Friday, February 27, 2026

दरकार नहीं

मैं  अभी सो रहा हूं, मर्जी के हिसाब से, 

मर्जी के हिसाब से मुझे जागना है,

तुम मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी,

भाग लो, जितनी तेजी से तुम्हें भागना है।

1 comment:

ख़्याल !

दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न  सिकवा आता, गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता, सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक  तशद्दुद ' परचेत...