शरीक हुए थे जो कल के कवि सम्मेलन में,
वो सब के सब, एक ही थाली के चट्टे-बट्टे थे,
एक से बढ़के एक पैदाइशी चमचे, तलवेचाट,
बस,यही कहूंगा कि सबके सब उल्लू के पठ्ठे थे।🤣
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
सफर मे धूप तो बहुत होगी, सूरज को ढक सको तो चलो, एम्बूलैंस लेकर जा रही है रोगी, राह उसकी रोक सको तो चलो।
हा हा
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