संशय!

इतना तो न बहक पप्पू , 

बहरे ख़फ़ीफ़ की बहर बनकर,

४ जून कहीं बरपा न दें तुझपे, 

नादानियां तेरी, कहर  बनकर।

Comments

  1. इतना तो न बहक पप्पू
    शानदार

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  2. कौंग्रेस की उम्मीदें

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