मैं अभी सो रहा हूं, मर्जी के हिसाब से,
मर्जी के हिसाब से मुझे जागना है,
तुम मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी,
भाग लो, जितनी तेजी से तुम्हें भागना है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
तू खुद ही से इकबार रूबरू तो हो जा, फिर जो कहना है, उसे आलेख लेना, अरे वो, कश्ती के मुसाफिर, उतरने से पहले, एकबार समन्दर तो जाकर देख लेना।
सुंदर
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