हो ली,,,
पर्व रंगों का है वेरंगीन बन,
बैठा हूं बातें करता खुद से,
कभी न जाने क्यों ऐसा लगे,
हाथ धो बैठा हूं सुध-बुध से।
मदहोश-बेखबर, था तो नहीं,
दर्द का एहसास है बे-खुद से,
घाव जिस्म पे मेरे आहिस्ता कर,
अनुनय यही है बस, हुद-हुद से।
पर्व रंगों का है वेरंगीन बन,
बैठा हूं बातें करता खुद से,
कभी न जाने क्यों ऐसा लगे,
हाथ धो बैठा हूं सुध-बुध से।
मदहोश-बेखबर, था तो नहीं,
दर्द का एहसास है बे-खुद से,
घाव जिस्म पे मेरे आहिस्ता कर,
अनुनय यही है बस, हुद-हुद से।
सुंदर | होली शुभ हो |
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