वाहियात

आज उन्होंने जैसे मुझे, 

पानी पी-पीकर के कोसा,

इंसानियत से 'परचेत', 

अब उठ गया है भरोसा।


Comments

  1. आपने कम शब्दों में गहरा दर्द रख दिया। जब अपना ही कोई बार-बार कोसता है, तब भरोसा सच में हिल जाता है। आपने “पानी पी-पीकर” वाला मुहावरा इस्तेमाल करके गुस्सा और कटाक्ष दोनों दिखा दिए।

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

यूं भी बावफा होते है लोग !

धार्मिक भावनाएं क्या हुई, कोई छुई-मुई हो गई !

एक खोती की अभिलाषा !