बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ हैं। सच तो यह है कि हर इंसान अपनी जिंदगी में कभी न कभी बड़े सपने देखता है। कुछ सपने पूरे हो जाते हैं और कुछ अधूरे रह जाते हैं, लेकिन सपने देखना कभी गलत नहीं होता। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com धन्यवाद
ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
My fondest wish is to inspire someone else to write something even better than I have done.
Look forward to receiving your creative suggestions.
regards,
Godiyal
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
4 Comments:
सुंदर
बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ हैं। सच तो यह है कि हर इंसान अपनी जिंदगी में कभी न कभी बड़े सपने देखता है। कुछ सपने पूरे हो जाते हैं और कुछ अधूरे रह जाते हैं, लेकिन सपने देखना कभी गलत नहीं होता। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
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