दौर-ए-बदलाव

सांझ ढले, मेरे साथ बैठकर 

एक पैग व्हिस्की,

कभी वो संग-सग पीती थी,

जब न तो आभासी दुनिया थी,

और ना ही वो इस कदर ,

अलग ही दुनियां में रहकर जीती थी।

अब उसने व्हिस्की पीना छोड़ दिया है,

आजकल दिन-रात सेल-फोन पीती है।।

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