Friday, January 30, 2026

दौर-ए-बदलाव

सांझ ढले, मेरे साथ बैठकर 

एक पैग व्हिस्की,

कभी वो संग-सग पीती थी,

जब न तो आभासी दुनिया थी,

और ना ही वो इस कदर ,

अलग ही दुनियां में रहकर जीती थी।

अब उसने व्हिस्की पीना छोड़ दिया है,

आजकल दिन-रात सेल-फोन पीती है।।

1 comment:

चटोरों की....

मैंने ख्वाब देखा था, ख्वाहिश अधूरी रही, चाटने वाले चाट गए, प्लेट साफ पूरी रही।