...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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दरकार
मैं सो रहा हूं मर्जी के हिसाब से, मुझे अपनी मर्जी के हिसाब से जागना है, मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी, तू भाग ले, जितनी तेजी से तुझे भागना ह...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
☺☺☺
ReplyDeleteभाई जी ,मुबारक हो ....
ReplyDeleteबहुत खूब बुलवाया आपने :-))
shabd shabd ka pher ...
ReplyDeleteहा हा ... बिन बोले ही बहुत कुछ लिख गए आज आप ...
ReplyDeleteबिन बोले ही बहुत कुछ लिख गए आज आप ...
ReplyDelete:-)
क्या बात है.... :))))
ReplyDeleteवाह!
बाप रे..
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