शान-ओ-शौकत के लिए, लूटने की इनकी लगन देखो, दौलत दिखे जहाँ, झपटते है कैसे,होकर ये नगन देखो। करतल लिए जपते हैं माला, नैतिकता एवं आदर्श की, सहज हैं चेहरे मगर इनके शठ-दिलों की अगन देखो। खुल जाए जो एक बार किस्मत किसी अंगूठा छाप की, कुर्सी पे बैठ करता है मक्कार कैसे पटुता से गबन देखो। लोकतंत्र को समझ लिया इन्होने, इक पुश्तैनी बपौती, सिंहासन पे काबिज रहने की पीढ़ी दर पीढ़ी लगन देखो। देश के खाली खलीतों से इनकी, और न खिदमत होगी, धरा तो लूट खाई है हरामखोरों, अब जाकर गगन देखो। खलीते=जेबें चित्र गूगल साभार !