Thursday, February 5, 2026

कोप

शरीक हुए थे जो कल के  कवि सम्मेलन में,

वो सब के सब, एक ही थाली के चट्टे-बट्टे थे,

एक से बढ़के एक पैदाइशी चमचे, तलवेचाट,

बस,यही कहूंगा कि सबके सब उल्लू के पठ्ठे थे।🤣


1 comment:

कुपत

तुम्हें पाने की चाह में मुद्दतों बैठे रहे हम, तुम्हारे बाप के पास, घंटों पैर दबाए मगर क्या मजाल कि  बुड्ढे को हुआ हो जरा भी एहसास।