इतना तो न बहक पप्पू ,
बहरे ख़फ़ीफ़ की बहर बनकर,
४ जून कहीं बरपा न दें तुझपे,
नादानियां तेरी, कहर बनकर।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
अगाध होते हैं रिश्ते दिलों के, इक ज़माना था जो हम गाते, तय पथ था और सफ़र अटल, उम्मीदों पे कब तक ठहर पाते। जागी है जब कुछ ऐसी तमन्ना कि इक नय...
इतना तो न बहक पप्पू
ReplyDeleteशानदार
कौंग्रेस की उम्मीदें
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