मुझे चाहिए इक ऐसा खोता, जब मैं चांहू तब उसे जोता। ढेंचू-ढेंचू करता वो दौड़ा आये, जब दूं समीप आने का न्योता। मुझे चाहिए इक ऐसा खोता..... कूल रहे हमेशा, जहां तक हो, किसी बड़े स्कूल से स्नातक हो, बोल न बोले कोई दिल चुभो ता, मुझे चाहिए इक ऐसा खोता..... ऋतु मुताबिक गाना गाना जाने, हर व्यंजन,पकवान पकाना जाने, कभी भी ऐन वक्त पे मिले न सोता, मुझे चाहिए इक ऐसा खोता.....
आपने कम शब्दों में गहरा दर्द रख दिया। जब अपना ही कोई बार-बार कोसता है, तब भरोसा सच में हिल जाता है। आपने “पानी पी-पीकर” वाला मुहावरा इस्तेमाल करके गुस्सा और कटाक्ष दोनों दिखा दिए।
ReplyDelete🙏🙏
Deleteसटीक
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