Tuesday, January 6, 2026

मुफ्तखोरी

जब भी, जो भी जुबां पे आता है तुम्हारी, बक देते हो, 

मुफ्त में जिसका भी लिखा हुआ मिल जाए पढ़ देते हो, 

फुर्सत मिले तुम्हें तो सोचना, एक कमेंट के भूखें को

क्या, सही में कभी आप उसको उसका हक देते हो?



5 comments:


  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 7 जनवरी 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. वाह! क्या बात है !,

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इल्तज़ा

  मोहब्बत मे, आंखों मे भर आए आंसुओं को गिरने न देना 'परचेत', क्योंकि प्यार के आंसू ही रूह की खुराक होते हैं।