अपनी हर परेशानी का सबब, मैं तेरे मूंह पे फेंक देता,
गर ये कश्ती का मुसाफिर 'परचेत', समंदर देख लेता।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
अपनी हर परेशानी का सबब, मैं तेरे मूंह पे फेंक देता, गर ये कश्ती का मुसाफिर 'परचेत', समंदर देख लेता।
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