Sunday, January 11, 2026

द्वंद्व

उलझकर मेरी बातें कुछ यूं,  

तुम्हारी बातों में रह गई,

दिल की जो भी ख्वाहिशें थी, 

जज्बातों में बह गई।

जिया उलझाने की तुम्हारी 

ये हरकतें बड़ी नासाज़ लगी,

श्रुतिपुट जो सुनना न चाहते थे 

वो तुम्हारी नज़रें कह गई।



2 comments:

श्रद्धांजलि!

वो बिन वजह हंसना तेरा,  वो बिन वजह रोना तेरा, जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी -मेरी कहानी है।  इक प्यार का नगमा.... #आशाभोंसलेविनम्रशर्द्दाजली!