Saturday, May 8, 2010

कसाब के बहाने कुछ सवाल !

ब्लोगर मित्रों, ब्लोग-जगत के माध्यम से यह मोटी बुद्धि का इन्सान चन्द सवाल इस देश से पूछना चाह्ता है। जैसा कि आप सभी जानते है कि परसों ही मुम्बई की एक स्पेशल अदालत ने २६/११ के एकमात्र जीवित बचे (सरकारी रिकार्ड के मुताविक) पाकिस्तानी दरिन्दे, मुह्म्मद अजमल कसाब को मौत की सजा सुनाई है। जैसा कि आप सभी लोग भी जानते होंगे कि इस महान लोकतंत्र के न्याय कानूनो के मुताविक कोई भी अपराधी तब तक सिर्फ़ उसके द्वारा किये गये अपराध का आरोपी (charged) मात्र कहा जाता है, जब तक कि उसका अपराध साबित न हो जाये, और न्यायालय उसे उस अपराध के लिये दोषी करार न दे। एक बार अदालत का निर्णय आ जाने के बाद वह घोषित (convicted) अपराधी कहलाने लगता है।

अब मुख्य मुद्दे पर आता हूं। मान लेते है कि कल तक सरकार की यह चिंता नि:सन्देह जायज थी कि उसे डर था कि कहीं दुशमन पडोसी मुल्क कसाब की सुरक्षा मे सेंध लगाकर इस जांच को प्रभावित करने की कोशिश न करे। इसलिए कसाब की सुरक्षा के नाम पर इस देश के टैक्स दाता की गाढी कमाई के ५० करोड रुपये स्वाह: होना लाज मी था। लेकिन अब न्यायालय मे वह दोषी करार दिया जा चुका है, और उसे सजा-ए-मौत दी जा चुकी है। कसाब को जिन्दा पकडने की २.५ करोड प्रतिमाह के हिसाब से अब तक हमने तत्परता से कीमत चुकाई है, मगर कल जब यह बात समाचारों मे सुनी कि महाराष्ट्र सरकार आगे भी कसाब की सुरक्षा मे कोई कोताही नही बरतेगी और इसी उदारता से उस पर खर्च करती रहेगी, तो निश्चित तौर पर कुछ सवाल जहन मे कौंधने स्वाभाविक थे। मुझे चिंता हुई कि यह जो धन इस दरिन्दे पर दोनो हाथों से लुटाया जा रहा है, वह है किसका ? और उसे अब इसतरह उदारता पूर्वक दोनो हाथो से लुटाने का औचित्य क्या रह गया है?

मैं एक सवाल सरकार की हां मे हां मिलाने वाले मीडिया से भी पूछना चाहुंगा कि अब जबकि कसाब मुजरिम घोषित किया जा चुका है। देश और विदेश मे पाकिस्तान के षड्यन्त्र का पर्दाफ़ाश हो चुका है और समूची दुनिया को इस बाबत सन्देश बखूबी पहुंच चुका है, तो इस बात का क्या औचित्य है कि हमारी सरकार उस पर इस तरह आगे भी देश का कीमती धन लुटाती रहे ? उसे भी अफ़्जल गुरु की तरह जेल मे रखा जा सकता है। सर्वप्रथम तो यह बात उठती है कि क्या हमारे देश मे जेलों की सुरक्षा इतनी कमजोर है, जो कसाब को इस तरह की विशेष सुरक्षा दी जा रही है? या सरकार को अपनी जेलों के सुरक्षा तन्त्र पर भरोसा ही नही, या फिर हमे कसाब के नाम पर देश का कीमती धन लुटाने का शौक है ? दूसरा यह कि मान लीजिये यदि आम प्रकार के सुरक्षा तन्त्र के बावजूद भी दुश्मन हमला कर किसी तरह कसाब को मार देता है या फिर अपहरित कर ले जाता है, तो तब भी अब ज्यादा क्या फर्क पडता है? यदि हम यह सोच रहे है कि उसके रहते हम उसके पाकिस्तानी आंकाओं पर दबाव बनाये रखेगे, तो पिछ्ले १७-१८ महिने मे तो ऐसा कुछ भी नही दिखा, जो ये लोग अब कर लेंगे। मुझे तो आशंका यह भी होती है कि कहीं कसाब के बहाने इस महान लोकतांत्रिक देश मे अन्दर ही अन्दर एक और नया आई पी एल तो नही खेला जा रहा ?


14 comments:

  1. सुरक्षा में नये निर्माण हुये, नई खरीद हुई होगी.. फायदा किसका ?? आप समझते नहीं हैं ना....

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  2. पोस्ट में सवाल तो दिखाई ही नही दे रहे हैं!
    फिर भी कमेंट बॉक्स से Show Original Post से पढ़ लिए हैं!

