Friday, February 20, 2026

इल्तज़ा

 मोहब्बत मे, आंखों मे भर आए आंसुओं को

गिरने न देना 'परचेत',

क्योंकि प्यार के आंसू ही रूह की खुराक होते हैं।

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क्षणभंगुर

  उनको देखकर कुछ न भाया, सहज थे,असहज से भा गए, नूर चेहरे का तो तब छलका, महफ़िल में जब तुम आ गए।