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लघु उपन्यास- वक्त के सित्तम

(गत वर्ष  अपने ब्लॉग पर एक कहानी लिखी थी, "वक्त के सित्तम" ! अपने गिने-चुने पाठको ने खूब सराहा था, इसलिए उत्साहवश उसे उपन्यास का रूप देने की सोची ! किन्तु अफ़सोस कि समयाभाव के कारण एक पूर्ण उपन्यास नहीं बन पाया।  यूं कह लीजिये कि  एक लघु-उपन्यास अथवा एक लम्बी कहानी की शक्ल देने में कामयाब रहा हूँ।  ) वक्त के सित्तम ! ब डे लग्न और मेहनत से  उच्च श्रेणी के अंक प्रतिशत के साथ, इंदौर से सिविल इंजीनियरिंग में बी.ई. और फिर रुड़की से जियो-टेकनिकल में एम्.टेक करने के बाद बिक्रम  ने उस समय की देश में मौजूद, मात्र   दो नामी-गिनामी जियोसिन्थेटिक कंपनियों में से एक , कनाडा मूल की विदेशी कंपनी में बतौर प्रोजेक्ट इंजीनियर नौकरी ज्वाइन कर ली थी। एम.टेक का कोर्स खत्म होते ही कैम्पस से ही कम्पनी द्वारा उसका चयन कर लिया गया था।  विक्रम आशा और रूचि के अनुरूप अचानक मिली इस सफ़लता से अत्यन्त प्रसन्नचित था। चुने जाने के तीन महिने बाद ज्यों ही फाइनल सैमेसटर (ऐंड-टर्म ) के पेपर खत्म हुए और ...