मुहब्बत के खातिर तुम्हारी हर बगावत की,
हमेशा ही अगुवाई करता,
फक़त ख्वाबों में ही मुहब्बत की दुहाई दोगे
तो 'परचेत', अंजाम यही होगा।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
हो वर्चस्व की यदि अंंतहीन जंग, उसे मरते दम तक कभी न हारो, भद्र-प्रतिद्वंद्वी, बर्ताव हो निश्छल, हो शत्रु कपटी, उसे होश से मारो। मरुधर जो उ...
सुंदर
ReplyDelete