साफ-गोई की सजा यह मिली हमको
कि हम झूठे बन गये,
यही वजह थी कि जहां के आगे ऐ जिंदगी,
हम अनूठे बन गये।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
गर तुम न खरीददार होते, यकीन मानिए, टके-दो-टके में भला कौन बिकता? मुहब्बत बिकाऊ न है और न थी कभी, बस, निवेश गलत किया है तुमने, इसीलिए घर मे...
सुंदर
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