने वाला कोई शख्स अगर अपने उस मंत्री का बचाव कर रहा हो, जिसने सीधे-सीधे देश को ६० हजार करोड़ का चूना लगा दिया हो, तो वह कैसा ईमानदार ? अगर देखा जाए तो यह जो गठबंधन सरकारों का दौर इस लोकतंत्र में आया है, वह राजनीति में भ्रष्ट लोगो के लिए एक वरदान की तरह है! राजनेता का पिछले सत्र में कैसा भी चरित्र और व्यावहारिक रिकॉर्ड रहा हो, बस वह दो-चार अपने गुंडे-मवालियों के साथ जीतकर सदन में पहुच जाए, उसके बाद सत्ता की मलाई उसके मुह पर होती है! किसी की भी कोई प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं, हर कोई मजबूरी और एक दूसरे पर दोषारोपण करता है! और कौंग्रेस जैसी पार्टिया ऐसे मौकों पर गठबंधन सरकारों की मजबूरियों की दुहाई देकर वह सब कर रही...

यूं भी बावफा होते है लोग !

ये दिल निसार करके जाना  कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था  कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है  खुदा की  ये जज्बा , इल्म न था कि  वफ़ा की कस्मे खाने वाले,  इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का  ऐसा आपसी  देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए,  मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

मेरी भविष्यबाणी जिसके शत-प्रतिशत सच निकलने की उम्मीद है !

अगस्त २००८ के आस-पास मैंने ब्लॉग-जगत में कदम रखा था! तबसे ब्लोगर मित्रों और सम्माननीय पाठकों की प्रेरणा पाकर मैंने एक लघु उपन्यास, ४१ कहानिया , करीब १७५ कवितायेँ, गजल , करीब इतने ही आलेख भिन्न-भिन्न विषयों पर और दो-चार कार्टून ( हालांकि उसमे ग्राफिक्स निम्न स्तर की थी) लिखे ! यानि कहने का मतलब यह है कि लगभग हर विषय को छुआ ! काफी दिनों से सोच रहा था कि मुझसे एक विषय छूट गया है, और वह है भविष्य-बाणी और ज्योतिषी ! यहाँ ब्लॉग जगत पर बहुत से ज्योतिषी के ज्ञांता, जिनमे कुछ डाक्टर लोग भी शामिल है, समय-समय पर ज्योतिषी विषय के आधार पर भविष्यबाणिया करते रहते हैं ! हाल ही में एक डाक्टर साहब ने तो इस बारे में कुछ दावे भी किये कि उनकी भविष्यबाणी सही निकली ! तो मैंने भी सोचा कि क्यों न मैं भी इस क्षेत्र मैं अपना हाथ आजमाऊ , वैसे भी जातिगत आधार पर मैं आजकल का कलयुगी पंडत यानि ब्राह्मण हूँ! तो चलिए आज मैं भी एक ऐसी भविष्यबाणी करने जा रहा हूँ , जो देख लेना शत-प्रतिशत सच निकलेगी! नहीं निकली तो मैं अपनी मूछे थोड़ा-थोड़ा कटवा दूंगा ! मेरी भविष्यबाणी महंगाई से जूझते लोगो के लिए है और जो इस प्रकार से है; नक...

ये नेता प्रजाति का प्राणी हर देश में एक जैसा ही है !

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नेता प्रजाति का प्राणी हर देश में एक जैसा ही होता है यह बात एक बार फिर से सिद्ध कर दिखाई है, थाईलैंड में मौजूदा प्रधानमंत्री अभिसित वेज्जाजिवा की सरकार के विरुद्ध पिछले मार्च से 'रेड सर्ट' आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे वहाँ के विपक्षी नेतावों ने। यह आन्दोलन सही था अथवा गलत, इस बारे में मैं कुछ नहीं कहूंगा । हाँ, इतना जरूर बता दूं कि इस आन्दोलन में हिस्सा ले रहे ज्यादातर आन्दोलनकारी वहाँ के किसान और शहरी तबके के गरीब लोग थे। मध्य मार्च से शुरू हुआ यह आन्दोलन थाईलैंड को अराजकता के दौर में धकेल चुका है, और अब तक करीब ७५ लोग इसमें मारे जा चुके है, व करीब १८०० लोग घायल हुए है। जिनमे से ४५ लोग सिर्फ सैन्य बलों के साथ झडपों में मारे गए। हाल ही में इन विपक्षी आन्दोलनकारी नेताओ ने सरकार की वार्ता की पहल को ठुकरा दिया था, आन्दोलनकारी लोगो ने भी मौत को गले लगाने, किन्तु आन्दोलन ख़त्म न करने का संकल्प लिया था । परिणाम स्वरुप पिछले दो दिनों से थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में सेना ने बल प्रयोग कर इन आन्दोलनकारियों को खदेड़ दिया। जिसमे ७ लोग मारे गए, उनमे से एक इटली का फोटोग्राफर भी था। हैरानी की बा...

