यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
☺☺☺
ReplyDeleteभाई जी ,मुबारक हो ....
ReplyDeleteबहुत खूब बुलवाया आपने :-))
shabd shabd ka pher ...
ReplyDeleteहा हा ... बिन बोले ही बहुत कुछ लिख गए आज आप ...
ReplyDeleteबिन बोले ही बहुत कुछ लिख गए आज आप ...
ReplyDelete:-)
क्या बात है.... :))))
ReplyDeleteवाह!
बाप रे..
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