...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
अंदाज!
मेरी डांडी-कांठियों का मुलुक ज्यैल्यू, Go there in the spring. हैरा बण मा बुरांश का फूल जब बण मा आग लगाणा होला, भीटा पाखों थैं फ्योलिं का फ...
-
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
-
तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
-
नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
☺☺☺
ReplyDeleteभाई जी ,मुबारक हो ....
ReplyDeleteबहुत खूब बुलवाया आपने :-))
shabd shabd ka pher ...
ReplyDeleteहा हा ... बिन बोले ही बहुत कुछ लिख गए आज आप ...
ReplyDeleteबिन बोले ही बहुत कुछ लिख गए आज आप ...
ReplyDelete:-)
क्या बात है.... :))))
ReplyDeleteवाह!
बाप रे..
ReplyDelete