मैं अभी सो रहा हूं, मर्जी के हिसाब से,
मर्जी के हिसाब से मुझे जागना है,
तुम मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी,
भाग लो, जितनी तेजी से तुम्हें भागना है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न सिकवा आता, गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता, सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक तशद्दुद ' परचेत...
सुंदर
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