क्या बताऊं कि ये
चोंतीस साल कैसे बीते,
किस मुश्किल में
हर लम्हा गुजरा जीते-जीते,
याद तो होगा तुम्हें कि मैंने
तुमको भी न्योता दिया था,
जवानी के फोल्डर जब मैंने,
'बीवी' ऐप डाउनलोड किया था!!
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
मोहब्बत मे, आंखों मे भर आए आंसुओं को गिरने न देना 'परचेत', क्योंकि प्यार के आंसू ही रूह की खुराक होते हैं।
यह कविता पढ़कर हँसी भी आती है और हल्की सी टीस भी महसूस होती है। आप ज़िंदगी के लंबे सफ़र को मज़ाकिया अंदाज़ में इतनी सच्चाई से कह देते हैं कि बात सीधी दिल तक जाती है। आप संघर्ष, यादें और रिश्तों की उलझन को बिना रोए, मुस्कराते हुए रख देते हैं।
ReplyDelete🙏🙏
Deleteहा हा
ReplyDelete