    "मुझे तो आशंका यह भी होती है कि कहीं कसाब के बहाने इस महान लोकतांत्रिक देश मे अन्दर ही अन्दर एक और नया आई पी एल तो नही खेला जा रहा ?"

    आपकी आशंका वाजिब है!

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  3. सर जी पोस्ट का फॉण्ट छोटा हो गया है उसे ठीक कर दें। वैसे मैंने भी शास्त्री जी के बताये मार्ग का अनुसरण करके आपकी पोस्ट पढ़ी और आपके विचारों से पुर्णतः सहमत हूँ की हमारा कीमती धन उन उस सूअर की औलाद पर जाया नहीं होना चाहिए और उसे जल्द से जल्द उसे फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए तभी इस सारीन्याय प्रक्रिया का कोई ओचित्य सिद्ध होगा। वर्ना तो सब बेकार है।

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  4. विचारणीय प्रश्न

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  5. उसे जल्द से जल्द उसे फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए।

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  6. बहुत ही गंभीर सवाल ,सरकार और पूरा सरकारी तंत्र कुतर्क पे चल रहा है ,इसे बदलने के लिए आम जनता को सर पर कफ़न बांधकर सड़कों पे निकलना होगा ,तब जाकर इस स्थिति को बदला जा सकता है / शर्मनाक है ये सरकारी व्यवस्था जिसके पास जनकल्याण के लिए पैसा नहीं है ,लेकिन अपराधियों को खिलाने के लिए पैसा है /

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  7. कानून में सुधार कर फाँसी के स्थान पर सूट करने का प्रावधान कर देना चाहिए.

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  8. गोदियाल जी पाक समर्थक आतंकवादीयों को सेकुलर गिरोह से पाल-पोस कर बढ़ा किया है अब सेकुलर गिरोह इनको बदहाल जेलों में थोड़े ही रख सकता है अपने इन महमानों की महमाननबाजी करना सेकुलर गिरोह अपना फर्ज समझता है सो फर्ज का निर्वाह हो रहा है

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  9. मैंने कल भी बेंगाणी जी के चिठ्ठे पर सुझाव दिया था, आज फ़िर दोहराता हूं… कसाब को फ़ाँसी दे दी तब तो वह आसान मौत मारा जायेगा…।
    उसकी मौत तो ऐसी होनी चाहिये कि वह खुद भी दोज़ख में और यहाँ धरती के लोग भी याद रखें…। इसीलिये मेरा सुझाव है कि जब तक उसे फ़ाँसी हो नहीं जाती (यानी 5-10 साल), तब तक रोज सुबह 5 और शाम को 5 कोड़े, उसके पिछवाड़े पर बरसाये जायें…

    (शरीयत के मुताबिक ज़मीन में आधा गाड़कर पत्थरों से कूटना हो तो वह भी किया जा सकता है) :) :) लेकिन आसानी से उसे मरने न दिया जाये…

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  10. वाजिब आशंका
    वोटतंत्र में ऐसा ही होता है

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  11. गंभीर और विचारणीय सवाल
    सचमुच क्या जेलों को अपने सुरक्षा तंत्र पर भरोसा नहीं है?
    वैसे तो फांसी की सजा ऐसे अपराधी के लिये बहुत छोटी है, फिर भी इसने जो पाने (यानि जन्नत में 72 हूरें) के लिये ये सब किया, उसे जल्द से जल्द दिला देनी चाहिये।
    कसाब की सभी छोटी से छोटी जरुरतें तो सरकार पूरी कर रही है, मगर असल जरूरत भी तो जल्द से जल्द पूरी करे।
    प्रणाम स्वीकार करें

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  12. इस बात का क्या औचित्य है कि हमारी सरकार उस पर इस तरह आगे भी देश का कीमती धन लुटाती रहे ?

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  13. गोदियाल जी अरे बाबा वोट का सवाल है....
    वेसे अगर मेरे बस मै हो तो इसे फ़ांसी नही दुं, इसे उन लोगो के हवाले कर दो जिन के परिवार के लोगो को इस ने ओर इस के साथियो ने मार दिया, ओर फ़ेंसला उन के हाथ मै छोड दो फ़िर इस सुयर की लाश को बार्डर पर जा कर टांग दो.... लेकिन बाबा वोट चहिये उस के लिये चाहे ईमान ही ना बिक जाये इन कमीने नेताओ का.... जब तक हम नही जागे गे तब तक इस सुयर की सेवा होती रहेगी

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  14. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 09.05.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://charchamanch.blogspot.com/

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Don't be confused, among peace, harmony  or war,  conflict, chaos, one among them  you have to choose,  two things are  only available r...