संयम बरतने की आड़ जब वैचारिक नपुंसकता की हद को पार कर जाए !

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आपको याद होगा कि इस साल की शुरुआत के पहले दिन, यानि १ जनवरी, २०१० को हमारे गृहमंत्री ने पाकिस्तान को यह नसीहत दी थी; " नयी दिल्ली १ जनवरी, 2010: केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने पाकिस्तान से मांग की कि वह अपनी जमीन पर संचालित होने वाले आतंकवादी ढांचों को नेस्तानाबूद करे. श्री चिदंबरम ने यहां कहा कि पाकिस्तान आतंकवादी ढांचो को खत्म करे.......... पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचों की मौजूदगी को लेकर चिंता जताते हुए गृहमंत्री ने मांग की कि इन ढांचों को तत्काल नेस्तानाबूद किया जाना चाहिए." इस खबर से यह तो स्पष्ट होता है कि दूसरों को नसीहत देना कितना आसान काम है और हम उसमे कितने माहिर है।लेकिन जब उन नसीहतों को अपने पर लागू करने की चुनौती आती है तो हम नैतिक मूल्यों की बात करने लगते है । ऐसा भी नहीं कि ये नसीहते हमारे शीर्षस्थ नेतावों ने पहली बार ही दी हो, इतिहास गवाह है कि उन्हें जब-जब मौक़ा मिला, तालिवान और पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर प्रान्तों में फैले कबायली सरदारों के आतंकवादी संगठनों पर भी उन्होंने जमकर बयानबाजी की। और दूसरी तरफ इनके अपने देश में क्या हो रहा है, माओवादी और नक्सली आतंक...

छिटपुट !

आज के इस अवसादपूर्ण वातावरण मे इन्सान की रोजमर्रा की जिन्दगी एक मशीन बन कर रह गई है। और जिसकी रोज की दिनचर्या मे ज्यादातर लम्हे इन्सान को ढेर सारी उलझनों मे ही उलझाकर तनावग्रस्त बनाये रखते है। मगर साथ ही कभी-कभी इन्सान के जीवन मे उन कुछ खुशहाल पलों का भी एक भिन्न तरह का योगदान रहता है, जो उसे तनाव तो देते है मगर खुद की चिन्ता-फिकर से थोडा हटकर, देश और दुनिया के बारे मे भी सोचने का अवसर प्रदान करते है। जैसा कि विदित है कि आज रविवार है, यानि छुट्टी का दिन। और मै समझता कि मानव सभ्यता के विकास का वह दौर शायद सबसे विद्धतापूर्ण दौर रहा होगा, जिसमे निति निर्धारको और निर्णयकर्ताओं ने यह दूरदर्शितापूर्ण बात इन्सान के जीवन के लिये तय की कि हर इन्सान को साप्ताहिक अवकाश लेना/देना जरूरी है। इन्सान इत्मिनान से फुर्सत के पलों मे अपने-अपने स्वभाव, शारीरिक गुणों और मानसिक क्षमताओ के बलबूते भिन्न-भिन्न कल्पनाओं की उडाने उड्ता है। ये काल्पनिक उडाने हमारे आस-पास घटित हो रहे घटनाक्रम पर बहुत कुछ निर्भर करती है। ऐसे ही कुछ विचार फुर्सत के चन्द लम्हों मे मुझे भी अक्सर उद्ववेलित करते रहते है, जिनमे से कुछ को ...

कार्टून कुछ कहता है !

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खबर : गडकरी ने लालू और मुलायम को सोनिया का कुत्ता कहा! पापा ये बीजेपी वाले भी न... हमारी इज्जत का ज़रा भी ख्याल नहीं रखते !

कार्टून कुछ बोलता है !

