सबके सब बिन पैंदे के लोटे हो गए है !
आज तुम्हारे वतन में, अच्छे लोगो के टोटे हैं, पैंदे सबके सब घिस गये, बिन पैंदे के लोटे हैं, कोई लल्लू बनके लुडके,कोई चिकना मुलायम, साम्यनिर्धन हिताषियों के तो, कर्म ही खोटे हैं। शोषित की तो यहां पर, 'माया' ही निराली है, धन लोभियों के दिल सफ़ेद, काया काली है, अनाज उगाने वाले, हैं कुपोषण के शिकार, चारा, तोप खाने वाले, गैडे की भांति मोटे हैं। जनप्रतिनिधि,सिपैसलार व्यस्त चीर हरण में, चाटुकार लमलेट हैं, 'पास्तामाता' के चरण में, उल्लू एकदम ही सीधे हुए,तलवे चाट चाटकर, घर व उदर तो इनके बड़े हो गए, दिल छोटे हैं। फतवे बेचते, धर्म की भट्टी पे आग तापने वाले, एक और बाबरी ढूढ़ रहे, रामराग अलापने वाले, बुद्दिजीबी युवा के लिए, जीवन प्रतियोगिता है, हकदार का हक़ मारने को, रिजर्वेशन कोटे है। गांधी तुम्हारे वतन में, अच्छे लोगो के टोटे हैं, पैंदे सबके सब घिस गये, बिन पैंदे के लोटे हैं।