देहिक अपच हो तो खुशी
एक कब्ज़हर चूर्ण जैसा होता है,
यूं तो समय प्रतूर्ण है मगर,
हर पल महत्वपूर्ण जैसा होता है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
नाम सूरत और शहर की ऐसी सूरत, आ जाते हैं, मुंह उठाके ज़रूरत बे-ज़रूरत, मशहूर हो जाने की ख़्वाहिश है मगर, चराग ढूंढे है फिर भी 'परचेत...
सुंदर
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