देहिक अपच हो तो खुशी
एक कब्ज़हर चूर्ण जैसा होता है,
यूं तो समय प्रतूर्ण है मगर,
हर पल महत्वपूर्ण जैसा होता है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
तुम्हें पाने की चाह में मुद्दतों बैठे रहे हम, तुम्हारे बाप के पास, घंटों पैर दबाए मगर क्या मजाल कि बुड्ढे को हुआ हो जरा भी एहसास।
सुंदर
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