देहिक अपच हो तो खुशी
एक कब्ज़हर चूर्ण जैसा होता है,
यूं तो समय प्रतूर्ण है मगर,
हर पल महत्वपूर्ण जैसा होता है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
देहिक अपच हो तो खुशी एक कब्ज़हर चूर्ण जैसा होता है, यूं तो समय प्रतूर्ण है मगर, हर पल महत्वपूर्ण जैसा होता है।
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