इश्क़ कोई पोंछा नहीं है,
सिखा गई आज काम वाली बाई,
किधर जाऊं समझ नहीं आता,
आगे कुआं है और पीछे खाई।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
मैंने ख्वाब देखा था, ख्वाहिश अधूरी रही, चाटने वाले चाट गए, प्लेट साफ पूरी रही।
वाह
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