अधूरी हसरत
दिलों की हसरत, मिलन की चाहत, न तो इबादत ही रंग लाई और न ही दिल की दुआ , हो जाता मिलन अचानक हमारा भी किसी मोड़ पर 'परचेत,' कभी ऐसा इत्तेफाक न हुआ।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !