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Showing posts from October, 2012

सैंडी- विनाशकारी चक्रवाती महातूफान: एक अभिशाप जो बन सकता है वरदान !

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जल,थल,और नभ जीतने के बड़े-बड़े दावे करने वाला इक्कीसवीं सदी का इंसान एक बार फिर कुदरत के आगे असहाय दिखा। जैसा की आप भी कुछ दिनों से तमाम खबरिया माध्यमो  के जरिये  यह देख, सुन रहे होंगे कि  कैरेबियाई समुद्र क्षेत्र से उठा चक्रवाती तूफान सैंडी, दुनिया के एक साधन  सम्पन्न और सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका में किस तरह अपनी विनाशलीला का कहर बरपा रहा है। जन-धन की अपार क्षति से समूचा अमेरिका सिहर उठा है। उसके न्यूयार्क जैसे प्रमुख तटीय शहरों  के तमाम बुनियादी ढांचों को समुद्र का खारा नमकीन पानी अपनी आगोस में ले चुका है, जोकि आगे चलकर निश्चित तौर पर उसकी गुणवता को काफी हद तक प्रभावित करने और नुकशान पहुंचाने वाला है। अमरीका के दक्षिणी न्यूजर्सी और पूर्वी तटीय क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश और भयंकर तेज हवाओं ने कहर बरपा दिया है, वहाँ  समूचा बुनियादी ढाचा चरमरा सा गया है। इस भीषण तूफान के कारण कई इलाकों में पेड़ जड़ों से उखड़ गए, यातायात व्यवस्था चरमरा गई, दो दिनों से विद्युत आपूर्ति ठप्प है, व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद है, करीब १३००० उड...

क्षणिकाएं -मैंगो पीपुल ऑफ़ बनाना रिपब्लिक '

खट्टे-मीठे, रसीले,  सख्त और पितपिते, अफ़सोस   कि  सबके सब गए  बिक,   'मैंगो पीपुल ऑफ़   बनाना रिपब्लिक '  !! xxxxxxxxxxxxxxxxxxx गुरू ने शिष्य से कहा; सिद्ध करो देकर तर्क,   गरीब और अमीर  भिखमंगे के बीच का फर्क ! शिष्य ने कहा ; मुझे अच्छी तरह है याद,  एक करबद्ध होकर  जन-मानष  के दर  रोज पहुचता है और एक पांच साल बाद !   गरीब भिखमंगा लाचार,  भीख मांगते हुए शर्मशार होता है, जबकि अमीर भिखमंगा बेशर्म, मक्कार और गद्दार होता है !!   

दांव !

गुफ्तगू  दरमियाँ  उनके  कुछ यूं ,ऐसे हुई ,  लाठी  जब मेरी थी  तो भैंस तेरी कैसे हुई ?

कार्टून कुछ बोलता है- एक नया योग !

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काश, हम कुछ सीख इस बबलू से ही ले पाते !

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पैसों के लिए अपनी माँ-बहिनों और देश का सौदा करने वालों ! काश कि तुम लोग कुछ सीख, भरतपुर, राजस्थान  के इस  रिक्शा चालक, बबलू से ही ले पाते ! पेट के खातिर अपनी छाती पर कपडे से अपनी एक माह की नवजात बच्ची को बांधे यह शख्स चिलचिलाती धूप में अपने रिक्शे से सवारियों को ढोता  भरतपुर की गलियों में दिख जाएगा, जाकर देख आओ, गद्दारों ! दरिद्रता  और ठीक से देखभाल न हो पाने की वजह से एक माह पहले इसकी पत्नी का प्रसव के तुरंत बाद देहावसान  हो गया था ! इस नवजात बच्ची  का अब पिता के अलावा इस दुनिया में और कोई रिश्तेदार भी नहीं है ! अगर बबलू चाहता तो अपनी असमर्थता का रोना रोकर इस बच्ची का सौदा भी कर सकता था, क्योंकि खरीदने वाले धन्ना-सेठों की भी कोई कमी नहीं है इस देश में ! लेकिन नहीं,  उसने तुम्हारी तरह अपना जमीर नहीं बेचा, अपने कर्तव्य से विमुख नहीं हुआ,  हरामखोरों !  इतना ही नहीं, उसका  यह भी सपना है कि जब उसकी बेटी बड़ी होगी तो वह उसे खूब पढ़ायेगा, लिखायेगा भी !  कुछ ...