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खबर: देवबंद ने दो नए फतवे जारी किये, एक के अनुसार महिलाओ को काम पर भी पर्दा करना होगा, और दूसरा मर्द बैंक की नौकरी नहीं कर सकते ! अरे मिंया , जरा एक बढ़िया क्वैलिटी का दिखाना......... मनमोहन जी को गिफ्ट देना है उनकी.... छठी वर्षगाँठ पर !! xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx "ब्लोगर मीट" मेरे पास फतवा है, तेरे पास क्या है ? .............................................. मेरे पास खाप है ! छवि गूगल से साभार

लव- जेहाद में नया ट्विस्ट लाएगा इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह महत्वपूर्ण निर्णय !

लव-जेहाद की मानसिकता के लोगो के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह निर्णय अभी भले ही उतना अहम् न लगता हो, क्योंकि उनका मकसद तो सिर्फ दूसरे धर्म की लड़कियों को बर्बाद करना मात्र है , मगर इस निर्णय के बाद उन गैर-इस्लामिक लड़कियों और महिलाओ को सचेत हो जाना चाहिए, जो भावनाओं में बहकर अपने लिए मुसीबते खडी करने से नहीं हिचकिचाती। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी मुस्लिम व्यक्ति की दूसरे धर्म की महिला से शादी को अमान्य और इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ माना जाएगा अगर शादी से पहले महिला ने धर्म परिवर्तन नहीं किया है। न्यायाधीश विनोद प्रसाद तथा राजेश चंद्रा की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि एक मुस्लिम व्यक्ति की दूसरे धर्म की महिला से शादी अमान्य मानी जाएगी और पवित्र कुरान के खिलाफ होगी यदि वह उसका निकाह से पूर्व धर्मांतरण कराने में विफल रहता है। खंडपीठ ने कहा कि एक मुस्लिम व्यक्ति का पुन: विवाह अवैध माना जायेगा, यदि वह अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना छोड़ देता है और उससे पैदा हुए बच्चों का न्यायोचित तरीके से भरण़ पोषण करने में विफल रहता है। अदालत ने सोमवार को इलाहाबाद निवासी दिलबर हबीब स...

कार्टून कुछ बोलता है !

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तुम्हे मालूम है कि देश से अगर एक भला और ईमानदार इंसान चला जाए तो क्या होगा ? जी सर , एक सौ पच्चीस करोड़ लोगो का भला हो जाएगा !!!

अभी तुम्हे तो बहुत दूर तक चलना है !

आज उदित है तपस,  तुम्हे  जलना है, सांझ दस्तक देगी , तुम्हे  ढलना है।   आसान न सही जोखिमी जिन्दगी, पहाड़ सा डटना, हिम सा गलना है। छीने न  कोई  पवन से खुसबूओ को, चट्टान बन तूफानों का रुख बदलना है। थककर रोक लो कदम, मुमकिन नहीं, अभी तुम्हे तो बहुत दूर तक चलना है।  

आई.एम्.ऍफ़ की ग्रीस (यूनान) को खैरात------- संस्थागत नश्लवाद की फिर जीत !

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अभी कल परसों, यह खबर तो आप लोगो ने भी पढी-सुनी होगी कि यूरोपीय संघ के वित्त मंत्रियों के विशेष सम्मेलन में ग्रीस को आर्थिक संकट से उबारने के लिए कम से कम 5 खरब यूरो (करीब ३१० खरब रूपये ) की राहत राशि दिए जाने पर सहमति कायम हुई है। ताकि ग्रीस का ऋण संकट न बढ़े और यूरो स्थिर रहे। साथ ही कल इस खबर से पूँजी बाजारों में भी नकली चमक आ गई थी कि अन्तराष्ट्रीय मुद्रा-कोष भी ग्रीस को २५० खरब यूरो (यानी करीब १५५ खरब रुपये ) खैरात (बेल-आउट पैकेज) के तौर पर देगा। जैसा कि आपलोग जानते ही होंगे कि अपनी अतिव्ययी जीवन शैली की वजह से ग्रीस काफी समय से भारी वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। और अभी कुछ समय पहले तो सरकार द्वारा इस वित्तीय संकट को कम करने के लिए मितव्ययता (ऑस्टेरिटी) लाने और टैक्स लगाने तथा नागरिकों को दी जाने वाली अनेको रियायतों और छूटों में कमी करने की घोषणा की तो वहाँ हिंसक दंगे भड़क उठे थे, और वहाँ के समाजवादियों ने एक बैंक पर धावा बोल दिया था , जिसमे अनेक लोगो को जान से भी हाथ धोना पडा था। सवाल मेरा यह है कि हमारी ये अन्तराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाए किसी गरीब देश को तो ऋण देते वक्त उसे बीसिय...

