Monday, February 9, 2026

दुविधा

इश्क़ कोई पोंछा नहीं है,

सिखा गई आज काम वाली बाई,

किधर जाऊं समझ नहीं आता,

आगे कुआं है और पीछे खाई।


1 comment:

क्षणभंगुर

  उनको देखकर कुछ न भाया, सहज थे,असहज से भा गए, नूर चेहरे का तो तब छलका, महफ़िल में जब तुम आ गए।