लघु व्यंग्य- किसी गिरे हुए प्रधानमंत्री को उठाना !

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'वक्त बलवान होता है'-  ज्ञानी बड़े-बुजुर्ग यह कहकर चले गए !  और  वो कुछ खूसट , जो न तो कुछ बोलते हैं और न ही वक्त को समझने की कोशिश  करते हैं, मुएँ यहीं सड रहे होते है ! ज्ञानी बुजुर्गों ने तो वक्त की नजाकत को समझा और फ़टाफ़ट चलते बने, क्योंकि वे जानते थे कि वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता ! कुटिल  इंसान भले ही दूसरों को धोखे में रख, खुद को सीधा, सच्चा और ईमानदार दिखाने की लाख कोशिश करे , खुद को लाख इस मुगालते में रखे कि वही एक अकेला हाई  क्वैलिटी का सैम्पल पीस है,  उसके बराबर जेंटलमैन इस दुनिया में कोई और है ही नहीं, मगर उसे वक्त ऐसा सबक सिखाता है कि एक पल में दुनिया की नजरों में बैठा वह शख्स  कब और कहाँ औंधे मुंह गिरा, उसे खुद को भी पता नहीं चल पाता! उसे इस बारे में  उसके द्वारा पाले गए बड़े-बड़े कुटिल अधिवक्ताओं...क्षमा करें... भविष्यवक्ताओं की फ़ौज भी कुछ नहीं बता पाती ! शो केश में सजाकर रखे उनके सारे पोथी-पातड़े बेकार साबित हो जाते है ! पब्लिक की गाढी कमाई के पैसों के बल पर हरवक्त अपने साथ दायें-बाएं, आगे-पी...

छिटपुट !

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छल-फ़रेबी से  बुन के रखते है वो  हर याद अपनी, मगर जब जिक्र करो  तो कहते है,ये बे-बुनी-याद है !  जब कभी मौक़ा मिलेगा, वो तुझे चूसकर फेंक देगा, इसलिए ऐ आम,  आदमी की इस कदर  दुहाई न दे !

कार्टून कुछ बोलता है- आँखों का फर्क !

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इस कार्टून के साथ कल  एक  मशहूर  ५५ शब्दिया कहानी जोड़ना भूल गया था , आज प्रस्तुत है ; नेता ने अपनी फूटी आँख का ओपरेशन करवाया  और पत्थर की आँख लगाई  ! चश्मा उतारकर निजी सचिव से बोला; क्या तुम पहचान सकते हो मैंने कौनसी आँख नकली लगाईं ? सेक्रेटरी ने जबाब दिया; हुजूर दाहिनी आँख !  नेता चकित होकर बोला ; कैसे पहचाना ? सचिव बोला ; हजूर नई है, इसलिए उसमे थोड़ी सी शर्म झलक रही है !  

कार्टून कुछ बोलता है- गलत आविष्कार के दुष्परिणाम !

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जो कुछ सासू जी ने लूटा,तो कुछ जमाई ने !

छल कपट,धोखा धड़ी और खुद नुमाई ने,    (खुद नुमाई= खुद की तारीफ़ ) क्या-क्या न सितम ढाये,यहां बेहयाई ने।   स्तब्ध खडा देखता है इस वतन 'परचेत',    जो कुछ सासू ने लूटा,तो कुछ जमाई ने।