ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
आपने कम शब्दों में गहरा दर्द रख दिया। जब अपना ही कोई बार-बार कोसता है, तब भरोसा सच में हिल जाता है। आपने “पानी पी-पीकर” वाला मुहावरा इस्तेमाल करके गुस्सा और कटाक्ष दोनों दिखा दिए।
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Deleteसटीक
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