Thursday, July 2, 2026

चराग तले...

 









नाम सूरत और शहर की ऐसी सूरत,

आ जाते हैं, मुंह उठाके ज़रूरत बे-ज़रूरत,

मशहूर हो जाने की ख़्वाहिश है मगर,

चराग ढूंढे है फिर भी 'परचेत', अंधेरे की मूरत।

1 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर

Friday, 03 July, 2026  

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