कूटनीतिक तौर पर देखा जाए तो सबसे सफल राष्ट्र कहा जा सकता है पाकिस्तान को !

पाकिस्तान एक नाकाम राष्ट्र है, पाकिस्तान एक अस्थिर और असफल राष्ट्र है...पाकिस्तान एक आतंकवादी राष्ट्र है, पाकिस्तान की नीव ही घृणा की बुनियाद पर पडी है, पाकिस्तान का कोई ईमान नहीं है, इत्यादि, इत्यादि, ऐसी बाते तो हम लोग अक्सर बोल, सुन लिया करते है, मगर यह बात सुनने में बड़ी अटपटी लगेगी, अगर मैं कहूँ कि पाकिस्तान कूटनीतिक तौर पर दुनिया का एक सबसे सफल राष्ट्र है। यूँ तो पाकिस्तानियों ने "मौके का फ़ायदा उठाना" वाला गुरुमंत्र प्राचीन मुग़ल आक्रमणकारियों से ही सीख लिया था, किन्तु अलग पाकिस्तान राष्ट्र के बन जाने के बाद उन्होंने इस कहावत को यथार्थ के धरातल पर बखूबी उतारा। आज हम जितना मर्जी पाकिस्तान को बुरा-भला कहे, लेकिन सच्चाई यही है कि पाकिस्तान ने अपने जीने का जुगाड़ बखूबी ढूंढ लिया है। ज़रा सोचिये , क्या था पाकिस्तान के पास ऐसा जिसकी बदौलत वह दुनिया के अग्रणी राष्ट्रों के सामने खडा हो पाता? वह आज भले ही हर दूसरे हफ्ते भीख का कटोरा लेकर पश्चमी राष्ट्रों के आगे हाथ फैलाता नजर आता हो, मगर हम यह भूल जाते है कि भीख मांगना भी एक कला है, और हर भिखारी उसे पाने में सफल नहीं हो पाता। उसके ...

एक गजल- सहमे गुल

तज पुरा-रीतियां ज़माना निकला,नए-नए अभियानों पर, बदल गई है अब दुनिया, सभ्यता के दरमियानों पर ॥ न स्वयम्बर की दरकार रही  अब , न युवराजों की जंग, जंक खाती जा रही तलवारें भी ,पडे-पडे मयानों पर ॥ क्या पूनम,क्या अमावस,क्या शुक्ल क्या कृष्ण पक्ष, सूरज ग्रहण लगा रहे है नित,चांद के आशियानों पर ॥ उत्कंठा के चरम, उजाड़ रहा खुद माली ही गुलशन को , गुल सहमा ऐतवार करे कैसे,गुलशन के सयानों पर॥ काबिले भरोसा रहा न कोई,'परचेत' यक़ी करे किस पर, यहां लोग भरोसा करते भी है तो गिरगिट के बयानों पर ॥

कसाब के बहाने कुछ सवाल !

ब्लोगर मित्रों, ब्लोग-जगत के माध्यम से यह मोटी बुद्धि का इन्सान चन्द सवाल इस देश से पूछना चाह्ता है। जैसा कि आप सभी जानते है कि परसों ही मुम्बई की एक स्पेशल अदालत ने २६/११ के एकमात्र जीवित बचे (सरकारी रिकार्ड के मुताविक) पाकिस्तानी दरिन्दे, मुह्म्मद अजमल कसाब को मौत की सजा सुनाई है। जैसा कि आप सभी लोग भी जानते होंगे कि इस महान लोकतंत्र के न्याय कानूनो के मुताविक कोई भी अपराधी तब तक सिर्फ़ उसके द्वारा किये गये अपराध का आरोपी (charged) मात्र कहा जाता है, जब तक कि उसका अपराध साबित न हो जाये, और न्यायालय उसे उस अपराध के लिये दोषी करार न दे। एक बार अदालत का निर्णय आ जाने के बाद वह घोषित (convicted) अपराधी कहलाने लगता है। अब मुख्य मुद्दे पर आता हूं। मान लेते है कि कल तक सरकार की यह चिंता नि:सन्देह जायज थी कि उसे डर था कि कहीं दुशमन पडोसी मुल्क कसाब की सुरक्षा मे सेंध लगाकर इस जांच को प्रभावित करने की कोशिश न करे। इसलिए कसाब की सुरक्षा के नाम पर इस देश के टैक्स दाता की गाढी कमाई के ५० करोड रुपये स्वाह: होना लाज मी था। लेकिन अब न्यायालय मे वह दोषी करार दिया जा चुका है, और उसे सजा-ए-मौत दी जा ...

