पल-पल



क्या बताऊं कि ये 

चोंतीस साल कैसे बीते,

किस मुश्किल में 

हर लम्हा गुजरा जीते-जीते,

याद तो होगा तुम्हें कि मैंने 

तुमको भी न्योता दिया था,

जवानी के फोल्डर जब मैंने, 

'बीवी' ऐप डाउनलोड किया था!!

Comments

  1. यह कविता पढ़कर हँसी भी आती है और हल्की सी टीस भी महसूस होती है। आप ज़िंदगी के लंबे सफ़र को मज़ाकिया अंदाज़ में इतनी सच्चाई से कह देते हैं कि बात सीधी दिल तक जाती है। आप संघर्ष, यादें और रिश्तों की उलझन को बिना रोए, मुस्कराते हुए रख देते हैं।

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