उलझकर मेरी बातें कुछ यूं,
तुम्हारी बातों में रह गई,
दिल की जो भी ख्वाहिशें थी,
जज्बातों में बह गई।
जिया उलझाने की तुम्हारी
ये हरकतें बड़ी नासाज़ लगी,
श्रुतिपुट जो सुनना न चाहते थे
वो तुम्हारी नज़रें कह गई।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
उसका स्वरूप हरदम सराहता हूं, जिस रोशनी को दिल से चाहता हूं, आश लगाए रहता हूं कि रोशनी कभी तो मेरे घर आएगी, अतिशय प्रेममय होकर आलिंगनबद्...
सुंदर
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