देहिक अपच हो तो खुशी
एक कब्ज़हर चूर्ण जैसा होता है,
यूं तो समय प्रतूर्ण है मगर,
हर पल महत्वपूर्ण जैसा होता है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
गिले-शिकवे तुम हजार करोगे और खुदा होने का दावा भी बार-बार करोगे, 'परचेत' पूछता है अरे वो जाहिलों, खुद के दिल से खुद का कब दीदार करो...
सुंदर
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