भई आखिर इंडिया ससुर जी की प्रोपर्टी जो ठहरी, ऊपर से सालो की कृतज्ञंता भी काबिले-तारीफ़ !

उनके लिए हैदराबाद क्रिकेट एसोशियेशन बोले तो साले लोगो की जमात, और जिमखाना बोले तो ससुर जी की प्रोपर्टी ! जी गलत मत समझिये, बिलकुल सही कह रहा हूँ ! कुछ ऐंसा ही मामला है ! जवाईं राजा जब से बिटिया रानी के साथ पाकिस्तान से लौटे है , शहर भर के चाचाससुर और ताऊससुर उनकी खिदमत में कोई गुस्ताखी नहीं होने दे रहे! शहर भर के साले लोग जीजा जी की आवाभगत में अपना सब कुछ न्योछावर करने पर आमदा है! जीजाजी जिस गली का रुख करते है, कृतज्ञं साले लोग उनके स्वागत के लिए वहीं लंबलेट हो जाते है! इन जवाईं राजा पर उनके देश की क्रिकेट एसोशियेशन (पीसीबी ) ने इस वर्ष मार्च में एक साल के लिए बैन लगा दिया था ! लेकिन ससुराल ( हैदराबाद ) आकर जनाव खूब प्रैक्टिस कर रहे है ! कल यानी बुधवार को उन्होंने हैदराबाद क्रिकेट एसोशियेशन की नाक तले जिमखाना में एक घंटे तक प्रेक्टिस की! उनके साथ में उनकी पत्नी और हैदराबाद क्रिकेट एसोशियेशन के पूर्व सचिव वी चामुंडेश्वरनाथ भी थे! आपको याद होगा कि सन २००० में मैचफ़िक्सिंग के आरोपों के बाद इंडियन क्रिकेट बोर्ड द्वारा अजहरुद्दीन पर जीवन पर्यंत बैन लगाए जाने के बाद उन्हें देश और विदेश के कि...

'अपराध उद्योग' को हार्दिक शुभ-कामनाये !

वोये, लख-लख बधाईयाँ तेनु "नेताजी", "भाई", "गुरु", 'उस्ताद" और 'बोस" जी ! अब तो आपके उद्योग के लिए देश की सर्वोच्च न्यायालय की ओर से भी एक और रियायत मिल गई है ! अब देखना चंद हफ़्तों में ही आपकी कम्पनियों के शेयर किन ऊँचाइयों को छूंते है ! यह तो थी इस दिन-दुगने रात-चौगुने फलते-फूलते उद्योग को मेरी तरफ से शुभकामनाये ! मगर साथ ही यह एक गंभीर चिंता का विषय भी है, कि "महा-महिम" ( पता नहीं यह गुलामों वाली भाषा बोलना हम कब बंद करेंगे ) सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय से जिसमे उसने जांच एजेंसियों द्वारा संदिग्ध के नारको टेस्ट और ब्रेन मैपिंग को अवैध करार दिया है, अपराध जगत को एक और निरंकुशता या यूँ कहे कि मुगली घुट्टी मिल गई है! यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि हम हिन्दुस्तानियों में स्वजागृति की हमेशा कमी रही है, और जो बात हम डंडे के बल पर ज्यादा अच्छे ढंग से समझ पाते है, वह प्यार-प्रेम से नहीं समझ पाते ! ( We deserve to be ruled ) और काफी हद तक वो कहावत भी हम पर चरितार्थ होती है " उंगली पकड़कर पौंचा पकड़ना " ! यह मैं भी मानता हूँ कि नारको ट...

वो शख्स !

वो एक वृथा शख्स जो  जिन्दगी से हुआ बोर था , और पैदाइशी कामचोर था , मेहनत करना नहीं चाहता था , और भूखों मरना नहीं चाहता था , हरतरफ था उसने हाथ आजमाया, मगर कहीं भी उसने शकून न पाया, किन्तु भाग्य  में बिजनेस का योग था, देश में फला-फूला  'आईवॉश'  उद्योग था,  अब नाम भले ही उस धंधे का धोखा था,   मगर उसके लिए तो धंधा बड़ा चोखा था,  ज्यूँ ही घुसा उस हाईप्रोफाइल पेशे में  भैया, तुरंत लग गई पार उसकी डगमगाती नैया, बन बैठा इक मकाम का टुक्कड़खोर सदर है, पॉश इलाके के बड़े से बंगले में उसका घर है।  

कसाब, हम और हमारा क़ानून- कुछ सवाल !

