दिल की बात

हमने भरोसा अभी भी कायम रखा है जीने मे,

मगर, ऐ 'परचेत',यह दर्द असहनीय है सीने में।

बड़े ही बुजदिल निकले ये सब, दिल दुखाने वाले,

हमने तो प्यासे को भी पानी पिलाया था, मदीने में।।


Comments

  1. भरोंसा को भरोसा करें |

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  2. सर, टंकण त्रुटियों के सुधार हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद। न चाहते हुए भी ये हो जाती हैं। Auto का जमाना है।

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