कल मैंने कसाब पर एक छोटा सा लेख लिखा था ! और उसमे जो लिखा था वह उस एक आम भारतीय के नजरिये से था, जो यह मानता है कि इस दरिन्दे ने अनेक निर्दोष मासूमों की जिन्दगी छीन ली ! मगर एक दूसरा पहलू भी है, जिसे मैं आज एक समीक्षक के नजरिये से प्रस्तुत करना चाहता हूँ ; जैसा कि आप सभी को मालूम है कि २६ नवम्बर, २००८ को दस पाकिस्तानियों ने इस देश की व्यावसायिक राजधानी कहे जाने वाले महानगर, मुंबई पर एक बड़े ही सुनियोजित ढंग से धावा बोल दिया था और सरकारी आंकड़ों के मुताविक १६६ बेगुनाहों का क़त्ल कर दिया था, जिनमे से अनेक पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान भी थे ! उसके बाद जैसा कि अमूमन होता है, हमने और हमारे बिना रीढ़ के नेतावों ने कुछ समय तक काफी हुंकारें भरी, भभकिया दी अपने पड़ोसी दुश्मन मुल्क को ! और उसके बाद....?? सब पहले जैसा........!! और करने बैठ गए अगले हमले का इन्तजार ! खैर, इन बातों को छोडिये, लेकिन अगर आपको याद हो तो हमारी जांच एजेंसियों, हमारे शीर्षस्थ नेतावो, और यहाँ तक कि अमेरिकी जांच और खुफिया एजेंसियों ने कई बार यह बात स्पष्ट की है कि इस पूरे प्रकरण में पाकिस्तान में बैठे आतंकी आंकाओ के अलावा पा...

अगर आज कसाब को मृत्यु दंड मिल भी जाता है तो भी क्या...?

२६/११ के मुंबई हमलों की जांच कर रही ट्रायल कोर्ट के स्पेशल न्यायाधीश श्री एम् एल तहल्यानी, उस दरिन्दे कसाब को डेड साल चले न्यायिक उठापटक के बाद आज अपना फैसला सुनायेंगे ! मीडिया में इस बात का बड़ी बेसब्री से इन्तजार किया जा रहा है कि कसाब को क्या सजा मिलती है ! मगर मेरा मानना है कि यह बात ज्यादा महत्व नहीं रखती कि उसे क्या सजा मिलती है ? हमारी न्यायिक जटिलताओं की खिल्ली दुनिया उड़ा चुकी ! कसाब को यह पट्टी किसने पढ़ाई कि तुम नेपाल से भारतीय पुलिस द्वारा पकड़कर लाये जाने की कहानी गड़ो ? इस देश में मौजूद गद्दारों ने ! एक चश्मदीद गवाह माँ, जिसके बेटे से इस दरिन्दे ने पानी पीने को माँगा और फिर उसे गोली मार दी, उस माँ को यह दरिंदा झुठला रहा है, उस मृतक के बच्चों, जिन्होंने बाप को अपने समक्ष मरते देखा, उन्हें यह झुठला रहा है, सी सी टीवी कैमरे को यह झुठला रहा है! मान लीजिये कि उसे मृत्यु दंड ही मिलता है , तो भी क्या कल उसे फांसी पर लटका दिया जाएगा ? अभी इसके ऊपर इतनी अदालते है कि वह वक्त आने से पहले ही दरिंदा कसाब बुड्ढा होकर खुद ही मर जाएगा ! हाँ, अब तक ५० करोड़ से अधिक उस दरिन्दे के पालन-पोषण पर...

अरमां अपने पास जगा।

जीना है तो आस जगा,  दिल में इक अहसास जगा, हर दरिया को तर सकता है,  मन में यह विश्वास जगा। हलक उतरता जाम न हो,  मय कैसे बदनाम न हो, तृप्ति का कोई छोर नहीं है,  पीना है तो प्यास जगा। हमदर्द कोई दिल तोड़ न दे ,  कहीं  राह अकेला छोड़ न  दे , हो हमराही जन्म-जन्म का ,  ये तीरे-जिगर अभिलाष जगा।   छूटे का अफ़सोस न कर,  किस्मत का दोष न कर, मायूसी में  आशाओं के  अरमां अपने पास जगा।